BJP सांसद तेजस्वी सूर्या ने ‘सेव लालबाग’ आंदोलन का नेतृत्व किया, हर रविवार अलग पार्क में प्रदर्शन का ऐलान

बेंगलुरु में BJP सांसद तेजस्वी सूर्या ने ‘सेव लालबाग’ प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उन्होंने पार्क की जमीन के हस्तांतरण का विरोध कर हर रविवार आंदोलन का ऐलान किया।

बेंगलुरु में BJP सांसद तेजस्वी सूर्या ने लालबाग की सुरक्षा को लेकर ‘सेव लालबाग’ प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उन्होंने टनल रोड परियोजना और पार्क की जमीन के पांच प्रतिशत तक हस्तांतरण का विरोध किया। सूर्या ने हर रविवार अलग-अलग पार्कों में आंदोलन की घोषणा की।

बेंगलुरु: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में लालबाग की हरियाली और शहर के पर्यावरण को लेकर राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने रविवार को ‘सेव लालबाग’ अभियान के तहत बड़े प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उन्होंने कर्नाटक सरकार की प्रस्तावित टनल रोड परियोजना और पार्क की जमीन के सीमित हस्तांतरण की अनुमति देने वाले फैसले का कड़ा विरोध किया। सूर्या ने सरकार से दोनों फैसलों को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि जब तक सरकार अपने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

लालबाग में जुटे हजारों लोग

बेंगलुरु के ऐतिहासिक लालबाग में आयोजित विरोध प्रदर्शन में पर्यावरण कार्यकर्ताओं, सुबह की सैर करने वालों, युवाओं और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने शहर के पार्कों और हरित क्षेत्रों को विकास परियोजनाओं से बचाने की मांग करते हुए नारे लगाए। इस दौरान लालबाग के आसपास लोगों की बड़ी मौजूदगी देखने को मिली।

तेजस्वी सूर्या ने प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए कहा कि लालबाग केवल एक पार्क नहीं, बल्कि बेंगलुरु की प्राकृतिक विरासत और शहर के नागरिकों की साझा संपत्ति है। उनका कहना था कि शहर के तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच मौजूद हरित क्षेत्रों की रक्षा करना जरूरी है।

टनल रोड परियोजना का विरोध

भाजपा सांसद ने कर्नाटक सरकार की प्रस्तावित टनल रोड परियोजना पर पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि लालबाग और अन्य हरित क्षेत्रों के आसपास इस तरह की परियोजनाएं शहर के पर्यावरण पर दबाव बढ़ा सकती हैं।

सूर्या ने सरकार से मांग की कि लालबाग से संबंधित प्रस्तावित टनल रोड परियोजना को पूरी तरह रद्द किया जाए। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु के विकास के नाम पर शहर की प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है।

उनके मुताबिक, बेंगलुरु पहले ही यातायात, प्रदूषण और लगातार बढ़ते निर्माण के दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे में मौजूदा हरित क्षेत्रों को सुरक्षित रखना भविष्य के लिए आवश्यक है।

पार्क की जमीन के हस्तांतरण पर भी सवाल

विरोध का दूसरा प्रमुख मुद्दा कर्नाटक सरकार द्वारा सरकारी पार्कों से जुड़ा हालिया संशोधन है। इसके तहत कुछ सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए पार्क की जमीन के पांच प्रतिशत तक हिस्से के हस्तांतरण की अनुमति का प्रावधान बताया गया है।

तेजस्वी सूर्या ने इस प्रावधान को वापस लेने की मांग की। उनका कहना है कि भले ही जमीन के हस्तांतरण की सीमा पांच प्रतिशत तक रखी गई हो, लेकिन इससे भविष्य में शहर के पार्कों पर विकास परियोजनाओं का दबाव बढ़ सकता है।

पर्यावरण कार्यकर्ताओं और नागरिक समूहों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर चिंता जताई जा रही है। आलोचकों का तर्क है कि बेंगलुरु जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में उपलब्ध हरित क्षेत्र सीमित हैं। ऐसे में पार्क की जमीन के किसी भी हिस्से को दूसरे सार्वजनिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराने की अनुमति लंबे समय में हरित क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती है।

