टाटा संस की अगली बोर्ड बैठक में चेयरमैन के संभावित तीसरे कार्यकाल पर चर्चा हो सकती है। निवेशकों की नजर इस फैसले पर है। नेतृत्व की निरंतरता, आयु सीमा और संभावित सूचीबद्धता जैसे मुद्दे समूह की रणनीतिक दिशा तय कर सकते हैं।
Business News: टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी Tata Sons के निदेशक मंडल की अगली सप्ताह होने वाली बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। यह बैठक केवल नियमित कॉरपोरेट एजेंडा तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि समूह के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े बड़े फैसले का संकेत दे सकती है। चर्चा है कि चेयरमैन Natarajan Chandrasekaran के तीसरे कार्यकाल पर विचार किया जा सकता है।
हालांकि उनका मौजूदा दूसरा कार्यकाल अभी एक वर्ष बाकी है, लेकिन 24 फरवरी को प्रस्तावित बोर्ड बैठक में अगले पांच वर्षों के लिए नेतृत्व को लेकर दिशा तय हो सकती है। ऐसे में कॉरपोरेट जगत और निवेशकों की नजर इस बैठक पर टिकी है।
तीसरे पांच वर्षीय कार्यकाल पर संभावित फैसला
सूत्रों के मुताबिक, बोर्ड चंद्रशेखरन के तीसरे पांच वर्षीय कार्यकाल को मंजूरी देने के प्रस्ताव पर विचार कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह कदम स्थिरता और निरंतरता का संकेत माना जाएगा। बड़े कॉरपोरेट समूहों में नेतृत्व का समय से पहले स्पष्ट होना रणनीतिक फैसलों के लिए अहम होता है।
चंद्रशेखरन ने 21 फरवरी 2017 को समूह की कमान संभाली थी। यदि उन्हें तीसरा कार्यकाल मिलता है तो वह 2032 तक टाटा समूह का नेतृत्व कर सकते हैं। इससे समूह की दीर्घकालिक योजनाओं को स्थिर दिशा मिल सकती है।
टाटा ट्रस्ट्स की सिफारिश
टाटा संस के सबसे बड़े शेयरधारक Tata Trusts ने पिछले वर्ष ही चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल के समर्थन में प्रस्ताव पारित किया था। उस बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन ने कार्यकारी चेयरमैन के रूप में उनके कार्यकाल को अगले पांच वर्षों तक बढ़ाने का सुझाव दिया था।
टाटा ट्रस्ट्स की सिफारिश को महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि समूह की रणनीतिक दिशा तय करने में इसकी बड़ी भूमिका है। ऐसे में बोर्ड द्वारा इस सिफारिश पर विचार स्वाभाविक कदम माना जा रहा है।
बोर्ड चर्चा में चेयरमैन की भूमिका

कॉरपोरेट गवर्नेंस के नियमों के अनुसार, जब बोर्ड में किसी चेयरमैन के कार्यकाल विस्तार पर चर्चा होती है, तो संबंधित व्यक्ति खुद को उस प्रक्रिया से अलग रखते हैं। सूत्रों का कहना है कि यदि इस मुद्दे पर चर्चा होती है तो चंद्रशेखरन भी इससे खुद को अलग रख सकते हैं।
साल 2022 में जब उनके दूसरे कार्यकाल का नवीनीकरण हुआ था, तब समूह के मानद चेयरमैन Ratan Tata ने विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में बोर्ड बैठक में हिस्सा लिया था और अगले पांच वर्षों के लिए उनके नाम की सिफारिश की थी। उस समय यह फैसला समूह की स्थिरता के लिहाज से अहम माना गया था।
साइरस मिस्त्री के बाद नेतृत्व परिवर्तन
चंद्रशेखरन ने ऐसे समय में समूह की कमान संभाली थी जब कॉरपोरेट स्तर पर अस्थिरता का दौर था। Cyrus Mistry को पद से हटाए जाने के चार महीने बाद उन्हें कार्यकारी चेयरमैन बनाया गया था। उस समय समूह के भीतर नेतृत्व को लेकर कई सवाल उठे थे।
चंद्रशेखरन के कार्यकाल में समूह ने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, ग्लोबल एक्सपेंशन और नई टेक्नोलॉजी में निवेश पर जोर दिया। उनके नेतृत्व में कई कंपनियों ने रणनीतिक बदलाव किए और कारोबार को नई दिशा देने की कोशिश की।
टाटा समूह में अधिकारी आम तौर पर 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं। गैर-कार्यकारी भूमिकाओं में यह सीमा 70 वर्ष तक हो सकती है। यदि चंद्रशेखरन को तीसरा कार्यकाल मिलता है तो उसके अंत तक उनकी आयु 68 वर्ष होगी।
सूत्रों का कहना है कि कार्यकारी भूमिकाओं के लिए आयु सीमा में छूट दी जा सकती है। पहले भी विशेष परिस्थितियों में ऐसा किया गया है। जब साइरस मिस्त्री को हटाया गया था, तब रतन टाटा ने अस्थायी रूप से कार्यकारी भूमिका संभाली थी और उस समय आयु सीमा में लचीलापन दिखाया गया था।
सूचीबद्धता पर भी पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि चंद्रशेखरन के कार्यकाल के नवीनीकरण से टाटा संस की संभावित सूचीबद्धता के मुद्दे पर भी स्पष्टता आ सकती है। कुछ समय से यह चर्चा रही है कि कंपनी को पब्लिक लिस्टिंग के दायरे में लाया जा सकता है।
हालांकि टाटा ट्रस्ट्स का विचार है कि टाटा संस को सार्वजनिक सूचीबद्धता से बाहर रखा जाना चाहिए। सितंबर 2022 में Reserve Bank of India ने टाटा संस को ऊपरी स्तर की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में नामित किया था। इस वर्गीकरण के बाद सूचीबद्धता को लेकर नियमों और संभावनाओं पर चर्चा तेज हुई थी।












