हरियाणा की निधि सिवाच ने नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी की। दो बार असफल होने और परिवार के शादी के दबाव के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। तीसरे प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 83 हासिल कर IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।
UPSC Success Story: सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि धैर्य, आत्मविश्वास और लगातार प्रयास की भी परीक्षा होती है। हरियाणा की निधि सिवाच की कहानी इसी संघर्ष का उदाहरण है। शादी के दबाव और लगातार दो असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और तीसरे प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर IAS अधिकारी बनने का सपना साकार किया।
इंजीनियरिंग से शुरू हुआ IAS बनने का सफर
हरियाणा के गुरुग्राम की रहने वाली निधि सिवाच बचपन से ही पढ़ाई में अच्छी थीं। उन्होंने दसवीं कक्षा के दौरान ही इंजीनियर बनने का लक्ष्य तय कर लिया था। 12वीं के बाद उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया। उस समय यह फैसला थोड़ा अलग माना जाता था, क्योंकि इस शाखा में लड़कियों की संख्या काफी कम थी। हालांकि, निधि ने दूसरों की राय की परवाह किए बिना अपनी पढ़ाई पूरी की और वर्ष 2015 में इंजीनियर बन गईं।

इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने हैदराबाद की एक कंपनी में करीब दो साल तक नौकरी की। इसी दौरान उनके मन में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जाने का सपना मजबूत हुआ। नौकरी के साथ UPSC की तैयारी करना मुश्किल हो रहा था, इसलिए उन्होंने बड़ा फैसला लेते हुए नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गईं।
शादी के दबाव के बीच लिया बड़ा फैसला
नौकरी छोड़ने के बाद निधि पर परिवार की ओर से शादी का दबाव बढ़ने लगा। परिवार का मानना था कि अब उन्हें करियर से ज्यादा अपनी शादी के बारे में सोचना चाहिए। हालांकि, निधि अपने सपने को अधूरा नहीं छोड़ना चाहती थीं। उन्होंने अपने पिता से एक आखिरी मौका मांगा।
परिवार ने उनके सामने शर्त रखी कि यदि वह इस प्रयास में सफल नहीं हुईं, तो उन्हें UPSC की तैयारी छोड़कर शादी करनी होगी। यह उनके लिए मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण समय था, लेकिन उन्होंने इसे कमजोरी नहीं बल्कि प्रेरणा बना लिया। उन्होंने तय कर लिया कि इस बार पूरी मेहनत के साथ परीक्षा की तैयारी करेंगी।
दो असफलताओं से सीखा, तीसरे प्रयास में मिली सफलता
निधि सिवाच इससे पहले दो बार UPSC परीक्षा में असफल हो चुकी थीं। लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने अपना आत्मविश्वास नहीं खोया। उन्होंने अपनी कमजोरियों का विश्लेषण किया, पढ़ाई की रणनीति बदली और सेल्फ स्टडी पर अधिक ध्यान दिया। बिना किसी कोचिंग के उन्होंने सिलेबस, मानक किताबों और नियमित अभ्यास के जरिए अपनी तैयारी को मजबूत किया।
उन्होंने करीब छह महीने तक पूरी तरह खुद को पढ़ाई के लिए समर्पित रखा। सीमित संसाधनों में अनुशासन और निरंतर अभ्यास के बल पर उन्होंने तीसरे प्रयास में UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2018 में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 83 हासिल की। इस सफलता के साथ उनका IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा हो गया।
युवाओं के लिए प्रेरणा है निधि सिवाच की कहानी
निधि सिवाच की सफलता यह बताती है कि कठिन परिस्थितियां और सामाजिक दबाव किसी भी बड़े लक्ष्य की राह में बाधा जरूर बन सकते हैं, लेकिन मजबूत इरादों के सामने वे टिक नहीं पाते। उन्होंने यह साबित किया कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि बेहतर तैयारी और सीखने का अवसर होती है।
आज उनकी कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो UPSC जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। उनका सफर यह संदेश देता है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदारी से की जाए और असफलताओं से सीख लेकर आगे बढ़ा जाए, तो सफलता जरूर मिलती है।










