केंद्र सरकार ने RBI के लिए महंगाई लक्ष्य 4 प्रतिशत पर बरकरार रखते हुए इसे 2031 तक बढ़ा दिया है। 2 से 6 प्रतिशत के दायरे में महंगाई रखने का लक्ष्य जारी रहेगा, जिससे आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।
Business News: केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए खुदरा महंगाई (retail inflation) का लक्ष्य एक बार फिर 4 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। नए फैसले के तहत RBI को अगले पांच साल यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक महंगाई को 4 प्रतिशत के स्तर पर बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें 2 प्रतिशत का ऊपर-नीचे का दायरा तय किया गया है, यानी महंगाई 2 प्रतिशत से 6 प्रतिशत के बीच रहनी चाहिए।
सरकार के इस फैसले से यह साफ हो गया है कि मौद्रिक नीति (monetary policy) का फोकस आने वाले वर्षों में भी महंगाई नियंत्रण पर ही रहेगा। यह कदम देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने और आम लोगों की क्रय शक्ति को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
4 प्रतिशत लक्ष्य के साथ 2 से 6 प्रतिशत का दायरा
सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, मुद्रास्फीति का लक्ष्य 4 प्रतिशत तय किया गया है। इसके साथ 6 प्रतिशत की ऊपरी सीमा और 2 प्रतिशत की निचली सीमा निर्धारित की गई है। इसका मतलब यह है कि अगर महंगाई इस दायरे से बाहर जाती है, तो RBI को इसे नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे।
यह ढांचा RBI को लचीलापन देता है, ताकि वह बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार फैसले ले सके। साथ ही यह निवेशकों और बाजार के लिए एक स्पष्ट दिशा भी तय करता है, जिससे आर्थिक गतिविधियों में स्थिरता बनी रहती है।
2016 से लागू है महंगाई लक्ष्य का ढांचा
भारत में महंगाई लक्ष्य (inflation targeting) की यह व्यवस्था पहली बार साल 2016 में लागू की गई थी। उसी समय सरकार ने RBI को औपचारिक रूप से यह जिम्मेदारी सौंपी थी कि वह महंगाई को तय सीमा के भीतर बनाए रखे।
उस समय भी RBI को 4 प्रतिशत का ही लक्ष्य दिया गया था, जिसमें 2 प्रतिशत का ऊपर-नीचे का दायरा शामिल था। यह अवधि 31 मार्च 2021 तक के लिए थी। इसके बाद 2021 में सरकार ने इसी लक्ष्य को अगले पांच साल के लिए जारी रखा।
अब एक बार फिर इस लक्ष्य को 2031 तक बढ़ा दिया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार और RBI दोनों इस ढांचे को प्रभावी मानते हैं और इसे आगे भी जारी रखना चाहते हैं।
दूसरी बार लक्ष्य को बढ़ाने का फैसला
यह दूसरी बार है जब सरकार ने महंगाई लक्ष्य को बिना बदलाव के आगे बढ़ाया है। आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा 25 मार्च को जारी राजपत्र अधिसूचना में यह जानकारी दी गई। इसमें कहा गया कि केंद्र सरकार ने RBI के परामर्श से यह फैसला लिया है।
इस निर्णय से नीति में निरंतरता बनी रहती है, जो किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी होती है। इससे बाजार में अनिश्चितता कम होती है और निवेशकों का भरोसा मजबूत होता है।
मौद्रिक नीति समिति की भूमिका
महंगाई को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी RBI की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee - MPC) के पास होती है। यह एक 6 सदस्यीय समिति है, जो समय-समय पर बैठक कर ब्याज दरों और अन्य नीतिगत उपायों पर फैसला लेती है।
अक्टूबर 2016 में MPC की पहली बैठक हुई थी, जिसमें 31 मार्च 2021 तक महंगाई को 4 प्रतिशत के आसपास बनाए रखने का लक्ष्य तय किया गया था। तब से लेकर अब तक MPC लगातार महंगाई को नियंत्रित करने के लिए काम कर रही है।
आने वाले वित्त वर्ष 2026-27 की पहली MPC बैठक 6 अप्रैल से शुरू होगी और 8 अप्रैल को इसके फैसलों की घोषणा की जाएगी। इस बैठक पर बाजार और निवेशकों की खास नजर रहेगी।
पिछले वर्षों में महंगाई का प्रदर्शन
पिछले एक दशक में भारत में महंगाई ज्यादातर समय तय सीमा के भीतर ही रही है। लगभग तीन-चौथाई समय तक यह 2 से 6 प्रतिशत के दायरे में बनी रही। हालांकि, कोरोना महामारी के दौरान महंगाई में उतार-चढ़ाव देखने को मिला था।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, फरवरी महीने में खुदरा महंगाई बढ़कर 3.21 प्रतिशत हो गई, जो जनवरी में 2.74 प्रतिशत थी। यह अभी भी तय सीमा के भीतर है, जो यह दिखाता है कि RBI की नीतियां महंगाई को नियंत्रित रखने में प्रभावी रही हैं।
आम लोगों और निवेशकों पर असर
महंगाई का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। जब महंगाई बढ़ती है, तो रोजमर्रा की चीजें महंगी हो जाती हैं। ऐसे में RBI का लक्ष्य होता है कि महंगाई को नियंत्रण में रखा जाए, ताकि लोगों की खरीदारी क्षमता बनी रहे।
निवेशकों के लिए भी यह लक्ष्य अहम है। स्थिर महंगाई दर से ब्याज दरों में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होता, जिससे निवेश का माहौल बेहतर रहता है। इससे शेयर बाजार और अन्य निवेश विकल्पों में भी स्थिरता आती है।









