स्मार्ट गोलू हाथी: चश्मे ने बदली जंगल की दुनिया

गोलू हाथी की मजेदार कहानी बच्चों को सिखाती है कि कम दिखने जैसी समस्या को छुपाने के बजाय डॉक्टर से इलाज कराना चाहिए। चश्मा पहनना कमजोरी नहीं, समझदारी है।

'सुंदरवन' जंगल में 'गोलू' नाम का एक बहुत ही प्यारा और नटखट हाथी रहता था। गोलू को केले खाना बहुत पसंद था। वह दिन भर बस केले ही ढूँढता रहता था। लेकिन गोलू के साथ एक बड़ी समस्या थी उसे कम दिखाई देता था। उसकी नज़र कमज़ोर थी, लेकिन उसे खुद इस बात का पता नहीं था।

कहानी

गोलू की कमज़ोर नज़र की वजह से अक्सर मज़ेदार गड़बड़ियाँ होती रहती थीं। एक दिन वह तालाब किनारे पानी पीने गया। वहाँ एक बड़ा, गोल-मटोल पत्थर रखा था। गोलू को लगा कि वह एक बहुत बड़ा तरबूज़ है। उसने आव देखा न ताव, दौड़कर पत्थर को अपनी सूँड से उठाने की कोशिश की और 'धड़ाम' से गिर पड़ा।

कभी-कभी वह अपने दोस्त 'चिंटू बंदर' को केला समझकर पकड़ने दौड़ता, तो कभी झाड़ियों में लगे लाल फूलों को समझकर खाने की कोशिश करता।

जंगल के बाकी जानवर गोलू की इन हरकतों पर हँसते थे। चिंटू बंदर और 'मिट्ठू तोता' गोलू के सबसे अच्छे दोस्त थे। उन्हें गोलू की चिंता होने लगी।

चिंटू ने कहा, 'गोलू भाई, मुझे लगता है तुम्हारी आँखों में कुछ गड़बड़ है। तुम हर चीज़ से टकराते रहते हो।'

मिट्ठू तोता बोला, 'हाँ, कल तुम मुझे लाल मिर्च समझकर खाने वाले थे! हमें डॉक्टर उल्लू के पास चलना चाहिए।'

जंगल के मशहूर आँखों के डॉक्टर 'डॉक्टर उल्लू' एक पुराने बरगद के पेड़ पर रहते थे। वे बहुत समझदार थे और दिन में भी अपना बड़ा सा चश्मा पहनकर रहते थे।

तीनों दोस्त डॉक्टर उल्लू के क्लिनिक पहुँचे। डॉक्टर उल्लू ने गोलू को एक बड़ी कुर्सी पर बैठाया।

डॉक्टर ने कहा, 'गोलू बेटा, सामने दीवार पर देखो और बताओ तुम्हें क्या दिख रहा है?'

दीवार पर एक बड़ा सा बोर्ड लगा था जिस पर फलों के चित्र बने थे। सबसे ऊपर एक बड़ा सा सेब था, उसके नीचे एक केला और सबसे नीचे एक छोटा सा अंगूर।

गोलू ने आँखें सिकोड़कर देखा और बोला, 'डॉक्टर अंकल, मुझे सबसे ऊपर एक लाल रंग की गेंद दिख रही है, उसके नीचे एक पीला बूमरैंग (खेलने का एक औज़ार) और सबसे नीचे एक चींटी।'

डॉक्टर उल्लू समझ गए। उन्होंने कहा, 'हम्म... मामला गंभीर है। गोलू को पास और दूर, दोनों का कम दिखता है।'

डॉक्टर उल्लू अपनी अलमारी में गए और एक बहुत बड़ा, लाल फ्रेम वाला चश्मा लेकर आए। वह चश्मा इतना बड़ा था कि किसी इंसान के पूरे चेहरे पर भी न आए, लेकिन गोलू के बड़े से चेहरे के लिए वह बिल्कुल सही था।

डॉक्टर ने चश्मा गोलू की आँखों पर लगाया।

जैसे ही गोलू ने चश्मा पहना, उसकी दुनिया बदल गई। उसने कहा, 'अरे वाह! यह तो सेब है, और वह केला! और डॉक्टर अंकल, आपकी मूंछों पर एक मक्खी बैठी है!'

सब हँसने लगे। गोलू बहुत खुश था। उसे अब सब कुछ साफ़-साफ़ दिख रहा था।

गोलू वह बड़ा सा लाल चश्मा पहनकर जब जंगल में निकला, तो वह बहुत ही अलग और स्मार्ट लग रहा था। पहले कुछ जानवर उसे देखकर हँसे, लेकिन गोलू को कोई फर्क नहीं पड़ा।

अब गोलू कभी किसी पेड़ से नहीं टकराता था। उसे दूर से ही पता चल जाता था कि सबसे पके हुए और मीठे केले किस पेड़ पर लगे हैं। वह अपने दोस्तों को भी दूर से पहचान लेता था।

धीरे-धीरे जंगल के सभी जानवरों को गोलू का नया रूप पसंद आने लगा। वे उसे 'स्मार्ट गोलू' कहने लगे। गोलू को समझ आ गया कि चश्मा पहनने में कोई बुराई नहीं है, बल्कि यह तो उसकी मदद करता है। उसने अपने लाल चश्मे को अपना सबसे अच्छा दोस्त बना लिया।

सीख

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि 'अगर हमें कोई परेशानी है, जैसे कम दिखाई देना, तो उसे छुपाना नहीं चाहिए बल्कि डॉक्टर से मदद लेनी चाहिए। चश्मा पहनना या किसी मदद की चीज़ का इस्तेमाल करना कोई शर्म की बात नहीं है। यह हमारी ज़िंदगी को आसान और बेहतर बनाता है। हमें अपनी कमियों को स्वीकार करके उन्हें अपनी ताकत बनाना चाहिए।'

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