रूस की ओर से अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की अध्यक्ष तोमोको अकाने समेत नौ अधिकारियों के प्रत्यर्पण की मांग पर जापान ने नाराजगी जताई है। टोक्यो ने इसे अनुचित बताया और ICC के समर्थन में उचित कदम उठाने की बात कही।
टोक्यो: रूस की ओर से अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) की अध्यक्ष तोमोको अकाने और आठ अन्य अधिकारियों के प्रत्यर्पण की मांग किए जाने पर जापान ने कड़ी नाराजगी जताई है। जापानी सरकार ने मॉस्को की इस पहल को अनुचित और अस्वीकार्य बताते हुए कहा है कि वह मामले पर उचित कार्रवाई के विकल्पों पर विचार करेगी। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था, रूस के साथ पश्चिमी देशों के तनाव और ICC को लेकर अमेरिका की नीति पर एक बार फिर बहस तेज कर दी है।
जापान के उप मुख्य कैबिनेट सचिव मासानाओ ओजाकी ने शुक्रवार को नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि टोक्यो पहले भी रूस को बता चुका है कि ICC से जुड़े व्यक्तियों को निशाना बनाने वाले कदम स्वीकार नहीं किए जा सकते। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद रूस ने विभिन्न देशों से इन अधिकारियों के प्रत्यर्पण की मांग की है, जो जापान के लिए खेदजनक है।
ओजाकी के मुताबिक, जापान ICC और उसके सदस्य देशों के साथ संवाद जारी रखेगा। उन्होंने संकेत दिया कि रूस के खिलाफ आगे विरोध दर्ज कराने समेत उचित कदम उठाए जा सकते हैं। यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब ICC को रूस और अमेरिका समेत कई देशों की ओर से राजनीतिक और कानूनी दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
रूस ने ICC अध्यक्ष और आठ अन्य अधिकारियों को क्यों निशाना बनाया?
तोमोको अकाने रूस की वांछित सूची में शामिल हैं। यह मामला ICC की ओर से मार्च 2023 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट से जुड़ा है। अदालत ने यूक्रेन में युद्ध के दौरान कथित युद्ध अपराधों के आरोपों के संदर्भ में यह वारंट जारी किया था।
ICC ने पुतिन के खिलाफ बच्चों के कथित गैरकानूनी निर्वासन और स्थानांतरण से जुड़े आरोपों पर वारंट जारी किया था। रूस ने इन आरोपों और अदालत की कार्रवाई का विरोध किया है। अकाने समेत ICC के कई अधिकारियों के खिलाफ मॉस्को ने कानूनी कार्रवाई की है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में रूस की एक अदालत ने इन अधिकारियों की अनुपस्थिति में सुनवाई करते हुए उन्हें जेल की सजा सुनाई थी।
अब रूसी अभियोजन पक्ष की ओर से अकाने और आठ अन्य अधिकारियों के प्रत्यर्पण की मांग इस विवाद को एक नए चरण में ले आई है। हालांकि, किसी देश की ओर से प्रत्यर्पण का अनुरोध किया जाना और संबंधित देश द्वारा उसे स्वीकार करना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। इस मामले में अंतिम निर्णय संबंधित कानूनी व्यवस्था और लागू अंतरराष्ट्रीय दायित्वों पर निर्भर करेगा।
ICC क्या है और उसकी भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की स्थापना गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों की जांच और अभियोजन के लिए की गई थी। इसके अधिकार क्षेत्र में नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध, युद्ध अपराध और आक्रामकता के अपराध जैसे मामले शामिल हैं, बशर्ते संबंधित कानूनी और क्षेत्राधिकार संबंधी शर्तें पूरी हों।
ICC राष्ट्रीय अदालतों का विकल्प बनने के बजाय उन मामलों में भूमिका निभाता है, जहां उसकी कानूनी शर्तों के तहत कार्रवाई संभव हो। अदालत की स्वतंत्रता और उसके अधिकारियों की सुरक्षा को अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
रूस की कार्रवाई से यह सवाल फिर उठता है कि क्या अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं के अधिकारियों को उनके आधिकारिक काम के कारण दंडित करने की कोशिश की जा सकती है। दूसरी ओर, रूस ICC की कार्रवाई को चुनौती देता रहा है। ऐसे मामलों में राजनीतिक विरोध और कानूनी अधिकारों के बीच अंतर समझना जरूरी है। किसी देश का विरोध अपने आप में अदालत के फैसले को रद्द नहीं करता, लेकिन वह अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर असर डाल सकता है।
