Starbucks ने अपने AI-पावर्ड इन्वेंट्री प्रोग्राम को बंद कर दिया है। सिस्टम दूध और अन्य प्रोडक्ट्स की सही पहचान नहीं कर पा रहा था, जिसके चलते कंपनी को फिर से मैनुअल इन्वेंट्री सिस्टम अपनाना पड़ा।
Tech: दुनियाभर में AI को भविष्य की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी माना जा रहा है, लेकिन हाल ही में Starbucks के एक ट्रायल ने इसकी सीमाओं को भी सामने ला दिया। कंपनी ने अपने स्टोर्स में AI-पावर्ड इन्वेंट्री सिस्टम शुरू किया था, जिसका मकसद प्रोडक्ट्स की ऑटोमैटिक गिनती और स्टॉक मैनेजमेंट को आसान बनाना था। हालांकि, सिस्टम दूध और अन्य सामान की पहचान में बार-बार गलती करने लगा, जिसके बाद इसे बंद करना पड़ा।
AI सिस्टम से स्टॉक मैनेजमेंट आसान बनाने की कोशिश
Starbucks ने अपने उत्तरी अमेरिकी स्टोर्स में AI आधारित इन्वेंट्री प्रोग्राम शुरू किया था। इस सिस्टम का मकसद स्टोर्स में प्रोडक्ट की कमी और गलत स्टॉक मैनेजमेंट जैसी समस्याओं को कम करना था।

रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों को केवल कैमरा और LIDAR टेक्नोलॉजी से लैस टैबलेट के जरिए अलमारियों को स्कैन करना होता था। इसके बाद AI सिस्टम खुद ही दूध, सिरप और ड्रिंक बनाने के सामान की गिनती कर लेता था।
कंपनी को उम्मीद थी कि इससे मैनुअल काउंटिंग की जरूरत कम होगी और स्टॉक ट्रैकिंग ज्यादा तेज और सटीक बनेगी।
दूध पहचानने में AI से हुई बड़ी गलती
ट्रायल के दौरान सबसे बड़ी समस्या तब सामने आई, जब AI सिस्टम अलग-अलग तरह के दूध में फर्क नहीं कर पाया। रिपोर्ट के अनुसार सिस्टम कई बार ओट मिल्क और बादाम मिल्क जैसे प्रोडक्ट्स को गलत पहचान रहा था।
कुछ मामलों में AI ने प्रोडक्ट्स की गलत गिनती की, जबकि कई बार कुछ सामान को पूरी तरह स्कैन ही नहीं किया। पैकेजिंग और लेबल में मामूली बदलाव भी सिस्टम को भ्रमित कर रहे थे।
यही वजह रही कि जिस तकनीक को इंसानों की जगह लेने वाला बताया जा रहा था, वह रोजमर्रा के छोटे लेकिन जरूरी कामों में संघर्ष करती नजर आई।
असल दुनिया में AI को क्यों आती है दिक्कत?
AI मॉडल डिजिटल डेटा पर काफी अच्छा प्रदर्शन करते हैं, लेकिन वास्तविक दुनिया के वातावरण में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अलग-अलग लाइटिंग, पैकेजिंग डिजाइन और एक जैसे दिखने वाले प्रोडक्ट्स सिस्टम की सटीकता को प्रभावित कर सकते हैं।
विशेषज्ञ लंबे समय से कहते रहे हैं कि AI अभी भी पूरी तरह इंसानी समझ और निगरानी की जगह नहीं ले सकता। Starbucks का यह मामला भी उसी बात को मजबूत करता है कि तकनीक कितनी भी एडवांस क्यों न हो, इंसानी निर्णय क्षमता अब भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
कंपनी ने फिर अपनाया पुराना तरीका
लगातार आ रही दिक्कतों के बाद Starbucks ने ऑटोमेटेड इन्वेंट्री सिस्टम को बंद करने का फैसला किया। कंपनी के इंटरनल अपडेट के मुताबिक अब स्टोर्स में दूध और ड्रिंक बनाने वाले सामान की गिनती फिर से मैनुअली की जाएगी।
यह मामला AI टेक्नोलॉजी की क्षमताओं के साथ-साथ उसकी मौजूदा सीमाओं को भी दिखाता है। भले ही AI कई क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा हो, लेकिन हर काम में इंसानों की भूमिका खत्म होना अभी दूर की बात नजर आती है।













