1937 में बीकानेर से शुरू हुई Haldiram की कहानी एक खास भुजिया रेसिपी से आगे बढ़ी। गंगा बिशन अग्रवाल के प्रयोग और परिवार के विस्तार ने इसे भारत के प्रमुख स्नैक्स ब्रांड्स में पहुंचाया।
Haldiram Success Story: 1937 में राजस्थान के बीकानेर में गंगा बिशन अग्रवाल ने छोटी दुकान से कारोबार शुरू किया। भुजिया की रेसिपी में मोठ के इस्तेमाल ने इसे अलग पहचान दी। समय के साथ परिवार ने कारोबार का विस्तार किया और नागपुर में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित होने के बाद यह ब्रांड देश-विदेश के बाजारों तक पहुंच गया।
बीकानेर की छोटी दुकान से शुरू हुई Haldiram की कहानी
Haldiram की कहानी साल 1937 में राजस्थान के बीकानेर से शुरू हुई थी। गंगा बिशन अग्रवाल ने एक छोटी-सी दुकान से भुजिया का कारोबार शुरू किया। उन्हें लोग प्यार से ‘हल्दीराम’ कहकर बुलाते थे और यही नाम आगे चलकर उनके ब्रांड की पहचान बन गया। उस समय यह कारोबार एक छोटे स्थानीय व्यवसाय के रूप में शुरू हुआ था, लेकिन खास स्वाद और लगातार किए गए प्रयोगों ने इसे आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई।
भुजिया की रेसिपी में एक प्रयोग ने बनाई अलग पहचान
शुरुआत में गंगा बिशन अग्रवाल पारंपरिक तरीके से बेसन की भुजिया तैयार करते थे। हालांकि, उन्हें अपनी बनाई भुजिया का स्वाद उम्मीद के मुताबिक नहीं लग रहा था। इसके बाद उन्होंने रेसिपी में बदलाव करने का फैसला किया। उन्होंने बेसन के साथ प्रयोग करने के बजाय ‘मोठ’ का इस्तेमाल किया।

मोठ के इस्तेमाल से तैयार भुजिया का स्वाद और कुरकुरापन पहले से अलग था। यह प्रयोग ग्राहकों को पसंद आया और धीरे-धीरे इस भुजिया की मांग बढ़ने लगी। बीकानेर की छोटी दुकान पर मिलने वाली यह भुजिया लोगों के बीच लोकप्रिय होती गई। इसी खास स्वाद ने Haldiram को दूसरी नमकीन दुकानों से अलग पहचान दिलाने में मदद की।
बढ़ती लोकप्रियता के साथ कारोबार का दायरा भी बढ़ता गया। भुजिया के अलावा कंपनी ने अलग-अलग तरह की नमकीन, मिठाइयां और बेवरेजेज भी अपने पोर्टफोलियो में शामिल किए। इससे कंपनी सिर्फ भुजिया बेचने वाले कारोबार तक सीमित नहीं रही।
नागपुर में फैक्ट्री से शुरू हुआ बड़ा विस्तार
Haldiram के कारोबार के विस्तार में अगली पीढ़ी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। संस्थापक गंगा बिशन अग्रवाल के पोते शिव किशन अग्रवाल ने कारोबार को नए स्तर पर ले जाने की दिशा में काम किया। पारंपरिक स्वाद को बनाए रखते हुए व्यवसाय को अधिक संगठित और कॉर्पोरेट रूप देने पर जोर दिया गया।
साल 1970 में महाराष्ट्र के नागपुर में कंपनी की पहली बड़ी प्रोडक्शन यूनिट स्थापित की गई। यह कदम Haldiram के लिए महत्वपूर्ण था, क्योंकि इससे उत्पादन को बड़े स्तर पर करने की क्षमता विकसित हुई। इसके बाद कंपनी ने अपने मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क और प्रोडक्ट रेंज का विस्तार जारी रखा।
आज Haldiram के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट नागपुर, नई दिल्ली, हुगली, रुद्रपुर और नोएडा में बताए जाते हैं। कंपनी के प्रोडक्ट्स भारत के अलावा सिंगापुर, नीदरलैंड, भूटान और यूएई जैसे देशों में भी एक्सपोर्ट किए जाते हैं।
5 रुपये के पैकेट से हजारों करोड़ के कारोबार तक
Haldiram की खासियत यह रही कि कंपनी ने अपने प्रोडक्ट्स को अलग-अलग वर्ग के ग्राहकों तक पहुंचाने पर ध्यान दिया। आज भी इसके छोटे पैकेट किफायती कीमतों पर उपलब्ध हैं, जबकि इसके पोर्टफोलियो में प्रीमियम प्रोडक्ट्स भी शामिल हैं।
कंपनी की कहानी बीकानेर की एक छोटी दुकान से शुरू होकर बड़े मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने की है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, Haldiram की वैल्यूएशन करीब 85,000 करोड़ रुपये आंकी जाती है और भारतीय स्नैक्स मार्केट में इसकी हिस्सेदारी 40% से ज्यादा बताई जाती है।
एक पारंपरिक भुजिया की रेसिपी में किया गया प्रयोग धीरे-धीरे एक ऐसे ब्रांड की नींव बन गया, जिसने भारतीय नमकीन और स्नैक्स को देश के साथ-साथ विदेशी बाजारों में भी पहचान दिलाई।











