ऐपल के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स को निधन के 15 साल बाद दुनिया याद कर रही है। टिम कुक और जॉन टर्नस ने उनकी विरासत को याद किया, जबकि कैंची धाम से जुड़े उनके पुराने वीडियो और विचार फिर चर्चा में हैं।
Tech: ऐपल के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स को निधन के 15 साल बाद भी दुनिया याद कर रही है। ऐपल के CEO टिम कुक ने कहा कि जॉब्स ने उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। मौजूदा CEO जॉन टर्नस ने भी उनकी सीख और काम करने के तरीके को याद किया। इसी बीच भारत के कैंची धाम से जॉब्स के जुड़ाव और उनके पुराने वीडियो सोशल मीडिया पर फिर चर्चा में हैं।
टिम कुक ने स्टीव जॉब्स को किया याद
ऐपल के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स के निधन को 15 साल पूरे हो गए हैं, लेकिन टेक्नोलॉजी और बिजनेस की दुनिया में उनका प्रभाव आज भी दिखाई देता है। उनकी सोच, प्रोडक्ट डिजाइन को लेकर नजरिया और कंपनी बनाने का तरीका अब भी लाखों लोगों के लिए चर्चा और प्रेरणा का विषय है।

ऐपल के CEO टिम कुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्टीव जॉब्स को याद करते हुए कहा कि कुछ लोग दुनिया पर अपनी छाप छोड़ते हैं, जबकि कुछ लोग दुनिया को पूरी तरह बदल देते हैं। कुक के मुताबिक, जॉब्स ने न सिर्फ दुनिया को बदला बल्कि कई लोगों की जिंदगी भी प्रभावित की। उन्होंने कहा कि जॉब्स ने उनकी अपनी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया और उनकी भावना आज भी उन लोगों और कामों में दिखाई देती है, जिन्हें उन्होंने प्रेरित किया।
जॉन टर्नस ने भी साझा की स्टीव की सीख
ऐपल के मौजूदा CEO जॉन टर्नस ने भी स्टीव जॉब्स को याद किया। उन्होंने कहा कि जॉब्स ने टीम को हर छोटी-बड़ी चीज, हर अनुभव और हर व्यक्ति पर ध्यान देने की अहमियत सिखाई। टर्नस के अनुसार, जॉब्स से मिली यह सोच आज भी ऐपल के काम करने के तरीके को दिशा देती है।
स्टीव जॉब्स का प्रभाव सिर्फ ऐपल के प्रोडक्ट्स तक सीमित नहीं रहा। उनके प्रोडक्ट लॉन्च और मार्केटिंग के तरीके ने टेक इंडस्ट्री में प्रस्तुति की शैली को भी प्रभावित किया। उनके कई पुराने वीडियो उनकी मृत्यु के वर्षों बाद भी इंटरनेट पर शेयर किए जाते रहे हैं।
लिफाफे से MacBook Air निकालने वाला लॉन्च हुआ याद
स्टीव जॉब्स के सबसे चर्चित लॉन्च मोमेंट्स में MacBook Air की प्रस्तुति भी शामिल है। एक इवेंट में उन्होंने बेहद पतले लैपटॉप को एक साधारण लिफाफे से निकालकर उसकी स्लिम डिजाइन को दुनिया के सामने पेश किया था।
यह प्रस्तुति सिर्फ प्रोडक्ट की मोटाई बताने का तरीका नहीं थी, बल्कि जॉब्स की मार्केटिंग और स्टोरीटेलिंग शैली का उदाहरण भी बनी। उन्होंने तकनीकी खूबियों को सीधे आंकड़ों में बताने के बजाय उन्हें एक यादगार अनुभव के रूप में पेश किया। यही वजह है कि उनका यह वीडियो आज भी टेक्नोलॉजी से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट में दिखाई देता है।
कैंची धाम से भी जुड़ा रहा स्टीव जॉब्स का नाम
स्टीव जॉब्स के जीवन से भारत का कैंची धाम भी जुड़ा रहा है। युवा अवस्था में भारत की यात्रा के दौरान उन्होंने उत्तराखंड स्थित नीम करोली बाबा के आश्रम कैंची धाम का दौरा किया था। बाद में इस यात्रा और आध्यात्मिक अनुभव को उनके जीवन के महत्वपूर्ण चरणों से जोड़कर देखा गया।
जॉब्स का जीवन तकनीक और आध्यात्मिक खोज के बीच उनके अलग नजरिए के लिए भी जाना जाता है। भारत से लौटने के बाद उनके विचारों और जीवन-दृष्टि में बदलाव की चर्चा कई बार सामने आई है।
1983 के वीडियो से AI तक की चर्चा
सोशल मीडिया पर स्टीव जॉब्स से जुड़े कुछ पुराने वीडियो भी दोबारा शेयर किए जा रहे हैं। इनमें 1983 का एक चर्चित वीडियो शामिल है, जिसमें उन्होंने भविष्य की कंप्यूटिंग और तकनीक के विकास को लेकर विचार व्यक्त किए थे। आज इन पुराने बयानों को इंटरनेट, सॉफ्टवेयर और स्मार्ट डिवाइस जैसी तकनीकों के विकास से जोड़कर देखा जाता है।
हालांकि उस दौर की भविष्यवाणियों को आज की तकनीक से जोड़ते समय उनके मूल संदर्भ को ध्यान में रखना जरूरी है। फिर भी जॉब्स की तकनीकी संभावनाओं को समझने और भविष्य के उपभोक्ता अनुभव की कल्पना करने की क्षमता उनके व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।
स्टीव जॉब्स का निधन 5 अक्टूबर 2011 को 56 वर्ष की उम्र में हुआ था। उनकी बहन मोना सिम्पसन ने बाद में एक स्मारक समारोह में उनके आखिरी शब्दों के रूप में “Oh wow” का उल्लेख किया था। 15 साल बाद भी उनकी विरासत ऐपल, टेक इंडस्ट्री और दुनिया भर के उद्यमियों के बीच चर्चा में बनी हुई है।











