मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को गंभीर चुनौती दे दी है। इस स्थिति पर अब भारत के Rajnath Singh ने चिंता जताई है।
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में United States, Israel और Iran के बीच जारी संघर्ष लगातार तीव्र होता जा रहा है। इजरायल और अमेरिका आसमान से ईरान में भारी तबाही मचा रहे हैं, जबकि Tehran में भी नुकसान की खबरें सामने आ रही हैं। वहीं, ईरान भी इजरायल के अलावा मिडिल ईस्ट के विभिन्न देशों में मौजूद अमेरिकी एयरबेस पर ड्रोन और मिसाइल हमले कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान पर अब किसी भी समय जमीनी हमला शुरू हो सकता है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर खतरा बढ़ गया है।
इस पूरे संकट के बीच Rajnath Singh ने भी मिडिल ईस्ट के हालात पर बयान दिया है, जिसमें उन्होंने स्थिति पर सतर्कता बनाए रखने और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
मिडिल ईस्ट की असामान्यता
राजनाथ सिंह ने कहा,
'मिडिल ईस्ट में जो हो रहा है, वह बहुत असामान्य है। आगे चलकर इस क्षेत्र या हमारे पड़ोस में परिस्थितियां किस दिशा में जाएंगी, इस पर ठोस टिप्पणी करना कठिन है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और पूरे पर्शियन गल्फ क्षेत्र की स्थिरता वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी भी disturbance का सीधा असर तेल और गैस की सप्लाई पर पड़ता है। इसके अलावा, सप्लाई चेन में व्यवधान केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य क्षेत्रों और वैश्विक व्यापार पर भी इसका असर होता है।'
रक्षा मंत्री ने चेताया कि वर्तमान तनावपूर्ण स्थिति “हम सभी के लिए काफी चिंता की बात” है और यह असामान्यता धीरे-धीरे एक नई नॉर्मल बनती जा रही है।

समुद्री डोमेन का बदलता महत्व
राजनाथ सिंह ने कहा कि मैरिटाइम डोमेन आज केवल ट्रेड रूट या नौसैनिक शक्ति तक सीमित नहीं रहा। यह अब राष्ट्रीय लचीलापन, आर्थिक विकास, तकनीकी नवाचार और रणनीतिक स्वायत्तता का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। उन्होंने कहा, आज आवश्यकता है निरंतरता, समन्वय और राष्ट्रीय संकल्प की। यदि हम मिलकर अपने मैरिटाइम विजन को आगे बढ़ाते हैं, तो भारत न केवल अपने हितों की रक्षा करेगा बल्कि वैश्विक समुद्री स्थिरता में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।
रक्षा मंत्री ने बताया कि बदलती वैश्विक जियोपॉलिटिक्स के इस दौर में समुद्र एक बार फिर विश्व की पावर बैलेंस के केंद्र में आ गए हैं। उन्होंने कहा, एक प्रमुख समुद्री राष्ट्र के रूप में भारत का दायित्व है कि वह विश्वास, क्षमता और स्पष्ट दृष्टि के साथ नेतृत्व प्रदान करे। राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना की आधुनिक क्षमताओं पर जोर देते हुए कहा कि भारत अब “Builder’s Navy” बन चुका है।
वे बोले, आज जितने भी वॉरशिप और सबमरीन ऑर्डर पर हैं, वे सभी भारतीय शिपयार्ड्स में बन रही हैं। डिज़ाइन, इंजीनियरिंग, निर्माण और लाइफसायकल सपोर्ट की पूरी क्षमता हमारे भीतर विकसित हो रही है। यही असली आत्मनिर्भरता है। यह केवल नारा नहीं, बल्कि व्यावहारिक वास्तविकता बन गई है। राजनाथ सिंह ने चेताया कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि कई देश अब जमीन, हवा, समुद्र और अंतरिक्ष में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, और यह स्थिति भविष्य में और अधिक जटिल और डायनामिक हो सकती है।













