PM मोदी इंडोनेशिया के प्रम्बानन हिंदू मंदिर पहुंचे, बोले- भगवान शिव से जुड़ना मेरा सौभाग्य; ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए हुए रवाना

PM नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया के ऐतिहासिक प्रम्बानन हिंदू मंदिर में पूजा-अर्चना की, जीर्णोद्धार परियोजना का उद्घाटन किया और इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया के एक हजार वर्ष पुराने प्रम्बानन हिंदू मंदिर में पूजा-अर्चना कर संरक्षण परियोजना का उद्घाटन किया। उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक विरासत पर गर्व जताया और इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के आधिकारिक दौरे के लिए रवाना हो गए।

जकार्ता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इंडोनेशिया दौरे के दौरान देश के सबसे बड़े और विश्व प्रसिद्ध प्रम्बानन हिंदू मंदिर का दौरा कर भारत और इंडोनेशिया के साझा सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती दी। प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ मंदिर परिसर में संरक्षण एवं जीर्णोद्धार परियोजना का उद्घाटन किया और भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए कहा कि उनके जीवन में बार-बार शिव से जुड़ने का सौभाग्य मिला है।

मंदिर दर्शन और आधिकारिक कार्यक्रमों के बाद प्रधानमंत्री मोदी ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न के लिए रवाना हो गए, जहां वे 8 से 10 जुलाई तक कई उच्चस्तरीय बैठकों और कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इंडोनेशिया से विदाई के दौरान पांच इंडोनेशियाई लड़ाकू विमानों ने उनके विमान को एस्कॉर्ट कर विशेष सम्मान भी दिया।

प्रम्बानन मंदिर में पूजा-अर्चना और संरक्षण परियोजना का शुभारंभ

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो एक साथ प्रम्बानन मंदिर पहुंचे। दोनों नेताओं ने मंदिर संरक्षण एवं पुनर्स्थापन परियोजना का औपचारिक उद्घाटन किया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना कर भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके सार्वजनिक जीवन में भगवान शिव से जुड़ने के कई अवसर मिले हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात के सोमनाथ मंदिर, वाराणसी के काशी विश्वनाथ धाम, उत्तराखंड के केदारनाथ और उज्जैन के महाकाल लोक जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों के विकास से जुड़ना उनके लिए सौभाग्य रहा है। अब इंडोनेशिया के ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण कार्य की शुरुआत से जुड़ना भी उनके जीवन का महत्वपूर्ण अवसर है।

भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया के किसी भी हिस्से में भारतीय संस्कृति और सभ्यता की झलक दिखाई देती है। उनके अनुसार प्रम्बानन मंदिर केवल इंडोनेशिया की धरोहर नहीं बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय सांस्कृतिक प्रभाव का जीवंत प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में भगवान शिव, भगवान विष्णु, भगवान ब्रह्मा, माता दुर्गा और भगवान गणेश की प्रतिमाएं इस बात का प्रमाण हैं कि भारत और इंडोनेशिया के सांस्कृतिक संबंध हजारों वर्षों से मजबूत रहे हैं। उन्होंने इंडोनेशिया की सरकार और वहां के नागरिकों का इस विरासत को सुरक्षित रखने के लिए आभार भी व्यक्त किया।

2029 में फिर लौटने का वादा

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रपति प्रबोवो ने उनसे वादा लिया है कि वर्ष 2029 तक मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य पूरा होने पर वे दोबारा इंडोनेशिया आएंगे। प्रधानमंत्री ने इस निमंत्रण को स्वीकार करते हुए कहा कि परियोजना पूरी होने के बाद वह फिर प्रम्बानन मंदिर आकर इस उपलब्धि का जश्न मनाना चाहेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि संरक्षण परियोजना पूरी होने के बाद यह ऐतिहासिक मंदिर विश्व पर्यटन और सांस्कृतिक अध्ययन का और भी बड़ा केंद्र बनेगा।

एक हजार साल पुरानी धरोहर

प्रम्बानन मंदिर इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर योग्याकार्ता के निकट स्थित है। इसे दक्षिण-पूर्व एशिया का दूसरा सबसे बड़ा हिंदू मंदिर माना जाता है। पहले स्थान पर कंबोडिया का प्रसिद्ध अंगकोर वाट मंदिर आता है।

करीब एक हजार वर्ष पुराने इस विशाल मंदिर परिसर में कभी लगभग 240 मंदिर मौजूद थे। इसका सबसे प्रमुख आकर्षण 47 मीटर ऊंचा भगवान शिव को समर्पित मंदिर है। मंदिर की दीवारों पर रामायण और अन्य हिंदू ग्रंथों की कथाओं को अत्यंत सुंदर शिल्पकला के माध्यम से उकेरा गया है। यही कारण है कि यह मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में भी शामिल है और हर वर्ष लाखों पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई गति

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने इंडोनेशिया दौरे के दौरान भारतीय समुदाय को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया का संबंध केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक भी है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि भारत की लोकप्रिय फिल्म का गीत "कुछ-कुछ होता है" इंडोनेशिया में भी काफी प्रसिद्ध है और जब दोनों देश साथ मिलकर काम करते हैं तो "कुछ-कुछ" नहीं बल्कि "बहुत कुछ" होता है। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने भी प्रधानमंत्री मोदी की कई सरकारी योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने भारत के विकास मॉडल से प्रेरणा ली है और कई सफल योजनाओं को अपने देश में अपनाने का प्रयास किया है।

अब ऑस्ट्रेलिया दौरे पर रहेगा फोकस

इंडोनेशिया यात्रा पूरी करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न के लिए रवाना हो गए। यह उनका तीसरा आधिकारिक ऑस्ट्रेलिया दौरा है। इस यात्रा के दौरान वे ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और रक्षा, व्यापार, निवेश, शिक्षा, ऊर्जा तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर-जनरल सैम मोस्टिन से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वे भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम को संबोधित करेंगे, जहां दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपति और निवेशक शामिल होंगे। यात्रा के दौरान भारतीय समुदाय के एक बड़े कार्यक्रम में भी प्रधानमंत्री के शामिल होने की संभावना है।

सांस्कृतिक कूटनीति का मजबूत संदेश

प्रधानमंत्री मोदी की प्रम्बानन मंदिर यात्रा केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे सांस्कृतिक कूटनीति के मजबूत संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। भारत लंबे समय से अपनी प्राचीन सभ्यता, सांस्कृतिक विरासत और साझा ऐतिहासिक संबंधों के माध्यम से विश्व के विभिन्न देशों के साथ रिश्तों को मजबूत करने की नीति पर काम कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इंडोनेशिया जैसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार के साथ सांस्कृतिक सहयोग दोनों देशों के संबंधों को और गहरा करेगा। वहीं ऑस्ट्रेलिया दौरा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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