एक तरफ ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्में दर्शकों का ध्यान खींच रही हैं, तो दूसरी ओर छोटे बजट की ‘ऑब्सेशन’ भी अपनी अलग जगह बना रही है। तमन्ना भाटिया भी सिनेमा में आए इस बदलाव को महसूस करती हैं।
Tamannaah Bhatia Interview: अभिनेत्री तमन्ना भाटिया इन दिनों अपनी फिल्म 'द व्वान: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट' को लेकर चर्चा में हैं। सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की मुख्य भूमिकाओं वाली यह फिल्म 25 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। फिल्म लोककथा, आस्था और रहस्यमयी जंगल की कहानी को एक साथ जोड़ती है।
इसी बीच तमन्ना ने कम बजट की फिल्मों के प्रदर्शन और बदलते दर्शक रुझानों पर अपनी राय साझा की है। अभिनेत्री के मुताबिक, मौजूदा दौर में किसी फिल्म की सफलता को केवल उसके बजट, जॉनर या तकनीकी स्तर से नहीं समझा जा सकता। दर्शकों के साथ भावनात्मक जुड़ाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
तमन्ना ने कहा- अब सिर्फ जॉनर से तय नहीं होती फिल्म की सफलता
कम बजट में बनी फिल्मों के दर्शकों के बीच अच्छा प्रदर्शन करने के सवाल पर तमन्ना ने कहा कि सिनेमा ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां किसी फिल्म को सिर्फ एक खास जॉनर के आधार पर नहीं देखा जा सकता। उनके मुताबिक, अलग-अलग तरह की फिल्में दर्शकों तक पहुंच बना रही हैं। अभिनेत्री ने 'हनुमान अंश' और 'ऑब्सेशन' जैसी फिल्मों का उदाहरण देते हुए कहा कि कम बजट में बनी फिल्मों की सफलता को समझना फिल्म इंडस्ट्री के लिए सीखने का अवसर है।
तमन्ना के अनुसार, हाल के वर्षों में फिल्मों के क्राफ्ट और तकनीकी पहलुओं पर काफी ध्यान दिया गया है, लेकिन फिल्म बनाने का मूल उद्देश्य दर्शकों को एक ऐसी दुनिया में ले जाना है, जहां वे कुछ महसूस कर सकें।
'दर्शक को कुछ खास महसूस कराना जरूरी'

तमन्ना का मानना है कि किसी फिल्म की कहानी और प्रस्तुति तभी प्रभावी होती है, जब वह दर्शकों के साथ भावनात्मक रिश्ता बना सके। उनके मुताबिक, केवल अच्छी तकनीक या शानदार विजुअल्स किसी फिल्म को दर्शकों के बीच लंबे समय तक बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि दर्शकों को ऐसी दुनिया का हिस्सा महसूस होना चाहिए, जिसे वे पर्दे पर देख रहे हैं। यही अनुभव फिल्म के साथ उनका जुड़ाव मजबूत कर सकता है।
यह बदलाव मौजूदा बॉक्स ऑफिस ट्रेंड में भी दिखाई दे रहा है, जहां अलग-अलग बजट और विषयों वाली फिल्मों को दर्शकों से प्रतिक्रिया मिल रही है। 'हनुमान अंश' के लंबे थिएट्रिकल रन को लेकर हालिया रिपोर्टिंग में भी इसके शुरुआती सीमित कारोबार के बाद दर्शकों के बीच धीरे-धीरे बढ़ती लोकप्रियता का जिक्र किया गया है।
भावनाओं की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
तमन्ना ने बातचीत में फिल्मों के भावनात्मक पक्ष को भी महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि इंसानी भावनाएं किसी एक क्षेत्र या संस्कृति तक सीमित नहीं होतीं। विश्वास, प्रेम, डर, उम्मीद और संघर्ष जैसी भावनाएं अलग-अलग दर्शकों को जोड़ सकती हैं। अभिनेत्री के मुताबिक, संभव है कि मौजूदा दौर में दर्शक इन्हीं मानवीय भावनाओं से जुड़ी कहानियों को अधिक महत्व दे रहे हों। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री के लिए यह समझना जरूरी है कि कोई फिल्म दर्शकों के बीच क्यों काम करती है।
'द व्वान' में भी आस्था और भावनाओं का पहलू
तमन्ना ने अपनी फिल्म 'द व्वान: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट' को लेकर भी इसी भावनात्मक जुड़ाव की बात की। फिल्म में लोककथा, आस्था और आधुनिक सोच के बीच का टकराव कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। फिल्म का संसार बिहार की लोक मान्यताओं और वन देवी से जुड़ी कहानी से प्रेरित है। अभिनेत्री ने फिल्म में भक्ति और आस्था के भाव को ईमानदारी से प्रस्तुत करने की कोशिश का जिक्र किया। इससे उनके लिए यह प्रोजेक्ट केवल एक पारंपरिक मनोरंजक फिल्म से अलग अनुभव भी रहा।
फिल्म के प्रमोशन के दौरान तमन्ना ने छठ पूजा से जुड़े एक भावुक दृश्य की शूटिंग का अनुभव भी साझा किया था। उन्होंने बताया था कि उस दृश्य को फिल्माते समय वह भावुक हो गई थीं।












