संयुक्त राष्ट्र में जयशंकर का बड़ा संदेश: ‘विचारों की हर सप्लाई-चेन की शुरुआत भारत से होती है’

विदेश मंत्री S. Jaishankar ने संयुक्त राष्ट्र में भारत की भूमिका पर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “विचारों की हर सप्लाई-चेन की शुरुआत भारत से होती है।” इस

S. Jaishankar ने United Nations मुख्यालय, New York City में आयोजित एक विशेष प्रदर्शनी के उद्घाटन के बाद वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका और प्रभाव को रेखांकित किया।

नई दिल्ली: Subrahmanyam Jaishankar ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में दिए अपने संबोधन के दौरान भारत की बौद्धिक, सांस्कृतिक और वैश्विक भूमिका को नई मजबूती के साथ दुनिया के सामने रखा। न्यूयॉर्क स्थित United Nations मुख्यालय में आयोजित ‘फ्रॉम शून्य टू अनंत (Zero to Infinity)’ प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर विदेश मंत्री ने कहा कि गणित का वैश्विक प्रसार केवल विज्ञान की कहानी नहीं, बल्कि सभ्यताओं के आपसी जुड़ाव का प्रमाण है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि “विचारों की हर सप्लाई-चेन का शुरुआती बिंदु अक्सर भारत ही होता है।”

जयशंकर का यह बयान केवल सांस्कृतिक गौरव का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत की बढ़ती रणनीतिक अहमियत का भी संकेत था। उनके संबोधन को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की “सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी” और बौद्धिक नेतृत्व के मजबूत उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत की बौद्धिक विरासत का प्रदर्शन

संयुक्त राष्ट्र में आयोजित इस विशेष प्रदर्शनी का उद्देश्य दुनिया को गणित और विज्ञान के क्षेत्र में भारत के ऐतिहासिक योगदान से परिचित कराना था। ‘फ्रॉम शून्य टू अनंत’ शीर्षक वाली यह प्रदर्शनी भारतीय सभ्यता द्वारा दो हजार वर्षों में गणित, खगोल विज्ञान और वैज्ञानिक चिंतन में दिए गए योगदान को दर्शाती है।प्रदर्शनी में महान भारतीय विद्वानों जैसे Aryabhata, Brahmagupta और Bhaskara II के कार्यों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। इसके अलावा केरल स्कूल ऑफ एस्ट्रोनॉमी एंड मैथेमेटिक्स की उपलब्धियों को भी वैश्विक समुदाय के सामने रखा गया।

विदेश मंत्री ने कहा कि आधुनिक विज्ञान की कहानी को लंबे समय तक सीमित दृष्टिकोण से देखा गया, जिसमें एशियाई और विशेष रूप से भारतीय योगदान को पर्याप्त महत्व नहीं मिला। उन्होंने संकेत दिया कि अब समय आ गया है कि वैश्विक इतिहास को अधिक संतुलित और समावेशी दृष्टिकोण से समझा जाए।

‘गणित’ के जरिए दिया भू-राजनीतिक संदेश

जयशंकर का संबोधन केवल गणितीय विरासत तक सीमित नहीं था। उन्होंने वैश्विक राजनीति में हो रहे पुनर्संतुलन का भी उल्लेख किया। विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया इस समय बड़े भू-राजनीतिक बदलावों से गुजर रही है, जहां राजनीतिक और आर्थिक शक्ति केंद्र बदल रहे हैं। इस बदलाव के साथ सांस्कृतिक और बौद्धिक पुनर्संतुलन भी अनिवार्य है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जयशंकर ने “विचारों की सप्लाई-चेन” शब्द का उपयोग करके यह स्पष्ट संकेत दिया कि वैश्विक व्यवस्था केवल आर्थिक या सैन्य शक्ति से नहीं चलती, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और वैचारिक प्रभाव भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत खुद को वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। भारत लगातार यह संदेश देता रहा है कि भविष्य की विश्व व्यवस्था अधिक बहुध्रुवीय और संतुलित होनी चाहिए।

भारत की सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी को मजबूती

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब केवल आर्थिक या सैन्य शक्ति के आधार पर अपनी भूमिका तय नहीं करना चाहता, बल्कि सांस्कृतिक और बौद्धिक प्रभाव के माध्यम से भी वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र में इस प्रदर्शनी का आयोजन भारत की “सॉफ्ट पावर” रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। योग, आयुर्वेद, भारतीय दर्शन, तकनीक और अब गणितीय विरासत के जरिए भारत लगातार दुनिया में अपनी सकारात्मक पहचान मजबूत कर रहा है।

सोशल मीडिया पर भी जयशंकर के संबोधन को व्यापक समर्थन मिला। कई विश्लेषकों ने इसे “सांस्कृतिक बहुध्रुवीयता” का उदाहरण बताया। उनका कहना था कि आर्थिक और सैन्य बहुध्रुवीयता तब तक अधूरी रहेगी जब तक दुनिया विभिन्न सभ्यताओं के बौद्धिक योगदान को समान रूप से स्वीकार नहीं करती।

भारत और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार

जयशंकर का यह संबोधन उस समय हुआ है जब भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की मांग को और अधिक मजबूती से उठा रहा है। भारत लंबे समय से यह तर्क देता रहा है कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की परिस्थितियों पर आधारित है और अब उसमें बदलाव की आवश्यकता है।

भारत का मानना है कि दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति और तेजी से उभरती आर्थिक ताकत होने के नाते उसे सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए। भारत जी4 समूह का हिस्सा है, जिसमें Brazil, Germany और Japan भी शामिल हैं। भारत को United States, United Kingdom और France का समर्थन प्राप्त है, जबकि China अब तक भारत की स्थायी सदस्यता का खुलकर समर्थन नहीं करता रहा है।

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