Stock Market Outlook: अगले हफ्ते उतार-चढ़ाव या राहत, निवेशकों की नजर नतीजों पर

Stock Market Outlook: अगले हफ्ते उतार-चढ़ाव या राहत, निवेशकों की नजर नतीजों पर

अगले सप्ताह शेयर बाजार की चाल तिमाही नतीजों, महंगाई के आंकड़ों और वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी। विदेशी निवेशकों की बिकवाली से दबाव बना है, जबकि आईटी कंपनियों के नतीजे बाजार को दिशा दे सकते हैं।

Stock Market: आने वाले सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार की दिशा को लेकर निवेशकों में काफी उत्सुकता बनी हुई है। हाल के दिनों में बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है और पिछले सप्ताह बेंचमार्क इंडेक्स कमजोरी के साथ बंद हुए थे। ऐसे में सवाल यह है कि क्या अगला हफ्ता बाजार को राहत देगा या फिर दबाव बना रहेगा। तिमाही नतीजे, महंगाई से जुड़े आंकड़े और अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी जैसे कई फैक्टर बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाने वाले हैं।

पिछले हफ्ते बाजार क्यों रहा दबाव में

पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में लगातार पांच कारोबारी सत्रों तक गिरावट देखने को मिली। निवेशकों की सतर्कता और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाए रखा। दिसंबर तिमाही के नतीजों से पहले निवेशक किसी भी बड़े दांव से बचते नजर आए। इसके अलावा वैश्विक संकेत भी पूरी तरह सकारात्मक नहीं रहे, जिसका असर घरेलू बाजार पर साफ दिखा।

तिमाही नतीजों से तय होगी बाजार की दिशा

अगले सप्ताह दिसंबर तिमाही के नतीजों की आधिकारिक शुरुआत होने जा रही है। सबसे पहले बड़ी आईटी कंपनियां अपने third quarter results जारी करेंगी। इनमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इंफोसिस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, विप्रो और टेक महिंद्रा जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं।

आईटी सेक्टर का प्रदर्शन बाजार के सेंटिमेंट को काफी हद तक प्रभावित करता है। अगर नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे, तो बाजार को कुछ राहत मिल सकती है। वहीं कमजोर नतीजे आने पर आईटी शेयरों में दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर पूरे बाजार पर पड़ेगा।

महंगाई और आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी नजर

आने वाला सप्ताह आर्थिक आंकड़ों के लिहाज से भी बेहद अहम रहने वाला है। इस दौरान देश में खुदरा महंगाई, थोक महंगाई, व्यापार घाटा और विदेशी मुद्रा भंडार से जुड़े आंकड़े जारी किए जाएंगे। ये आंकड़े यह संकेत देंगे कि देश की अर्थव्यवस्था किस दिशा में बढ़ रही है।

महंगाई के आंकड़े खासतौर पर महत्वपूर्ण होंगे क्योंकि इन्हीं के आधार पर ब्याज दरों और मौद्रिक नीति को लेकर उम्मीदें तय होती हैं। अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा रहती है, तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं राहत भरे आंकड़े निवेशकों का भरोसा बढ़ा सकते हैं।

अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी से बढ़ी अनिश्चितता

वैश्विक स्तर पर भी कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिनका असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ सकता है। खासतौर पर अमेरिका की व्यापार नीति को लेकर बनी अनिश्चितता निवेशकों को सतर्क रखे हुए है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में कुछ अहम मामलों पर सुनवाई होनी है, जिनमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ को चुनौती देने वाला मामला भी शामिल है।

अगर इस पर कोई बड़ा या चौंकाने वाला फैसला आता है, तो इसका असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर देखने को मिल सकता है। ऐसे में भारतीय बाजार भी इससे अछूता नहीं रहेगा।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली बनी चिंता

हाल के दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली देखी गई है। यही कारण है कि बाजार में रिकवरी की कोशिशें ज्यादा टिकाऊ साबित नहीं हो पा रही हैं। अगर अगले सप्ताह विदेशी निवेशकों का रुख नहीं बदलता है, तो बाजार पर दबाव बना रह सकता है।

घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी जरूर बढ़ी है, लेकिन अकेले उनकी खरीदारी बाजार को मजबूती देने के लिए फिलहाल पर्याप्त नजर नहीं आ रही है।

टेक्निकल लेवल्स क्या दे रहे हैं संकेत

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, निफ्टी के लिए तत्काल रजिस्टेंस 25,800 के स्तर पर है। इसके ऊपर 25,940 और 26,000 के स्तर पर भी बाजार को कड़ी चुनौती मिल सकती है।

वहीं नीचे की ओर 25,600 और 25,450 के स्तर पर सपोर्ट देखा जा सकता है। अगर बाजार 25,300 के नीचे फिसलता है, तो गिरावट और तेज हो सकती है। जानकारों का मानना है कि निफ्टी का 25,800 के नीचे बंद होना यह संकेत देता है कि फिलहाल बिकवाली का दबाव हावी है और बाजार में मंदी का माहौल बना हुआ है।

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