संसद से ट्रांसजेंडर संशोधन विधेयक पास, सरकार बोली – अधिकारों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम

संसद ने ट्रांसजेंडर संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। सरकार ने कहा कि यह फैसला ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों की सुरक्षा और समानता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी

ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक को बुधवार को संसद से मंजूरी मिल गई। राज्यसभा ने भी इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस संशोधन के जरिए ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से जुड़े अधिकारों और उनकी पहचान से संबंधित प्रावधानों में बदलाव किया गया है।

नई दिल्ली: भारत की संसद ने ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़े कानून में संशोधन करने वाले ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। लोकसभा में पारित होने के बाद बुधवार को राज्यसभा ने भी इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया, जिसके साथ ही यह विधेयक संसद के दोनों सदनों से पास हो गया। सरकार ने इसे प्रशासनिक स्पष्टता लाने और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया है, जबकि विपक्ष के कुछ सदस्यों ने इसके कुछ प्रावधानों पर चिंता जताई।

राज्यसभा में चर्चा के बाद पारित हुआ विधेयक

राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्री वीरेंद्र कुमार ने कहा कि यह संशोधन समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की दिशा में उठाया गया कदम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधेयक का उद्देश्य उन लोगों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है जो जैविक कारणों से भेदभाव का सामना करते हैं।

मंत्री ने कहा कि संशोधन के बाद भी ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को कानूनी मान्यता और सुरक्षा मिलती रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसे लोगों को मुख्यधारा से जोड़ना है ताकि उन्हें सामाजिक अलगाव का सामना न करना पड़े। सरकार के अनुसार, देश के कई राज्यों में ट्रांसजेंडर समुदाय के कल्याण के लिए संस्थागत व्यवस्था बनाई गई है और 30 से अधिक राज्यों में ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड गठित किए जा चुके हैं।

विधेयक में क्या है नया

संशोधित विधेयक में “ट्रांसजेंडर” शब्द की परिभाषा को अधिक स्पष्ट किया गया है। इसमें यह प्रावधान किया गया है कि अलग-अलग यौन अभिविन्यास जैसे गे, लेस्बियन या बाइसेक्सुअल पहचान को इस कानून के दायरे से अलग रखा जाएगा। सरकार का कहना है कि यह संशोधन प्रशासनिक भ्रम को दूर करने और कानून के लागू होने में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को कम करने के लिए किया गया है।

यह विधेयक पहले लोकसभा में पारित हुआ था और उसके बाद इसे राज्यसभा में चर्चा के लिए लाया गया, जहां विपक्ष द्वारा इसे चयन समिति को भेजने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन सदन ने उसे स्वीकार नहीं किया और विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया।

विपक्ष ने जताई आपत्ति

राज्यसभा में चर्चा के दौरान कई विपक्षी सदस्यों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों को लेकर चिंता व्यक्त की। आम आदमी पार्टी की सांसद स्वाति मालीवाल ने कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ हो रहे भेदभाव को दूर करना जरूरी है, लेकिन विधेयक में कुछ ऐसे प्रावधान हैं जो अस्पष्ट हैं। उन्होंने विशेष रूप से उस प्रावधान पर सवाल उठाया जिसमें किसी व्यक्ति को ट्रांसजेंडर बनने के लिए प्रेरित करना अपराध माना गया है। उनका कहना था कि इस तरह का प्रावधान परिवार, डॉक्टर या सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी कानूनी जोखिम में डाल सकता है। 

उन्होंने सुझाव दिया कि विधेयक को चयन समिति के पास भेजकर व्यापक परामर्श लिया जाना चाहिए। झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माझी ने भी कहा कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को अभी भी समान अवसर नहीं मिल रहे हैं और सरकार को उनके लिए अधिक ठोस कदम उठाने चाहिए।

Leave a comment