‘यह सिर्फ ट्रेलर है, पूरी तस्वीर बाकी है’

प्रदर्शन के दौरान तेजस्वी सूर्या ने लालबाग में केम्पेगौड़ा टावर के पास चट्टानों को गले लगाया और दिवंगत कन्नड़ अभिनेता राजकुमार की फिल्म ‘गंधद गुड़ी’ का गीत भी गाया। इसके बाद उन्होंने सरकार को आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी।

सूर्या ने कहा कि रविवार का प्रदर्शन केवल शुरुआत है और आने वाले समय में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने सरकार को संदेश देते हुए कहा कि यह सिर्फ ट्रेलर है, पूरी तस्वीर अभी बाकी है।

भाजपा सांसद ने प्रदर्शन में शामिल लोगों की एकजुटता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों से लेकर छोटे बच्चों तक, अलग-अलग उम्र के लोग बेंगलुरु की हरियाली बचाने के लिए एक साथ खड़े हुए हैं।

हर रविवार अलग-अलग पार्कों में होगा प्रदर्शन

तेजस्वी सूर्या ने आंदोलन को लालबाग तक सीमित नहीं रखने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु के अलग-अलग पार्कों में प्रत्येक रविवार को विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य शहर के नागरिकों को अभियान से जोड़ना और सरकार पर अपने फैसलों की समीक्षा करने के लिए दबाव बनाना है।

उन्होंने कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार पार्क की जमीन के पांच प्रतिशत तक हस्तांतरण की अनुमति देने वाले कानून को वापस नहीं लेती और पर्यावरण के लिहाज से नुकसानदायक मानी जा रही टनल रोड परियोजना को पूरी तरह छोड़ नहीं देती।

सूर्या के अनुसार, यह अभियान किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं बल्कि बेंगलुरु के नागरिकों से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि शहर के पार्क सभी लोगों के लिए हैं और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सामूहिक है।

बेंगलुरु के हरित क्षेत्रों पर बढ़ता दबाव

बेंगलुरु को लंबे समय से भारत के प्रमुख हरित शहरों में गिना जाता रहा है। लालबाग और कब्बन पार्क जैसे बड़े हरित क्षेत्र शहर की पर्यावरणीय पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हालांकि, आबादी बढ़ने, यातायात के विस्तार और लगातार हो रहे निर्माण के कारण शहर के प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ा है।

ऐसे में पार्कों और खुले स्थानों से जुड़ा कोई भी सरकारी फैसला नागरिकों और पर्यावरण संगठनों के बीच बहस का विषय बन जाता है। ‘सेव लालबाग’ प्रदर्शन ने इसी बहस को एक बार फिर सार्वजनिक और राजनीतिक मंच पर ला दिया है।

पर्यावरण संरक्षण से जुड़े समूहों का कहना है कि शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। वहीं सरकार की ओर से विकास और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की जरूरतों को भी ध्यान में रखना पड़ता है। ऐसे में लालबाग की जमीन और टनल रोड परियोजना को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक तथा नागरिक स्तर पर चर्चा और बढ़ सकती है।

आंदोलन को जन आंदोलन बनाने की कोशिश

तेजस्वी सूर्या ने कहा कि रविवार को लालबाग में दिखाई दिया जनसमर्थन बताता है कि बेंगलुरु के नागरिक अपने शहर की हरियाली को लेकर गंभीर हैं। उन्होंने दावा किया कि अभियान को आने वाले सप्ताहों में अलग-अलग इलाकों तक पहुंचाया जाएगा।

उन्होंने नागरिकों से शहर के पार्कों और हरित क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की। उनका कहना है कि सरकार को नागरिकों की आवाज सुननी चाहिए और ऐसे फैसलों पर पुनर्विचार करना चाहिए, जिनसे शहर के पर्यावरण पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है।

फिलहाल, ‘सेव लालबाग’ अभियान ने कर्नाटक की राजनीति में पर्यावरण और शहरी विकास से जुड़े मुद्दे को प्रमुखता से सामने ला दिया है। रविवार को हुए प्रदर्शन के बाद अब नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या टनल रोड परियोजना तथा पार्क की जमीन के हस्तांतरण संबंधी फैसलों को लेकर कोई बदलाव किया जाता है।

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