ट्रंप के सरकारी टीवी विज्ञापनों पर विवाद, आलोचना के बाद बोले- अब टैक्सपेयर्स का पैसा नहीं लगेगा

ट्रंप ने विवादित टीवी विज्ञापनों की फंडिंग सरकारी धन से रोकने का ऐलान किया। आलोचक इन्हें राजनीतिक प्रचार बता रहे हैं और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विवादित टीवी विज्ञापनों के लिए आगे सरकारी धन इस्तेमाल नहीं करने की घोषणा की है। आलोचकों ने आरोप लगाया था कि विज्ञापनों में राजनीतिक प्रचार के लिए टैक्सपेयर्स का पैसा लगाया गया। स्वतंत्र जांच की मांग जारी है।

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनके प्रचार शैली वाले टेलीविजन विज्ञापनों के लिए अब अमेरिकी करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। यह घोषणा उन विज्ञापनों को लेकर बढ़ते विवाद के बीच हुई है, जिन्हें आलोचकों ने सरकारी धन के जरिए राष्ट्रपति के राजनीतिक प्रचार के रूप में देखा है। ट्रंप ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर कहा कि वह इन विज्ञापनों को अमेरिका के लिए सकारात्मक संदेश मानते हैं, लेकिन आगे से इनके खर्च का भुगतान वह स्वयं या उनका MAGA PAC करेगा। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने भी पुष्टि की कि भविष्य में इन विज्ञापनों का खर्च राजनीतिक समिति द्वारा उठाया जाएगा।

विवाद का केंद्र तीन राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित टीवी विज्ञापन हैं। इनमें ट्रंप की नीतियों और उनके नेतृत्व को सकारात्मक रूप में पेश किया गया है। विज्ञापनों में अमेरिका के लिए “स्वर्ण युग” जैसे संदेशों का इस्तेमाल किया गया, जिसके बाद दोनों प्रमुख अमेरिकी दलों के सांसदों और नैतिकता विशेषज्ञों ने सवाल उठाए।

सरकारी धन से राजनीतिक प्रचार के आरोप

विवादित विज्ञापनों को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकारी बजट का इस्तेमाल किसी राष्ट्रपति के राजनीतिक संदेश को बढ़ावा देने के लिए किया गया।

डेमोक्रेटिक सांसदों ने पिछले महीने आरोप लगाया था कि होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के फंड से करीब 2 करोड़ डॉलर विज्ञापनों के प्रसारण के लिए स्थानांतरित किए गए। सांसदों ने इस मामले में स्वतंत्र जांच की मांग की थी।

आलोचकों का कहना है कि सरकारी विज्ञापन का उद्देश्य सार्वजनिक जानकारी देना होना चाहिए, न कि किसी निर्वाचित नेता की राजनीतिक छवि को मजबूत करना। इसी आधार पर दोनों पार्टियों के कुछ सांसदों और नैतिकता विशेषज्ञों ने इन विज्ञापनों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की।

ट्रंप के नए फैसले के बाद सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर विवाद का एक हिस्सा कम हो सकता है, लेकिन यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि पहले प्रसारित विज्ञापनों के लिए धन का इस्तेमाल किस प्रक्रिया के तहत किया गया।

ट्रंप बोले- विज्ञापनों को MAGA PAC करेगा फंड

ट्रंप ने कहा कि वह इन विज्ञापनों को एक सकारात्मक राष्ट्रीय संदेश मानते हैं, लेकिन आगे से उन्हें सरकारी धन से नहीं चलाया जाएगा।

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार, भविष्य में विज्ञापनों का खर्च MAGA Inc. राजनीतिक समिति उठाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक, इस समिति के पास करीब 40 करोड़ डॉलर की राशि है।

इस बदलाव का अर्थ है कि यदि विज्ञापन जारी रहते हैं, तो उनके भुगतान का स्रोत सरकारी बजट के बजाय राजनीतिक संगठन होगा। इससे सरकारी संसाधनों और राजनीतिक गतिविधियों के बीच अंतर स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है।

हालांकि, आलोचक पहले प्रसारित विज्ञापनों और उनमें इस्तेमाल किए गए सरकारी संसाधनों की जांच की मांग अभी भी कर रहे हैं।

विज्ञापनों में क्या दिखाया गया?

इन विज्ञापनों को राष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग टीवी कार्यक्रमों के दौरान प्रसारित किया गया। इनमें ट्रंप की राजनीतिक विचारधारा और उनके नेतृत्व को सकारात्मक तरीके से पेश किया गया।

एक विज्ञापन में ट्रंप को यह कहते हुए दिखाया गया कि “अमेरिका कभी कम्युनिस्ट देश नहीं बनेगा।” इसके साथ पृष्ठभूमि में “लव मी” जैसे शब्द दोहराए जाते हैं।

दूसरे विज्ञापन में माउंट रशमोर की तस्वीरों और ट्रंप के भाषण के दृश्यों को मिलाया गया। इसमें अमेरिका के मौजूदा दौर को “गोल्डन एज ऑफ अमेरिका” यानी अमेरिका का स्वर्ण युग बताया गया।

तीसरे विज्ञापन को भी ट्रंप प्रशासन की उपलब्धियों और राजनीतिक संदेश से जोड़ा गया है।

इन विज्ञापनों के अंत में एक महत्वपूर्ण डिस्क्लेमर भी दिखाई देता है, जिसमें बताया जाता है कि इनके लिए भुगतान अमेरिकी सरकार ने किया है। यही डिस्क्लेमर विवाद का एक प्रमुख कारण बना, क्योंकि इससे यह सवाल उठा कि सरकारी धन से राष्ट्रपति की राजनीतिक छवि को बढ़ावा दिया जा रहा है या नहीं।

