वैश्विक बाजारों में जारी उथल-पुथल और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर बुधवार को घरेलू शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ युद्धविराम समझौते को समाप्त घोषित किए जाने के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ गई, जिसके चलते बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली।
बिजनेस न्यूज़: वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती अनिश्चितता का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान से जुड़े युद्धविराम समझौते को समाप्त घोषित किए जाने के बाद वैश्विक निवेशकों में चिंता बढ़ गई। इसके परिणामस्वरूप बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली और प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स तथा निफ्टी 50 भारी गिरावट के साथ बंद हुए।
विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया, जिसका असर भारतीय इक्विटी बाजारों पर भी पड़ा।
सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट
कारोबारी सत्र के अंत में बीएसई सेंसेक्स 1,677 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ। दिन के दौरान बाजार में बिकवाली इतनी तेज रही कि सेंसेक्स एक समय करीब 1,914 अंक तक लुढ़क गया था। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 581 अंक टूटकर 23,900 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बंद हुआ। यह गिरावट केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि लगभग पूरे बाजार में बिकवाली का माहौल देखने को मिला।
निवेशकों को ₹10 लाख करोड़ का नुकसान
बाजार में आई इस तेज गिरावट से निवेशकों की संपत्ति को बड़ा झटका लगा। एक ही कारोबारी दिन में निवेशकों की कुल संपत्ति में लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। इसके साथ ही बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (Market Capitalization) घटकर करीब 470 लाख करोड़ रुपये रह गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक संकट गहराता है, तब निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाकर सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख करते हैं। इसका सीधा असर शेयर बाजारों पर पड़ता है।
सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान में

बुधवार का कारोबार भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद कमजोर रहा। सेंसेक्स के सभी 30 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जो बाजार में व्यापक बिकवाली का संकेत देता है। सिर्फ लार्जकैप ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में भी तेज गिरावट देखने को मिली। बाजार में सबसे अधिक दबाव बैंकिंग, एफएमसीजी और ऑयल एंड गैस सेक्टर पर देखने को मिला।
निफ्टी बैंक इंडेक्स में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। एफएमसीजी सेक्टर के प्रमुख शेयर भी दबाव में रहे। ऑयल एंड गैस कंपनियों में भी निवेशकों ने बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली की। इसके अलावा निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 सूचकांक भी लगभग 2 प्रतिशत तक गिर गए।
इन प्रमुख शेयरों में आई बड़ी गिरावट
बुधवार के कारोबारी सत्र में कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। सबसे अधिक दबाव वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे—
- जियो फाइनेंशियल सर्विसेज – लगभग 5% की गिरावट
- मारुति सुजुकी – करीब 4% की कमजोरी
- हिंदुस्तान यूनिलीवर – 2 से 4% तक गिरावट
- कोटक महिंद्रा बैंक – तेज बिकवाली
- भारती एयरटेल – उल्लेखनीय कमजोरी
इन कंपनियों में बिकवाली ने प्रमुख सूचकांकों की गिरावट को और बढ़ा दिया। बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का असर इंडिया VIX, यानी बाजार की अस्थिरता मापने वाले सूचकांक पर भी दिखाई दिया। इंडिया VIX लगभग 27 प्रतिशत उछलकर 14.85 के स्तर पर पहुंच गया। आम तौर पर VIX में तेजी का अर्थ होता है कि निवेशकों के बीच भविष्य को लेकर चिंता और अस्थिरता बढ़ रही है।











