उदयपुर नगर निगम ने अक्टूबर 2026 में शहर की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल की है। इसके तहत गवरी, पारंपरिक कलाओं, हस्तशिल्प और मेवाड़ी व्यंजनों का दस्तावेजीकरण कर संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना है।
उदयपुर: राजस्थान का उदयपुर अपनी लोक संस्कृति, पारंपरिक कलाओं और खानपान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने की तैयारी कर रहा है। नगर निगम ने शहर को यूनेस्को क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क में शामिल कराने के लिए सलाहकार संस्था के चयन की प्रक्रिया शुरू की है। इस पहल के तहत गवरी लोकनाट्य, पिछवाई चित्रकला, कठपुतली, पारंपरिक हस्तशिल्प और मेवाड़ी व्यंजनों से जुड़ी जानकारियां जुटाई जाएंगी।
गवरी से पारंपरिक हस्तशिल्प तक सांस्कृतिक विरासत का सर्वे
उदयपुर नगर निगम शहर की सांस्कृतिक पहचान को व्यवस्थित रूप से दर्ज करने के लिए व्यापक सर्वे कराने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए योग्य सलाहकार संस्था के चयन हेतु निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। इस प्रक्रिया में मेवाड़ की लोक परंपराओं, कलाओं और उनसे जुड़े कलाकारों व कारीगरों की जानकारी जुटाई जाएगी।
गवरी लोकनाट्य इस पहल का प्रमुख हिस्सा होगा। इसके धार्मिक महत्व, संगीत, नृत्य, वेशभूषा और कलाकारों से संबंधित जानकारियों का दस्तावेजीकरण किया जाएगा। इसके अलावा मेवाड़ी गैर, फूलडोल, जल सांझी और शस्त्र पूजन जैसी परंपराओं के इतिहास को भी दर्ज किया जाएगा।
पिछवाई और लघु चित्रकला, मौलेला टेराकोटा, कठपुतली कला तथा पारंपरिक वस्त्र निर्माण से जुड़े कारीगरों को भी इस सर्वे में शामिल किया जाएगा। ठठेरा और सिकलीगर कला के साथ पत्तल-दोने तथा बांस की टोकरियां बनाने वाले लोगों की जानकारी जुटाने की भी योजना है।
मेवाड़ी व्यंजनों को पर्यटन से जोड़ने की तैयारी
उदयपुर की सांस्कृतिक विरासत में पारंपरिक खानपान को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया जाएगा। इसके तहत राब, मक्के की रोटी, दाल-बाटी-चूरमा, ढोकले, लपसी और मक्के के खींध जैसे स्थानीय व्यंजनों को तैयार करने की पारंपरिक विधियां दर्ज की जाएंगी।
नगर निगम की योजना इन व्यंजनों को पर्यटन से जोड़ने की है, ताकि मेवाड़ की पाक परंपराओं को व्यापक पहचान मिल सके। इससे स्थानीय खानपान से जुड़े लोगों और पारंपरिक व्यंजन तैयार करने वालों को भी अपनी कला और उत्पादों को बढ़ावा देने का अवसर मिल सकता है।
पांच साल की योजना से संस्कृति संरक्षण पर जोर
चयनित सलाहकार संस्था शहर के सांस्कृतिक संसाधनों का मानचित्रण कर पांच साल की कार्ययोजना तैयार करेगी। इसके साथ यूनेस्को के निर्धारित मानकों के अनुरूप नामांकन प्रस्ताव, नक्शे और जरूरी दस्तावेज तैयार किए जाएंगे।
नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत को केवल दस्तावेजों में दर्ज करना नहीं, बल्कि उसका संरक्षण करना और नई पीढ़ी को स्थानीय परंपराओं से जोड़ना भी है। इसके माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर भी काम किया जाएगा।
निगम अधीक्षण अभियंता मनीष अरोड़ा को नामांकन से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। महापौर पारस सिंघवी ने भी अधिकारियों को इस दिशा में प्रभावी रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
इस पहल से उदयपुर की लोक परंपराओं, हस्तशिल्प और पारंपरिक खानपान को व्यवस्थित पहचान देने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, यूनेस्को क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क में शामिल होना अभी प्रस्तावित लक्ष्य है। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया पूरी करना और संबंधित मानकों पर खरा उतरना जरूरी होगा।









