ड्रग तस्करी के खिलाफ राज्यों का बड़ा संकल्प, 2029 तक ‘ड्रग-फ्री इंडिया’ का लक्ष्य

ड्रग तस्करी के खिलाफ केंद्र और राज्यो ने संयुक्त अभियान तेज करने का संकल्प लिया है। नारकोटिक्स विजन डॉक्यूमेंट 2026-29 तक ड्रग-फ्री भारत का लक्ष्य रखा गया है,

भारत में ड्रग तस्करी के खिलाफ केंद्र और राज्यों ने संयुक्त अभियान तेज करने का संकल्प लिया है। नारकोटिक्स विजन डॉक्यूमेंट 2026-29 के तहत 2029 तक ड्रग-फ्री भारत का लक्ष्य रखा गया है और पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई पर जोर है।

नई दिल्ली: देश में मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित ड्रग नेटवर्क के खिलाफ केंद्र और राज्यों ने संयुक्त कार्रवाई तेज करने का संकल्प दोहराया है। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने नारकोटिक्स कंट्रोल पर विजन डॉक्यूमेंट 2026-29 को लागू करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसका लक्ष्य आने वाले तीन वर्षों में ड्रग तस्करी के नेटवर्क को जड़ से कमजोर करना और भारत को 31 दिसंबर 2029 तक ड्रग-फ्री बनाने की दिशा में आगे बढ़ना है। दो दिवसीय सम्मेलन 22 सितंबर 2026 को शुरू हुआ। इसका विषय ‘United Resolve, Shared Responsibility’ यानी ‘एकजुट संकल्प, साझा जिम्मेदारी’ रखा गया। सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने किया। इसका आयोजन नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने किया, जिसमें 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के प्रमुखों के साथ विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

31 दिसंबर 2029 तक ड्रग तस्करी खत्म करने का लक्ष्य

उद्घाटन सत्र में अमित शाह ने कहा कि मादक पदार्थ देश के लिए गंभीर खतरा हैं। उन्होंने भारत में ड्रग ट्रेड को 31 दिसंबर 2029 तक समाप्त करने का लक्ष्य सामने रखा।

शाह के मुताबिक, ड्रग-फ्री भारत केवल नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित लक्ष्य नहीं है, बल्कि 2047 तक विकसित भारत के निर्माण से भी जुड़ा है। उन्होंने कहा कि भविष्य की पीढ़ियों को नशे के दुष्प्रभावों से बचाना जरूरी है।

उन्होंने स्वीकार किया कि 2029 तक इस लक्ष्य को हासिल करना आसान नहीं होगा। हालांकि, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच प्रभावी समन्वय और साझा प्रयासों के जरिए इसे संभव माना गया।

सम्मेलन में विजन डॉक्यूमेंट के लक्ष्यों पर चर्चा

दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इनमें अगले तीन वर्षों में Narcotics Vision Document 2026-29 के लक्ष्यों को हासिल करने की रणनीति पर चर्चा हुई।

इन सत्रों में मुख्य रूप से मांग में कमी लाने, रोकथाम और पुनर्वास तथा ड्रग तस्करी नेटवर्क और कार्टेल को खत्म करने के तरीकों पर विचार किया गया।

विजन डॉक्यूमेंट की चार प्रमुख रणनीतियों के तहत जिम्मेदारियां, समयसीमा और प्रगति की निगरानी के तरीके निर्धारित किए गए हैं। सम्मेलन में इन लक्ष्यों को जमीन पर लागू करने के लिए राज्यों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया।

केवल ड्रग जब्ती नहीं, पूरे नेटवर्क को निशाना बनाने पर जोर

सम्मेलन में ड्रग तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के तरीके में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया गया। चर्चा में कहा गया कि केवल नशीले पदार्थों की जब्ती तक कार्रवाई सीमित रखने के बजाय पूरे तस्करी नेटवर्क को निशाना बनाया जाना चाहिए।

इसके लिए राज्य स्तर पर ANTF को मजबूत करने, NCORD और JCC की बैठकों को अधिक परिणाम-केंद्रित बनाने और खुफिया जानकारी साझा करने की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया।

अधिकारियों ने ड्रग नेटवर्क की वित्तीय गतिविधियों की पहचान के लिए फाइनेंशियल प्रोफाइलिंग को प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने की आवश्यकता भी बताई। साथ ही PITNDPS Act के प्रभावी इस्तेमाल और संगठित तस्करी से जुड़े प्रमुख लोगों के खिलाफ अभियोजन पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही गई।

नशे की मांग कम करने और पुनर्वास पर भी फोकस

एक तकनीकी सत्र में ड्रग डिमांड रिडक्शन, रोकथाम और पुनर्वास को मादक पदार्थों की समस्या से निपटने का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।

इस दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने उच्च शिक्षण संस्थानों को ड्रग-फ्री बनाने के लिए UGC के ‘Nasha Mukt Campus Framework’ की जानकारी दी। इसके अलावा स्कूलों और कॉलेजों के आसपास 500 मीटर के Drug-Free Zones बनाने की पहल पर चर्चा हुई।

