ट्रंप ने जताई नाराजगी! NATO छोड़ सकता है अमेरिका, ईरान युद्ध में सहयोगियों का नहीं मिला समर्थन

अमेरिका-ईरान युद्ध में सहयोगियों की कमी से ट्रंप नाराज, नाटो को 'कागजी बाघ' बताया और गठबंधन से बाहर निकलने पर विचार किया जा सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान युद्ध में सहयोगियों का समर्थन न मिलने से वह नाराज हैं। उन्होंने नाटो को 'कागजी बाघ' बताया और संकेत दिया कि अमेरिका भविष्य में इस गठबंधन से बाहर जा सकता है।

America: पश्चिम एशिया में जारी ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो (North Atlantic Treaty Organization) से बाहर निकलने पर गंभीर विचार करने की बात कही है। उन्होंने ब्रिटिश अखबार डेली टेलीग्राफ को दिए इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में सहयोगी देशों का पूरा समर्थन नहीं मिला, जिससे उन्हें नाराजगी हुई।

ट्रंप ने साफ किया कि अब नाटो में बने रहने पर दोबारा सोचने की जरूरत नहीं है और अमेरिका इस गठबंधन से बाहर भी जा सकता है। उनका यह बयान पश्चिम एशिया में तनाव के बीच आया है, जहां अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई में सहयोगियों से पर्याप्त समर्थन नहीं पा रहा।

ईरान युद्ध में अमेरिका की नाराजगी

ट्रंप ने इंटरव्यू में कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान कई सहयोगी देश पूरी तरह खड़े नहीं हुए। उन्होंने संकेत दिया कि यही वजह है कि अमेरिका नाटो में अपनी स्थिति पर पुनर्विचार कर रहा है।

ट्रंप ने कहा कि युद्ध के दौरान सहयोगियों ने अमेरिका की अपेक्षाओं के अनुसार समर्थन नहीं दिया। इस स्थिति ने अमेरिकी राष्ट्रपति को नाटो की विश्वसनीयता और संगठन की मजबूती पर सवाल उठाने के लिए मजबूर कर दिया।

नाटो को कहा 'कागजी बाघ'

ट्रंप ने नाटो को लेकर अपनी असंतोष जाहिर करते हुए इसे 'कागजी बाघ' बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें हमेशा लगता था कि नाटो उतना मजबूत नहीं है, जितना दिखता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस स्थिति को जानते हैं।

ट्रंप ने जताई नाराजगी! NATO छोड़ सकता है अमेरिका, ईरान युद्ध में सहयोगियों का नहीं मिला समर्थन

ट्रंप ने जोर देकर कहा कि नाटो की क्षमता और विश्वसनीयता पर लंबे समय से संदेह था। ईरान युद्ध के अनुभव ने उनके विचारों को और मजबूत कर दिया। उन्होंने संकेत दिया कि अब अमेरिका को नाटो पर भरोसा कम है और यह संगठन अमेरिका के हितों के अनुसार काम नहीं कर रहा।

सहयोगियों के समर्थन की कमी

ट्रंप ने बताया कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ऑपरेशन करते समय कई सहयोगी देशों से पूरी मदद और समर्थन की उम्मीद की थी। लेकिन ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और अन्य प्रमुख देश अमेरिका के साथ पूरी तरह नहीं खड़े हुए।

इसका सीधा असर अमेरिकी सैन्य अभियान पर पड़ा। ट्रंप ने कहा कि सहयोगियों के इस रवैये ने अमेरिका को मजबूर किया कि वह अपने सुरक्षा और रणनीति के फैसलों पर फिर से विचार करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब नाटो में बने रहना अनिवार्य नहीं है और अमेरिका अपने हितों के लिए स्वतंत्र निर्णय ले सकता है।

ट्रंप का नाटो छोड़ने का इशारा

ट्रंप ने इंटरव्यू में यह भी कहा कि उन्होंने नाटो में बने रहने या बाहर निकलने के विकल्पों पर गंभीर विचार किया है। उनका कहना है कि अमेरिका को अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि नाटो की विश्वसनीयता पर भरोसा कमजोर होने की वजह से अब अमेरिका नाटो से बाहर निकलने पर विचार कर रहा है। उन्होंने यह साफ किया कि यह कोई अल्पकालिक सोच नहीं है, बल्कि रणनीतिक और दीर्घकालिक निर्णय हो सकता है।

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