Tata Sons Row: नोएल टाटा की आपत्ति पर कंपनी का जवाब, एन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को बताया वैध

Tata Sons Row में कंपनी ने नोएल टाटा की आपत्तियों को खारिज करते हुए एन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को वैध बताया। कंपनी ने Articles of Association और तीन

टाटा समूह में शीर्ष नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान के बीच टाटा संस ने टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा की आपत्तियों को खारिज कर दिया है। नोएल टाटा ने एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए थे।

Tata Sons Chairman Reappointment: टाटा समूह में चेयरमैन पद को लेकर Tata Sons और Tata Trusts के बीच मतभेद अब corporate governance और legal interpretation के मुद्दे तक पहुंच गए हैं। Tata Sons ने Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata की ओर से उठाई गई आपत्तियों को खारिज करते हुए N Chandrasekaran की दोबारा नियुक्ति को वैध बताया है।

24 सितंबर को भेजे गए जवाब में Tata Sons ने कहा कि 17 सितंबर को बोर्ड द्वारा चंद्रशेखरन को एक और पांच साल के कार्यकाल के लिए नियुक्त करने का प्रस्ताव कंपनी के Articles of Association (AoA) और लागू कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप था। कंपनी ने अपने रुख के समर्थन में तीन वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों की राय का भी हवाला दिया है।

क्या है पूरा विवाद?

विवाद की शुरुआत 17 सितंबर की Tata Sons board meeting से हुई। बैठक में एन चंद्रशेखरन के एक और पांच साल के कार्यकाल के प्रस्ताव पर बोर्ड के अधिकांश सदस्यों ने समर्थन दिया, जबकि Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा ने इसका विरोध किया। इसके बाद नोएल टाटा ने बोर्ड के फैसले और meeting में इस्तेमाल किए गए casting vote की वैधता पर सवाल उठाए। Tata Trusts का कहना रहा है कि Trust-nominated directors की भूमिका से जुड़े Articles of Association के प्रावधानों का सही तरीके से पालन नहीं हुआ।

दूसरी ओर, Tata Sons ने अपने जवाब में कहा है कि board resolution वैध तरीके से पारित हुआ और presiding chairman के casting vote के इस्तेमाल ने प्रक्रिया को पूरा किया।

Article 118 को लेकर क्या है मतभेद?

इस विवाद में Tata Sons के Article 118 की interpretation भी महत्वपूर्ण है। इस प्रावधान में नए चेयरमैन के चयन के लिए एक विशेष Selection Committee की व्यवस्था है, जिसमें Tata Trusts द्वारा नामित सदस्य भी शामिल होते हैं। Tata Sons का कहना है कि Article 118 का यह special selection mechanism किसी new chairman की पहली appointment के लिए है। 

कंपनी के अनुसार, मौजूदा चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की reappointment पर यह प्रक्रिया लागू नहीं होती, क्योंकि उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होना है और प्रस्ताव उनके continuation से संबंधित है। हालांकि, Tata Trusts इस interpretation से सहमत नहीं है और उसने चंद्रशेखरन की reappointment की प्रक्रिया पर अलग कानूनी दृष्टिकोण रखा है।

Article 121 और Casting Vote भी बना विवाद का केंद्र

इस मामले में Article 121 की interpretation भी अहम हो गई है। बोर्ड में मतदान के दौरान चार सदस्यों ने चंद्रशेखरन के पक्ष में वोट दिया, जबकि नोएल टाटा ने विरोध किया। इसके बाद presiding chairman के casting vote के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठा। Tata Sons की ओर से पेश कानूनी राय में कहा गया है कि मौजूदा परिस्थितियों में casting vote का इस्तेमाल Articles of Association के अनुरूप था। 

दूसरी ओर, Tata Trusts का मत है कि casting vote का इस्तेमाल केवल पूरे बोर्ड में बराबरी की स्थिति में किया जा सकता है और Trust-nominated directors की अलग voting requirement को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

तीन Legal Experts की राय का हवाला

Tata Sons ने अपने जवाब में वरिष्ठ अधिवक्ता Sudipto Sarkar, पूर्व Chief Justice of India Uday U Lalit और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश B N Srikrishna की legal opinions का हवाला दिया है। कंपनी के अनुसार, इन रायों में 17 सितंबर के board decision और casting vote को Articles of Association के अनुरूप माना गया है। 

Justice Uday U Lalit की राय में बोर्ड के पांच voting members में चार ने प्रस्ताव का समर्थन किया और presiding chairman द्वारा casting vote का इस्तेमाल किया गया। वहीं, Justice B N Srikrishna की राय में Trust-nominated director के लिए कंपनी के प्रति statutory fiduciary duty महत्वपूर्ण है, खासकर ऐसी स्थिति में जहां nominee और company के हितों को लेकर टकराव दिखाई दे।

Tata Trusts का पक्ष क्या है?

Tata Trusts ने Tata Sons की interpretation को स्वीकार नहीं किया है। Trusts का कहना है कि Trust-nominated directors के समर्थन से जुड़े प्रावधानों का पालन आवश्यक है और Noel Tata के विरोध के बावजूद resolution को valid मानना सही नहीं है। Tata Trusts ने अपने पक्ष में पूर्व Chief Justice of India D Y Chandrachud की legal opinion का भी हवाला दिया है। इस तरह फिलहाल दोनों पक्ष अलग-अलग legal interpretations पर कायम हैं।

Tata Sons के बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन को मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद एक और पांच साल के लिए चेयरमैन बनाए रखने का फैसला किया है। उनका वर्तमान कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होना है। इसका मतलब है कि विवाद तत्काल पद परिवर्तन के बजाय उनके अगले tenure की appointment और उसकी governance प्रक्रिया से जुड़ा है।

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