Nasha Mukt Bharat Abhiyan के विस्तार और देशभर में नशामुक्ति केंद्रों की क्षमता तथा पहुंच बढ़ाने के लिए चलाए जा रहे राष्ट्रीय कार्यक्रमों पर भी विचार किया गया।

दूसरे दिन इंटरपोल और विदेशी एजेंसियों के साथ समन्वय पर चर्चा

सम्मेलन के दूसरे दिन ड्रग मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया। इसमें INTERPOL और विदेशी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय, भगोड़ों के प्रत्यर्पण या निर्वासन और सीमा पार ड्रग तस्करी से जुड़े मामलों में सहयोग जैसे विषय शामिल रहे। वित्तीय जांच में FIU-IND की भूमिका और PITNDPS Act के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई।

अधिकारियों ने डिजिटल डेटाबेस के इस्तेमाल को भी महत्वपूर्ण बताया। NIDAAN, e-Sakshya, e-Prison और CCTNS जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म जांच और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच जानकारी साझा करने में मदद कर सकते हैं।

Nar-K9 से लेकर MAC प्लेटफॉर्म तक तकनीक का इस्तेमाल

ड्रग तस्करी के खिलाफ तकनीक आधारित कार्रवाई पर भी सम्मेलन में चर्चा हुई। Nar-K9 डॉग्स के जरिए इंटेलिजेंस-आधारित ऑपरेशन को मजबूत करने और ड्रग्स से जुड़ी जानकारी जुटाने के तरीकों पर विचार किया गया।

सिंथेटिक ड्रग्स की पहचान और उनके प्रसार से जुड़े मामलों के विश्लेषण तथा MAC प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने माना कि बदलते ड्रग अपराधों के साथ जांच एजेंसियों को तकनीकी क्षमता भी लगातार विकसित करनी होगी।

प्रीकर्सर केमिकल और अवैध लैब बड़ी चुनौती

एक अन्य तकनीकी सत्र में सिंथेटिक ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर केमिकल्स, छिपी हुई अवैध लैब और नए प्रकार के ड्रग अपराधों से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की गई।

रासायनिक उद्योग की भूमिका पर जोर देते हुए कहा गया कि प्रीकर्सर केमिकल्स के अवैध इस्तेमाल या डायवर्जन को रोकने के लिए उद्योग और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग जरूरी है।

अवैध ड्रग लैब की पहचान के संकेतों और उनसे निपटने के तरीकों पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा अवैध नशीली फसलों को नष्ट करने के प्रभावी तरीकों और किसानों को वैकल्पिक खेती की ओर प्रोत्साहित करने के उपायों पर राज्यों के अनुभव साझा किए गए।

डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े ड्रग अपराधों पर नजर

सम्मेलन में ड्रग अपराधों के नए डिजिटल रूपों पर भी चर्चा हुई। डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाली कथित ड्रग गतिविधियों की जांच के लिए उपलब्ध तकनीकी और जांच उपकरणों पर विचार किया गया।

प्रतिभागियों ने विभिन्न राज्यों में अपनाई जा रही सर्वोत्तम प्रक्रियाएं भी साझा कीं। इनमें तकनीक का इस्तेमाल, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और ड्रग नियंत्रण अभियानों में समुदाय की भागीदारी प्रमुख रही।

राज्यों से तीन साल की अलग ड्रग कंट्रोल योजना बनाने को कहा

समापन सत्र में NCB के महानिदेशक ने सभी ANTF और सम्मेलन में शामिल अधिकारियों से अगले तीन वर्षों तक ड्रग नियंत्रण अभियान के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया।

उन्होंने राज्यों से अपनी-अपनी तीन वर्षीय ड्रग कंट्रोल योजनाएं तैयार करने को कहा। इन योजनाओं में संबंधित राज्य की स्थानीय और विशिष्ट चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय Vision Document on Narcotics Control 2026-2029 के लक्ष्यों के साथ तालमेल सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

एजेंसियों के बीच सूचना साझा करना जरूरी

अमित शाह ने एक बार फिर कहा कि बदलते ड्रग तस्करी नेटवर्क के सामने केवल जब्ती-केंद्रित कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। उन्होंने पूरे नेटवर्क और उसके प्रमुख संचालकों को निशाना बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों को आपस में सूचना साझा करनी होगी और समन्वित तरीके से काम करना होगा, ताकि ड्रग नेटवर्क के विभिन्न स्तरों की पहचान कर उन्हें तोड़ा जा सके।

नारकोटिक्स विजन डॉक्यूमेंट 2026-29 के तहत अगले तीन वर्षों में केंद्र, राज्य और विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों के बीच यही समन्वित दृष्टिकोण भारत की ड्रग नियंत्रण रणनीति का प्रमुख हिस्सा रहेगा।

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