निवाई स्थित के.एन.मोदी यूनिवर्सिटी में एसीबी ने बीएड की HOD मीनू मंगल और प्रोफेसर रमेश मीणा को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। अटेंडेंस पूरी करने और परीक्षा में बैठाने के नाम पर छात्रों से पैसे मांगे जा रहे थे।
टोंक: राजस्थान के टोंक जिले के निवाई स्थित के.एन. मोदी यूनिवर्सिटी में भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) टोंक की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बीएड विभाग की हेड ऑफ डिपार्टमेंट (HOD) मीनू मंगल और प्रोफेसर रमेश मीणा को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
यह मामला विश्वविद्यालय में छात्रों की उपस्थिति (अटेंडेंस) पूरी करने और परीक्षा में बैठने की अनुमति देने के बदले रिश्वत मांगने से जुड़ा है, जिसने शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
ACB अधिकारियों के अनुसार, इस मामले की शुरुआत 12 मई को हुई जब बीएड सेकेंड ईयर के एक छात्र ने शिकायत दर्ज कराई। छात्र ने आरोप लगाया कि उसकी अटेंडेंस कम होने के कारण उसे परीक्षा में बैठने से रोका जा रहा था।
छात्र का दावा था कि HOD मीनू मंगल और प्रोफेसर रमेश मीणा ने अटेंडेंस “सेटल” करने और परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने के लिए 20 हजार रुपये की मांग की।
इसके अलावा, एक अन्य छात्रा ने भी समान शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उसने बताया कि उसके दो पेपर छूट चुके थे और उस पर भी दबाव बनाया जा रहा था।
ACB की ट्रैप कार्रवाई: रिश्वत लेते ही गिरफ्तारी
शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की। 18 मई को शिकायत का सत्यापन किया गया, जिसमें आरोपों की पुष्टि हुई।
इसके बाद एसीबी टीम ने योजना बनाकर ट्रैप ऑपरेशन चलाया। शुक्रवार को जैसे ही 20 हजार रुपये का लेन-देन हुआ, टीम ने मौके पर ही दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
ACB अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई पूरी तरह योजनाबद्ध थी और रिश्वत के सबूत मौके से ही जब्त कर लिए गए।
अटेंडेंस सिस्टम पर सवाल
इस घटना ने विश्वविद्यालयों में अटेंडेंस और परीक्षा पात्रता प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों के अनुसार, कई बार अटेंडेंस को लेकर अनावश्यक दबाव बनाया जाता है, जिससे उन्हें मजबूरी में गलत रास्ता अपनाना पड़ता है।
ACB का कहना है कि इस मामले में केवल दो शिकायतें सामने आई हैं, लेकिन प्रारंभिक जांच से संकेत मिलते हैं कि यह कोई अकेला मामला नहीं हो सकता। अन्य छात्रों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।

विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका पर जांच
गिरफ्तारी के बाद एसीबी ने विश्वविद्यालय परिसर से संबंधित अटेंडेंस रजिस्टर और अन्य दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। इनकी विस्तृत जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या यह रिश्वतखोरी का पैटर्न लंबे समय से चल रहा था।
अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि यदि जांच में और नाम सामने आते हैं तो आगे और कार्रवाई की जाएगी।
ACB का बयान
टोंक एसीबी के एडिशनल एसपी ऋषिकेश मीणा ने बताया कि दोनों आरोपियों को शिकायत और सत्यापन के आधार पर रंगे हाथों पकड़ा गया है।
उन्होंने कहा कि छात्रों से मिली शिकायतें गंभीर थीं और जांच के बाद कार्रवाई जरूरी हो गई थी। ACB का मानना है कि शिक्षा जैसे क्षेत्र में भ्रष्टाचार बेहद संवेदनशील मुद्दा है, जिस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
छात्रों में आक्रोश और चिंता
इस घटना के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय के छात्रों में नाराजगी और चिंता का माहौल है। कई छात्रों का कहना है कि अटेंडेंस को लेकर पहले से ही दबाव रहता है और अब इस तरह के रिश्वत के मामले सामने आने से शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हुआ है।
कुछ छात्रों ने मांग की है कि पूरे अटेंडेंस सिस्टम की स्वतंत्र जांच कराई जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
शिक्षा संस्थानों में भ्रष्टाचार पर बढ़ती चिंता
यह मामला भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता और नैतिकता को लेकर चल रही बहस को और तेज करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अटेंडेंस और परीक्षा पात्रता जैसे मुद्दों पर मनमानी और भ्रष्टाचार की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम, ऑडिटिंग और सख्त निगरानी की आवश्यकता है।
कानूनी प्रक्रिया आगे जारी
ACB ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मामला दर्ज किया है। आगे की जांच में यह भी देखा जाएगा कि क्या इस तरह की गतिविधियों में अन्य कर्मचारी या अधिकारी भी शामिल थे।
दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।











