इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को गिरफ्तारी से राहत दी। यौन उत्पीड़न मामले में कोर्ट ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक स्वामी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
New Delhi: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए अधिकारियों को आदेश दिया कि वे स्वामी के खिलाफ तत्काल कोई कार्रवाई न करें। कोर्ट के आदेश के अनुसार, स्वामी को अगली सुनवाई तक किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की गई है।
यह राहत याचिका के माध्यम से मिली, जिसमें स्वामी ने कहा था कि उनके खिलाफ बिना प्रमाण के कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद यह आदेश पारित किया। इससे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को फिलहाल गिरफ्तारी से राहत मिल गई है।
मामला यौन उत्पीड़न से जुड़ा
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को यह राहत यौन उत्पीड़न से जुड़े मामले में मिली है। जानकारी के अनुसार, बीते 21 फरवरी को उनके और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। इस FIR में एक नाबालिग समेत दो व्यक्तियों के साथ यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाए गए हैं।
मामले में आरोपों के आधार पर जांच शुरू की गई थी और स्वामी की गिरफ्तारी की तैयारी भी चल रही थी। हालांकि हाई कोर्ट ने इस गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है और उन्हें अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक स्वामी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दी प्रतिक्रिया

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अगर नार्को टेस्ट जैसी जांच से मामले की सच्चाई सामने आती है तो वे इसके लिए भी तैयार हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि सत्य उजागर करने के लिए सभी उपलब्ध तरीके अपनाए जाने चाहिए।
स्वामी ने कहा, "यदि नार्को टेस्ट से सच्चाई सामने आ सकती है तो इसे अवश्य किया जाना चाहिए। झूठ ज्यादा समय तक नहीं टिकता। जिन्होंने भी झूठी कहानी गढ़ी है, वे बेनकाब हो रहे हैं। जैसे-जैसे लोगों को इस मनगढ़ंत मामले की जानकारी होगी, सच्चाई स्पष्ट हो जाएगी।"
उन्होंने यह भी कहा कि जो बच्चा कभी उनके पास आया ही नहीं, उसे उनके नाम से जोड़ना आसान नहीं है। स्वामी का मानना है कि मामला राजनीतिक या व्यक्तिगत एजेंडे के तहत उनके खिलाफ तैयार किया गया है और सच्चाई जल्द ही सामने आ जाएगी।
अगली सुनवाई
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह अंतरिम राहत केवल अगली सुनवाई तक के लिए है। मामले की पूरी जांच और अदालत में पेश होने वाली दलीलों के आधार पर ही अंतिम फैसला दिया जाएगा। अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस बीच स्वामी के खिलाफ किसी भी प्रकार की गिरफ्तारी या दंडात्मक कार्रवाई से बचें।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुद कहा कि वे नार्को टेस्ट के लिए भी तैयार हैं। यह टेस्ट अक्सर यह जांचने के लिए किया जाता है कि किसी व्यक्ति के शरीर में मादक पदार्थ या अन्य अवैध तत्व मौजूद हैं या नहीं। स्वामी का कहना है कि इस तरह के परीक्षण से मामला और स्पष्ट हो जाएगा और झूठे आरोप सामने आ जाएंगे।