अमेरिका के प्रतिबंधों ने विवाद को और जटिल बनाया
अकाने को अमेरिका की ओर से भी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन ने ICC की उन कार्रवाइयों पर आपत्ति जताई, जिन्हें वह अमेरिका और इजरायल के खिलाफ अनुचित कार्रवाई मानता है। यह विवाद गाजा संघर्ष की जांच और उससे संबंधित न्यायिक कदमों के संदर्भ में सामने आया।

अमेरिका की आलोचना और प्रतिबंधों ने ICC पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव को उजागर किया है। इससे जापान के सामने भी कूटनीतिक चुनौती पैदा हुई है। टोक्यो अमेरिका का करीबी सहयोगी है, लेकिन वह कानून के शासन और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के समर्थन की नीति भी दोहराता रहा है।
ऐसे में जापान को अपने सुरक्षा और कूटनीतिक संबंधों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के बीच संतुलन बनाना पड़ सकता है। हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस विवाद से जापान-अमेरिका संबंधों में व्यापक संकट पैदा हो गया है। फिलहाल सामने आया मतभेद ICC प्रमुख पर अमेरिकी प्रतिबंधों और रूस की प्रत्यर्पण मांग से जुड़ा है।
जापानी प्रधानमंत्री ने ट्रंप के सामने भी उठाया मुद्दा
जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने सितंबर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठक के दौरान इस मुद्दे को उठाया था। इससे पहले जापानी सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर देश में आलोचना हुई थी। शुरुआती प्रतिक्रिया में केवल खेद जताने को कुछ लोगों ने अपर्याप्त माना था।
ताकाइची ने शुक्रवार को संसद में कहा कि जापान कानून के शासन को बनाए रखने के अपने प्रयासों के तहत लगातार ICC का समर्थन करता आया है और आगे भी ऐसा करता रहेगा। उनका बयान संकेत देता है कि टोक्यो इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहता है, भले ही अमेरिका के साथ उसके करीबी संबंध बने रहें।
जापान की प्रतिक्रिया में दो पहलू दिखाई देते हैं। पहला, ICC अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर उसकी आपत्ति। दूसरा, इस मुद्दे को सीधे टकराव में बदलने के बजाय संबंधित संस्थाओं और देशों के साथ संवाद के माध्यम से आगे बढ़ने की कोशिश। ओजाकी का बयान भी इसी दिशा की ओर इशारा करता है।
प्रत्यर्पण की मांग का आगे क्या होगा?
रूस ने कथित तौर पर डच अधिकारियों से अकाने और आठ अन्य ICC अधिकारियों के प्रत्यर्पण का अनुरोध किया है। लेकिन किसी प्रत्यर्पण अनुरोध पर कार्रवाई संबंधित देश के कानून, अंतरराष्ट्रीय समझौतों और कानूनी प्रक्रियाओं के अधीन होती है। इसलिए रूसी मांग को अपने आप में प्रत्यर्पण की मंजूरी नहीं माना जा सकता।
इस मामले में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित अधिकारी और संस्थाएं किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं और क्या रूस की मांग पर कोई औपचारिक कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ती है। जापान ने फिलहाल विरोध दर्ज कराने और ICC के साथ संवाद जारी रखने की बात कही है। उसके अगले कदम इस संवाद और घटनाक्रम की प्रगति पर निर्भर कर सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था के लिए व्यापक संकेत
ICC अध्यक्ष के खिलाफ रूस की कार्रवाई और अमेरिका के प्रतिबंध इस बात को रेखांकित करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं को अपने काम के दौरान राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी परिस्थितियों में अदालतों की स्वतंत्रता, अधिकारियों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन को लेकर बहस और तेज हो सकती है।
जापान की चुनौती यह होगी कि वह अपने सहयोगियों के साथ संबंध बनाए रखते हुए कानून के शासन और ICC के समर्थन पर अपनी घोषित नीति को किस तरह आगे बढ़ाता है। फिलहाल टोक्यो ने रूस की मांग को अनुचित बताया है और आगे विरोध दर्ज कराने की संभावना जताई है। इस मामले का अगला चरण केवल जापान और रूस के संबंधों के लिए ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था की भूमिका और उसकी स्वतंत्रता को लेकर भी महत्वपूर्ण होगा।











