केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि भारत की न्याय व्यवस्था कभी देरी के लिए जानी जाती थी, लेकिन नए आपराधिक कानूनों के पूरी तरह लागू होने के बाद स्थिति में बदलाव आएगा।
Amit Shah on New Criminal Laws: भारत की आपराधिक न्याय व्यवस्था में बड़े बदलाव का दावा करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि नए आपराधिक कानूनों के पूरी तरह लागू होने के बाद FIR दर्ज होने से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मामले के निपटारे की प्रक्रिया को तीन साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य है। शनिवार को भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान शाह ने कहा कि देश की न्याय व्यवस्था लंबे समय तक देरी के लिए जानी जाती रही, लेकिन नई व्यवस्था में तकनीक और समयबद्ध प्रक्रियाओं पर अधिक जोर दिया जा रहा है।
अमित शाह ने भोपाल के BHEL क्षेत्र स्थित दशहरा मैदान में नए आपराधिक कानूनों पर आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इसके बाद पशुपालकों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने न्याय व्यवस्था में किए जा रहे बदलावों की जानकारी दी। उनके मुताबिक नए कानूनों के पूरी तरह लागू होने के बाद आपराधिक मामलों की जांच और सुनवाई की प्रक्रिया को अधिक समयबद्ध बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
तीन नए आपराधिक कानून क्या हैं?
भारत में आपराधिक कानूनों में व्यापक बदलाव के तहत तीन नए कानून 1 जुलाई 2024 से लागू किए गए। इनमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह ली, जबकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) का स्थान लिया। तीसरा कानून भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) है, जिसने पुराने भारतीय साक्ष्य अधिनियम को प्रतिस्थापित किया।
सरकार के अनुसार इन कानूनों का उद्देश्य आपराधिक न्याय प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक जांच और समयबद्ध प्रक्रियाओं से जोड़ना है। गृह मंत्रालय पहले भी कह चुका है कि FIR से लेकर दोषसिद्धि तक तीन साल के भीतर न्याय दिलाना आपराधिक न्याय सुधारों का प्रमुख लक्ष्य है।
2029 तक पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध करने का लक्ष्य

अमित शाह ने पहले भी कहा है कि सरकार 2029 तक ऐसी व्यवस्था तैयार करना चाहती है, जिसमें FIR से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक की पूरी न्यायिक प्रक्रिया को तीन साल के भीतर पूरा किया जा सके। इसके लिए पुलिस जांच, फोरेंसिक सिस्टम, अभियोजन और न्यायपालिका के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार ने आपराधिक न्याय व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल को भी बढ़ाया है। NCRB से जुड़े e-Prosecution, e-Forensics, CrPI और अन्य डिजिटल सिस्टम का उद्देश्य जांच और अभियोजन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और तेज करना है। गृह मंत्रालय के अनुसार वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्यों के इस्तेमाल से जांच की गुणवत्ता में सुधार लाने की कोशिश की जा रही है।
'तारीख पर तारीख' वाली व्यवस्था बदलने का दावा
अमित शाह ने अपने भाषण में लंबे समय से अदालतों में मामलों के लंबित रहने को लेकर इस्तेमाल होने वाले “तारीख पर तारीख” वाले मुहावरे का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के पूरी तरह लागू होने के बाद न्याय में होने वाली देरी को कम करने के लिए समयबद्ध व्यवस्था विकसित की जाएगी।
हालांकि, तीन साल में FIR से सुप्रीम कोर्ट तक न्याय का लक्ष्य एक सरकारी नीति और प्रशासनिक लक्ष्य है। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर आपराधिक मामले के लिए तीन साल की एक समान कानूनी समय-सीमा स्वतः लागू हो गई है। अलग-अलग मामलों की अवधि उनकी प्रकृति, जांच, सबूत, मुकदमे और अपील जैसी परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
मध्य प्रदेश को 2029 तक नशामुक्त बनाने का लक्ष्य
भोपाल कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने मध्य प्रदेश में ड्रग्स के दुरुपयोग को खत्म करने के लिए 31 दिसंबर 2029 की समय-सीमा का लक्ष्य रखा। उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य के लिए राज्य सरकार और संबंधित विभागों के साथ मिलकर विस्तृत योजना तैयार की जाएगी।












