प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर पर भावुक ब्लॉग लिखते हुए इसे भारत की आस्था, आत्मा और स्वाभिमान का शाश्वत प्रतीक बताया। उन्होंने मंदिर के इतिहास, आक्रमण और पुनर्निर्माण की गाथा साझा की।
Somnath Temple: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात स्थित विश्वप्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर को लेकर एक भावनात्मक और प्रेरणादायी ब्लॉग लिखा है। अपने ब्लॉग में पीएम मोदी ने कहा कि “सोमनाथ” शब्द सुनते ही मन और हृदय में गर्व, आस्था और आत्मिक शक्ति का भाव जाग उठता है। भारत के पश्चिमी तट पर प्रभास पाटन में स्थित यह पवित्र धाम भारत की आत्मा का शाश्वत प्रतीक है। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और विश्वास की जीवंत पहचान है।
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में पहला स्थान
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ब्लॉग में बताया कि द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम में 12 ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख है और इसमें सबसे पहले सोमनाथ का नाम आता है। “सौराष्ट्रे सोमनाथं च” की पंक्ति इस बात का प्रमाण है कि सोमनाथ का आध्यात्मिक और सभ्यतागत महत्व सर्वोपरि रहा है। यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि भारत की सनातन चेतना का केंद्र है।
शास्त्रों में वर्णित सोमनाथ की महिमा
पीएम मोदी ने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए बताया कि सोमनाथ शिवलिंग के दर्शन से व्यक्ति पापों से मुक्त होता है और मनोवांछित फल प्राप्त करता है। शास्त्रों के अनुसार, यह स्थान मोक्ष और आत्मिक शांति का मार्ग प्रशस्त करता है। यही कारण है कि सदियों से करोड़ों श्रद्धालु यहां आकर आस्था और विश्वास का अनुभव करते रहे हैं।
आक्रमण और विध्वंस का दर्दनाक इतिहास
प्रधानमंत्री ने लिखा कि दुर्भाग्यवश, यही पवित्र सोमनाथ मंदिर विदेशी आक्रमणकारियों के निशाने पर रहा। उनका उद्देश्य केवल लूट नहीं, बल्कि भारत की आस्था और सभ्यता को नष्ट करना था। वर्ष 1026 में गजनी के महमूद ने सोमनाथ पर आक्रमण कर मंदिर को ध्वस्त कर दिया। यह मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक माना जाता है।
2026 का ऐतिहासिक महत्व

पीएम मोदी ने बताया कि वर्ष 2026 सोमनाथ मंदिर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस वर्ष सोमनाथ पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं। साथ ही यह मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने का भी अवसर है। 11 मई 1951 को सोमनाथ मंदिर का वर्तमान स्वरूप सामने आया था, जो भारत की आस्था और आत्मबल का प्रतीक बना।
विध्वंस नहीं, स्वाभिमान की गाथा है सोमनाथ
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कहा कि सोमनाथ की कहानी केवल विध्वंस की नहीं है। यह भारत माता की करोड़ों संतानों के स्वाभिमान, धैर्य और अटूट विश्वास की गाथा है। हर आक्रमण के बाद सोमनाथ फिर खड़ा हुआ और पहले से अधिक मजबूत बनकर उभरा। यही भारत की सभ्यता की सबसे बड़ी शक्ति है।
बलिदान और पुनर्निर्माण की परंपरा
पीएम मोदी ने लिखा कि जब भी सोमनाथ पर आक्रमण हुआ, तब ऐसे महान पुरुष और महिलाएं भी सामने आए जिन्होंने इसकी रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। पीढ़ी दर पीढ़ी भारत के लोगों ने मंदिर को फिर से खड़ा किया और उसकी चेतना को जीवित रखा। महमूद गजनवी लूटकर चला गया, लेकिन वह भारत की आस्था को नहीं मिटा सका।
देवी अहिल्याबाई और स्वामी विवेकानंद का योगदान
प्रधानमंत्री ने देवी अहिल्याबाई होलकर का स्मरण करते हुए कहा कि उनका योगदान सोमनाथ की पूजा परंपरा को जीवित रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। वहीं स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि उन्होंने सोमनाथ को भारतीय सभ्यता की जीवंत पाठशाला कहा था। विवेकानंद के अनुसार, ये मंदिर पुस्तकों से अधिक गहरा ज्ञान देते हैं।
सरदार पटेल और आजादी के बाद का पुनर्निर्माण
पीएम मोदी ने लिखा कि आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का दायित्व सरदार वल्लभभाई पटेल ने उठाया। 1947 में दीवाली के समय उनकी सोमनाथ यात्रा ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने संकल्प लिया कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण होगा और 1951 में यह सपना साकार हुआ।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद का ऐतिहासिक निर्णय
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने तमाम विरोधों के बावजूद सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन में भाग लिया। उनका यह निर्णय भारतीय इतिहास में एक नए अध्याय के रूप में दर्ज हुआ। यह घटना भारत की सांस्कृतिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनी।
केएम मुंशी और सभ्यतागत चेतना
पीएम मोदी ने केएम मुंशी के योगदान को भी याद किया। उनकी पुस्तक ‘Somnath, The Shrine Eternal’ को सोमनाथ की आत्मा को समझने के लिए महत्वपूर्ण बताया। यह पुस्तक भारत की उस चेतना को दर्शाती है, जो भौतिक विनाश के बाद भी जीवित रहती है।