चुनाव से पहले विज्ञापनों का समय भी बना सवाल

इन विज्ञापनों के प्रसारण का समय भी विवाद का विषय है। अमेरिका में नवंबर में होने वाले कांग्रेस चुनावों से कुछ समय पहले इन विज्ञापनों का प्रसारण हुआ।

आलोचकों के मुताबिक, चुनाव के नजदीक राष्ट्रपति की राजनीतिक उपलब्धियों और संदेशों को राष्ट्रीय स्तर पर सरकारी विज्ञापनों के माध्यम से प्रसारित करना राजनीतिक प्रचार जैसा दिखाई दे सकता है।

इन विज्ञापनों को फुटबॉल मैचों समेत बड़े दर्शक वर्ग वाले कार्यक्रमों के दौरान प्रसारित किए जाने की जानकारी सामने आई है। रविवार को भी ऐसे विज्ञापनों के प्रसारण की रिपोर्ट सामने आई थी।

यही वजह है कि कुछ सांसदों ने इसे केवल सरकारी सूचना अभियान के बजाय राजनीतिक संचार का मामला बताया है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में क्या दावा?

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि ट्रंप ने व्यक्तिगत रूप से व्हाइट हाउस के बजट निदेशक को इन टीवी विज्ञापनों के लिए सरकारी धन इस्तेमाल करने का निर्देश दिया था।

यह दावा विवाद को और गंभीर बनाता है क्योंकि यदि सरकारी फंड का इस्तेमाल सीधे राष्ट्रपति के निर्देश पर राजनीतिक संदेश वाले विज्ञापनों के लिए किया गया, तो इससे सरकारी संसाधनों और राजनीतिक गतिविधि के बीच सीमा को लेकर कानूनी और नैतिक सवाल उठ सकते हैं।

हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि का उल्लेख उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं है। इसलिए इसे जांच के विषय के रूप में देखना उचित है, न कि स्थापित तथ्य के रूप में।

कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल ने मांगी जांच

कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने सोमवार को इन विज्ञापनों की स्वतंत्र जांच की मांग की।

बोंटा ने सरकारी धन के कथित इस्तेमाल को सार्वजनिक संसाधनों का गंभीर दुरुपयोग और जनता के भरोसे का उल्लंघन बताया। उनका बयान ऐसे समय आया जब दो डेमोक्रेटिक सांसदों ने पहले ही मामले की जांच की मांग की थी।

बोंटा की मांग से विवाद का दायरा संघीय प्रशासन से आगे बढ़कर राज्य स्तर के प्रमुख राजनीतिक पदाधिकारियों तक पहुंच गया है।

यदि स्वतंत्र जांच शुरू होती है, तो उसमें यह देखा जा सकता है कि विज्ञापनों के लिए धन किस विभाग से आया, उसे स्थानांतरित करने की प्रक्रिया क्या थी और विज्ञापनों की सामग्री सरकारी संचार के निर्धारित नियमों के अनुरूप थी या नहीं।

FCC अध्यक्ष ने विज्ञापनों को उचित बताया

वहीं, अमेरिकी संघीय संचार आयोग यानी FCC के अध्यक्ष ब्रेंडन कैर ने इन विज्ञापनों को उचित बताया है। कैर को ट्रंप ने उनके पद पर नियुक्त किया था।

कैर ने पिछले सप्ताह विज्ञापनों की जांच की मांग को खारिज कर दिया था। उनके रुख से संकेत मिलता है कि प्रशासन और उसके आलोचकों के बीच विज्ञापनों की प्रकृति को लेकर मतभेद बना हुआ है।

एक ओर आलोचक इसे सरकारी संसाधनों से राजनीतिक प्रचार मान रहे हैं, वहीं प्रशासन समर्थक इसे सरकार की नीतियों और उपलब्धियों के बारे में सार्वजनिक संदेश के रूप में देखते हैं।

सरकारी प्रचार और राजनीतिक गतिविधि की सीमा पर बहस

अमेरिका में सरकारी विज्ञापनों के लिए सार्वजनिक धन का इस्तेमाल नया नहीं है। सरकारें अक्सर स्वास्थ्य, सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, नागरिक सेवाओं और अन्य सार्वजनिक हित के मुद्दों पर विज्ञापन चलाती हैं।

लेकिन जब किसी विज्ञापन में मौजूदा राष्ट्रपति की व्यक्तिगत छवि, राजनीतिक नारे या चुनावी संदेश प्रमुख हो जाएं, तो सरकारी सूचना और राजनीतिक प्रचार के बीच अंतर पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

यही कारण है कि इस मामले में केवल विज्ञापनों की सामग्री ही नहीं, बल्कि उनके वित्तपोषण, अनुमोदन और प्रसारण की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हो गई है।

ट्रंप के फैसले से विवाद पूरी तरह खत्म नहीं

ट्रंप द्वारा भविष्य में सरकारी धन का इस्तेमाल रोकने की घोषणा राजनीतिक और नैतिक विवाद को कुछ हद तक कम कर सकती है। लेकिन पहले प्रसारित विज्ञापनों को लेकर स्वतंत्र जांच की मांग अभी भी बनी हुई है।

आने वाले समय में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि विज्ञापनों के लिए धन किस कानूनी प्रावधान के तहत इस्तेमाल किया गया और क्या सरकारी फंड से राजनीतिक संदेश प्रसारित करने के नियमों का उल्लंघन हुआ।

इस पूरे मामले का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह चुनाव से ठीक पहले सरकारी संसाधनों, राष्ट्रपति पद और राजनीतिक प्रचार के बीच संबंधों पर राष्ट्रीय बहस छेड़ रहा है।

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