उत्तर प्रदेश के सतीश ने गरीबी और मजदूरी के बीच पढ़ाई जारी रखी। ईंट भट्टे पर काम करने और पिता को खोने के बाद भी उन्होंने SSC CGL की तैयारी नहीं छोड़ी और 2021 में असिस्टेंट अकाउंटेंट ऑफिसर बने।
SSC Success Story: उत्तर प्रदेश के संभल जिले के सतीश का बचपन बेहद कठिन परिस्थितियों में बीता। ईंट भट्टे पर मजदूरी करने से लेकर शादियों में लाइट उठाने तक उन्होंने कई तरह के काम किए। एक सार्वजनिक अपमान ने उन्हें जिंदगी बदलने का संकल्प दिया। दिन में मेहनत और रात में पढ़ाई करते हुए उन्होंने आखिरकार SSC CGL परीक्षा पास की और सरकारी अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।
ईंट भट्टे पर हुआ जन्म, वहीं से शुरू हुआ संघर्ष
सतीश उत्तर प्रदेश के संभल जिले के एक बेहद गरीब परिवार से आते हैं। उनका जन्म ईंट भट्टे पर हुआ था, जहां उनका परिवार प्रवासी मजदूर के रूप में काम करता था। परिवार में कई भाई-बहन थे और आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल था।

बचपन में पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल नहीं मिला। परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण कम उम्र में ही उन्हें काम करना पड़ा। जिस जगह दूसरे बच्चे पढ़ाई और खेलकूद में समय बिताते थे, वहीं सतीश मिट्टी और ईंटों के बीच अपना बचपन गुजार रहे थे।
धीरे-धीरे उनके हाथों में किताबों की जगह ईंटें आ गईं। उन्होंने कम उम्र में ही मजदूरी शुरू कर दी और परिवार की आर्थिक मदद करने लगे।
ईंट ढोने से लेकर शादियों में काम करने तक
सतीश ने ईंट भट्टे पर मजदूरी करने के साथ शादियों में लाइट उठाने का काम भी किया। दिनभर शारीरिक मेहनत के बाद रात में भी काम करना उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया था।
इसी दौरान एक घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। एक पार्टी में लाइट उठाते समय उनके हाथ से तार छूट गया। इस पर वहां मौजूद एक व्यक्ति ने सबके सामने उन्हें थप्पड़ मार दिया।
यह घटना सतीश के लिए सिर्फ शारीरिक चोट नहीं थी। उन्हें लगा कि अगर जिंदगी इसी तरह चलती रही तो उन्हें बार-बार अपमान का सामना करना पड़ेगा। इसी घटना के बाद उन्होंने इस स्थिति से बाहर निकलने और अपनी जिंदगी बदलने का फैसला किया।
दिन में मजदूरी, रात में पढ़ाई
सतीश के लिए पढ़ाई शुरू करना आसान नहीं था। वह दिनभर पिता के साथ बेलदारी और मजदूरी करते थे और शाम के बाद पढ़ाई के लिए समय निकालते थे।
काम के बाद शरीर पूरी तरह थक जाता था, लेकिन उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। कई बार थकान के बावजूद वह साइकिल से ट्यूशन पढ़ने जाते थे। सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई करना उनके लिए लगातार संघर्ष का हिस्सा रहा।
इसी दौरान उन्होंने यह समझ लिया था कि शिक्षा ही उन्हें मजदूरी और गरीबी के चक्र से बाहर निकाल सकती है। इसलिए उन्होंने काम के साथ पढ़ाई को जारी रखा और अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा।
पिता के निधन ने बढ़ाई मुश्किलें
सतीश की जिंदगी में एक और बड़ा झटका तब आया, जब उनके पिता गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। साल 2018-19 का दौर उनके लिए बेहद कठिन रहा। एक तरफ वह मजदूरी और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ घर में पिता की बीमारी की चिंता थी।
10 मार्च 2019 को उनके पिता का निधन हो गया। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि उस समय घर में जरूरी खर्चों के लिए भी पैसे नहीं थे। पिता की मौत के बाद सतीश मानसिक रूप से काफी टूट गए और मुश्किल दौर से गुजरे।
इसके बावजूद उन्होंने धीरे-धीरे खुद को संभाला और सरकारी नौकरी हासिल करने के अपने लक्ष्य को फिर से प्राथमिकता दी।
SSC CGL पास कर बने असिस्टेंट अकाउंटेंट ऑफिसर
साल 2019-20 के दौरान सतीश ने सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू की। तैयारी के दौरान उन्हें कई असफलताओं का सामना करना पड़ा। खासतौर पर गणित उनके लिए चुनौती बना रहा।
लोगों के ताने भी सुनने पड़े कि सरकारी नौकरी की तैयारी करने से क्या हासिल होगा। लेकिन सतीश ने इन बातों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। निराशा के समय वह खुद को प्रेरित रखने की कोशिश करते रहे और लगातार मेहनत करते रहे।
आखिरकार साल 2021 में उनकी मेहनत रंग लाई। उन्होंने कर्मचारी चयन आयोग यानी SSC की Combined Graduate Level परीक्षा पास की और Assistant Accountant Officer (AAO) के पद पर चयनित हुए।
जिस दिन SSC का रिजल्ट आया, सतीश अपनी मां के गले लगकर भावुक हो गए। उनकी आंखों से निकले आंसू वर्षों के संघर्ष, पिता की याद और अपनी मेहनत से हासिल की गई सफलता की कहानी बयां कर रहे थे।
सतीश की कहानी बताती है कि कठिन आर्थिक परिस्थितियां किसी व्यक्ति के सपनों को रोक नहीं सकतीं। अगर लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत लगातार जारी रहे और असफलताओं के बावजूद कोशिश न छोड़ी जाए, तो जिंदगी की दिशा बदली जा सकती है।











