Government of Madhya Pradesh ने भोपाल की ट्विशा शर्मा मामले की जांच को Central Bureau of Investigation को सौंपने की सिफारिश की है।मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया है कि साक्ष्य छिपाए गए और जांच को प्रभावित करने की कोशिश की गई, जिसके चलते उन्होंने CBI जांच की मांग की थी।
भोपाल: मध्य प्रदेश में सामने आए ट्विशा शर्मा दहेज मृत्यु मामले ने अब बड़ा मोड़ ले लिया है। राज्य सरकार ने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (Central Bureau of Investigation) को सौंपने की सिफारिश की है। यह कदम मृतका के परिजनों द्वारा निष्पक्ष जांच और प्रभावशाली हस्तक्षेप के आरोपों के बाद उठाया गया है।
यह मामला भोपाल के कटारा हिल्स थाना क्षेत्र का है, जहां पहले ही भारतीय न्याय संहिता, 2023 और दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया जा चुका है।
मामला क्या है?
भोपाल में दर्ज इस केस में आरोप है कि ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हुई, जिसे परिजन दहेज उत्पीड़न से जुड़ा मामला बता रहे हैं। पुलिस ने इस संबंध में एफआईआर दर्ज की है और जांच जारी थी, लेकिन अब इसे केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2), 85, 3(5) तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3 और 4 के तहत कार्रवाई की गई है।
CBI जांच की सिफारिश क्यों की गई?

राज्य सरकार की अधिसूचना के अनुसार, मामले की जांच को सीबीआई को सौंपने का निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी रहे। परिजनों ने आरोप लगाया है कि, जांच को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्यों को छिपाया गया है. प्रभावशाली लोगों की भूमिका के कारण स्थानीय जांच निष्पक्ष नहीं रह सकती।
परिजनों ने विशेष रूप से यह भी दावा किया है कि ससुराल पक्ष से जुड़े एक पूर्व जिला जज के प्रभाव के कारण जांच प्रभावित हो सकती है, जिसके चलते उन्होंने केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की थी।
कानूनी प्रक्रिया और सरकार का फैसला
राज्य सरकार ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 की धारा 6 के तहत सीबीआई को जांच की अनुमति देने की सिफारिश की है। इसके बाद केंद्रीय एजेंसी को मामले की जांच का अधिकार मिल जाएगा। सरकारी अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, CBI को पूरे राज्य में जांच का अधिकार होगा।
अपराध, षड्यंत्र और दुष्प्रेरण से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। स्थानीय पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच का भी पुनर्मूल्यांकन किया जा सकता है. यह कदम मामले को राष्ट्रीय स्तर की जांच एजेंसी के दायरे में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पोस्टमार्टम को लेकर विवाद
मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि पहले किए गए पोस्टमार्टम में कई खामियां हैं और यह रिपोर्ट पूरी तरह से संतोषजनक नहीं है। परिजनों के वकील के अनुसार, उन्होंने दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग को लेकर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का रुख किया है।
इससे पहले भोपाल की एक अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया था। परिजनों का कहना है कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र और दोबारा मेडिकल जांच जरूरी है।












