तुंगुस्का मिसाइल भारत के एयर डिफेंस में शामिल, रूस से 858 करोड़ रुपये का बड़ा सौदा

भारत ने रूस से 858 करोड़ रुपये में तुंगुस्का एयर डिफेंस मिसाइल खरीदी। एस-400, बराक-8 और आकाश के साथ यह मल्टीलेयर सुरक्षा देगा।

भारत ने रूस से 858 करोड़ रुपये में तुंगुस्का एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम खरीदा है। एस-400, बराक-8 और आकाश के साथ यह सिस्टम ड्रोन, क्रूज मिसाइल और एयरक्राफ्ट से सुरक्षा को मजबूत करेगा।

New Delhi: भारत ने अपने एयर डिफेंस को और मजबूत बनाने के लिए रूस के साथ 858 करोड़ रुपये का बड़ा डील किया है। इस डील के तहत भारत को तुंगुस्का एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम मिलेगा। पहले से ही भारत के पास एस-400, बराक-8 और आकाश एयर डिफेंस सिस्टम मौजूद हैं। अब तुंगुस्का मिसाइल सिस्टम के शामिल होने से देश की हवाई सुरक्षा और अधिक प्रभावी होगी। यह मिसाइल सिस्टम ड्रोन, एयरक्राफ्ट और क्रूज मिसाइलों जैसी हवाई धमकियों के खिलाफ मल्टीलेयर्ड सुरक्षा प्रदान करेगा।

डील का विवरण और साइनिंग

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, तुंगुस्का एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की खरीद और इंडियन नेवी के P8I लॉन्ग-रेंज मैरीटाइम रिकॉनिसेंस एयरक्राफ्ट के इंस्पेक्शन (डिपो लेवल) के लिए कुल 858 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया गया। यह कॉन्ट्रैक्ट 27 मार्च 2026 को कर्तव्य भवन-2, नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और रूस की जेएससी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट की मौजूदगी में किया गया।

तुंगुस्का मिसाइल सिस्टम का महत्व

भारत के लिए 445 करोड़ रुपये का तुंगुस्का एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम का कॉन्ट्रैक्ट रूस के साथ साइन किया गया। यह आधुनिक मिसाइल सिस्टम भारत के मल्टीलेयर्ड एयर डिफेंस नेटवर्क को और मजबूत करेगा। यह सिस्टम ड्रोन, क्रूज मिसाइल और एयरक्राफ्ट से आने वाले खतरे को कुशलता से रोकने में सक्षम है। विशेषज्ञों के अनुसार, तुंगुस्का मिसाइल सिस्टम भारत-रूस स्ट्रेटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप को और मजबूती देगा।

P8I एयरक्राफ्ट के लिए 413 करोड़ रुपये की डील

इंडियन नेवी के लिए P8I लॉन्ग-रेंज मैरीटाइम रिकॉनिसेंस एयरक्राफ्ट के डिपो लेवल इंस्पेक्शन के लिए 413 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट बोइंग इंडिया डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ साइन किया गया। यह कॉन्ट्रैक्ट 100% इंडिजिनस कंटेंट के साथ 'बाय इंडियन' कैटेगरी के तहत है। इसके जरिए P8I फ्लीट का मेंटेनेंस देश में ही सुनिश्चित होगा, जो आत्मनिर्भर भारत और मेक-इन-इंडिया पहल के तहत भारत की डिफेंस क्षमताओं को मजबूत करेगा।

भारत के पास पहले से मौजूद एयर डिफेंस सिस्टम

भारत पहले से ही एस-400, बराक-8 और आकाश एयर डिफेंस सिस्टम का संचालन कर रहा है। एस-400 एक लंबी दूरी की एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली है, जबकि बराक-8 और आकाश मिसाइलें मध्यम और लंबी दूरी की सुरक्षा प्रदान करती हैं। इन प्रणालियों के साथ तुंगुस्का मिसाइल सिस्टम के शामिल होने से भारत का एयर डिफेंस नेटवर्क और प्रभावी बन जाएगा।

एस-400 सिस्टम की डिलीवरी

भारत ने 2018 में रूस के साथ एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद के लिए सौदा किया था, जिसमें कुल 5 स्क्रॉड्रन शामिल थे। इसमें से तीन स्क्रॉड्रन भारत को मिल चुके हैं, जबकि बाकी दो स्क्रॉड्रन की डिलीवरी अभी शेष है। रूस ने यह भी बताया है कि इसी साल के अंत तक बाकी दो स्क्रॉड्रन की डिलीवरी पूरी कर दी जाएगी। यह कदम भारत की लंबी दूरी की हवाई सुरक्षा को और मजबूत बनाएगा।

भारत-रूस रक्षा संबंधों में मजबूती

तुंगुस्का मिसाइल सिस्टम और एस-400 जैसी अत्याधुनिक प्रणालियों की खरीद से भारत-रूस के रक्षा संबंधों में और मजबूती आएगी। यह दोनों देशों के बीच रणनीतिक और तकनीकी सहयोग को भी बढ़ावा देगा। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे कदम भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और एयर डिफेंस क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।

एयर डिफेंस के लिए मल्टीलेयर्ड स्ट्रेटेजी

भारत का एयर डिफेंस सिस्टम अब मल्टीलेयर्ड सुरक्षा पर आधारित होगा। इसमें एस-400, बराक-8, आकाश और तुंगुस्का मिसाइल सिस्टम शामिल हैं। यह प्रणाली हवाई हमलों को रोकने, ड्रोन और क्रूज मिसाइल जैसी नई चुनौतियों का मुकाबला करने में सक्षम है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे न केवल भारतीय सीमाओं की सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि देश की कूटनीतिक ताकत भी मजबूत होगी।

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