पीएम सूर्य घर योजना में लाखों के गबन का आरोप: लखनऊ की फर्म पर बैंक लोन हड़पने का केस

सुल्तानपुर में पीएम सूर्य घर योजना के तहत लाखों रुपये के गबन का मामला सामने आया है। डीएम के निर्देश पर लखनऊ की एक फर्म के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
पीएम सूर्य घर योजना में लाखों के गबन का आरोप: लखनऊ की फर्म पर बैंक लोन हड़पने का केस
Photo Credit / Attribution: Google

सुल्तानपुर। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत लाखों रुपये के गबन का मामला सामने आया है। आरोप है कि लखनऊ की एक निजी फर्म ने योजना के नाम पर बैंक से लिया गया लोन हड़प लिया और लाभार्थियों को अपेक्षित सुविधा नहीं दी।

मामले की शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन ने जांच कराई। प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने पर जिलाधिकारी के निर्देश पर संबंधित फर्म के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है। पुलिस अब बैंक रिकॉर्ड, योजना से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है।

आरोप है कि फर्म ने कुछ लोगों को पीएम सूर्य घर योजना के तहत सोलर पैनल लगवाने और सब्सिडी का लाभ दिलाने का भरोसा दिया था। इसके लिए बैंक से लोन की प्रक्रिया पूरी कराई गई, लेकिन बाद में रकम के इस्तेमाल और योजना के क्रियान्वयन में गड़बड़ी सामने आई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्हें न तो योजना का पूरा लाभ मिला और न ही लोन की स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी दी गई।

जिला प्रशासन का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस और संबंधित विभाग संयुक्त रूप से पूरे प्रकरण की जांच कर रहे हैं। यदि जांच में वित्तीय गड़बड़ी या धोखाधड़ी की पुष्टि होती है, तो आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के तहत किसी भी निजी एजेंसी या फर्म से जुड़ने से पहले उसकी वैधता और रिकॉर्ड की जांच करना जरूरी है। लाभार्थियों को बैंक और सरकारी विभाग से प्राप्त दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ना चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत प्रशासन को देनी चाहिए।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित गबन कितनी राशि का है, इसमें किन लोगों की भूमिका रही और लाभार्थियों को कितना नुकसान हुआ।

नोट: इस खबर में गबन और धोखाधड़ी से जुड़े आरोप प्रारंभिक शिकायतों और प्रशासनिक कार्रवाई पर आधारित हैं। मामले के तथ्यों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

 

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