Donald Trump ने कुछ पेटेंट दवाओं पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य अमेरिका में उत्पादन बढ़ाना और कीमतों को नियंत्रित करना है, जिससे वैश्विक फार्मा कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है।
Trump Tariff: अमेरिका में दवाओं की कीमतों और उत्पादन को लेकर एक बड़ा फैसला लिया गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने एक executive order पर हस्ताक्षर करते हुए कुछ पेटेंट दवाओं पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इस फैसले का मकसद अमेरिका में दवा उत्पादन को बढ़ाना और कीमतों को नियंत्रित करना बताया जा रहा है।
यह टैरिफ सीधे तौर पर उन कंपनियों को प्रभावित करेगा जो अमेरिकी सरकार के साथ pricing deal नहीं करेंगी। ट्रंप प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि जो कंपनियां सहयोग नहीं करेंगी, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
किन कंपनियों पर लगेगा कितना टैरिफ
इस नई policy के तहत कंपनियों को तीन अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है। जो कंपनियां “Most Favored Nation” pricing deal करती हैं और अमेरिका में दवाओं तथा उनके कच्चे माल का उत्पादन शुरू करती हैं, उन पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा।
वहीं जो कंपनियां अमेरिका में उत्पादन तो शुरू कर रही हैं लेकिन pricing deal नहीं करतीं, उन पर शुरुआत में 20 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। यह टैरिफ धीरे-धीरे बढ़कर चार साल में 100 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।
इसके अलावा जो कंपनियां न तो कोई समझौता करती हैं और न ही अमेरिका में उत्पादन बढ़ाती हैं, उन पर सीधा 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है।
कंपनियों को दिया गया समय
सरकार ने कंपनियों को बातचीत के लिए समय भी दिया है। बड़ी कंपनियों को 120 दिन और अन्य कंपनियों को 180 दिन का समय मिलेगा। इस दौरान वे सरकार के साथ समझौता कर सकती हैं।
अगर तय समयसीमा के भीतर कोई समझौता नहीं होता है, तो टैरिफ लागू कर दिया जाएगा। सरकार के अनुसार अब तक 17 कंपनियों के साथ pricing deal की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिनमें से 13 कंपनियों ने समझौते पर हस्ताक्षर भी कर दिए हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा फैसला
इस फैसले को केवल आर्थिक नीति के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जोड़ा गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आदेश में कहा कि दवाओं और उनके कच्चे माल के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता अमेरिका की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।

उनका मानना है कि अगर दवा आपूर्ति बाधित होती है, तो इसका सीधा असर देश की स्वास्थ्य व्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ सकता है। इसी कारण घरेलू production को बढ़ावा देना जरूरी है।
लिबरेशन डे से जुड़ा ऐलान
यह फैसला ट्रंप के “Liberation Day” की पहली सालगिरह पर लिया गया है। यह वही दिन था जब उन्होंने दुनिया के कई देशों से आने वाले उत्पादों पर भारी आयात शुल्क लगाने की घोषणा की थी। उस समय इस फैसले का असर शेयर बाजार पर भी पड़ा था और बाजार में गिरावट देखने को मिली थी। हालांकि बाद में कुछ टैरिफ को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द भी कर दिया गया था।
फार्मा इंडस्ट्री की चिंता
इस फैसले के बाद फार्मा इंडस्ट्री में चिंता बढ़ गई है। Pharmaceutical Research and Manufacturers of America के CEO स्टीफन जे उबल ने कहा कि अत्याधुनिक दवाओं पर टैक्स लगाने से लागत बढ़ सकती है और निवेश पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका में पहले से ही बायोफार्मा manufacturing का मजबूत आधार मौजूद है और अधिकांश दवाएं विश्वसनीय देशों से आती हैं। ऐसे में इस तरह का कदम वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है।
बड़ी कंपनियों पर दबाव
ट्रंप प्रशासन ने इस नीति के जरिए बड़ी दवा कंपनियों पर दबाव भी बनाया है। Pfizer, Eli Lilly और Bristol Myers Squibb जैसी कंपनियों के साथ पहले ही बातचीत चल रही है।
इन कंपनियों के साथ कीमतों को कम करने और अमेरिका में उत्पादन बढ़ाने को लेकर समझौते किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य यह है कि कंपनियां स्वेच्छा से कीमतें कम करें और घरेलू उत्पादन में निवेश बढ़ाएं।
अलग-अलग देशों पर टैरिफ
इस नीति के तहत कुछ देशों पर अलग-अलग दरों से टैरिफ लगाया गया है। यूरोपीय संघ, जापान, कोरिया और स्विट्जरलैंड से आने वाली पेटेंट दवाओं पर 15 प्रतिशत टैरिफ लागू किया जाएगा।
वहीं ब्रिटेन से आने वाली दवाओं पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा, जिसे भविष्य में trade agreement के तहत शून्य तक किया जा सकता है। ब्रिटेन पहले ही अमेरिका को निर्यात होने वाली कुछ दवाओं पर जीरो टैरिफ का लाभ ले रहा है।
इस फैसले का असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ेगा। दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है, जिससे कई देशों में स्वास्थ्य सेवाएं महंगी हो सकती हैं। इसके अलावा global pharma supply chain पर भी दबाव बढ़ सकता है। कई कंपनियां अपने उत्पादन और निर्यात की रणनीति बदल सकती हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो सकता है।









