उत्तराखंड में लैंडस्लाइड से 2 NH समेत 124 सड़कें बंद: BRO का वैली ब्रिज नदी में गिरा, चीन बॉर्डर समेत 3 घाटियों का संपर्क टूटा; नैनीताल में बारिश

उत्तराखंड में भारी बारिश और लैंडस्लाइड से 2 NH समेत 124 सड़कें बंद हैं। चमोली में BRO का वैली ब्रिज बहने से चीन बॉर्डर समेत 3 घाटियों का संपर्क टूटा।
उत्तराखंड में लैंडस्लाइड से 2 NH समेत 124 सड़कें बंद: BRO का वैली ब्रिज नदी में गिरा, चीन बॉर्डर समेत 3 घाटियों का संपर्क टूटा; नैनीताल में बारिश
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उत्तराखंड में लगातार बारिश के बीच पहाड़ों पर लैंडस्लाइड और तेज बहाव ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राज्य में 2 नेशनल हाईवे समेत 124 सड़कें बंद होने से कई इलाकों में आवाजाही प्रभावित हुई है। पहाड़ी जिलों में जगह-जगह मलबा और बोल्डर सड़कों पर आने से यातायात रोकना पड़ा है। सबसे गंभीर स्थिति सीमांत चमोली क्षेत्र में सामने आई है, जहां तेज बहाव के कारण BRO का वैली ब्रिज बह गया। पुल के क्षतिग्रस्त होने से चीन सीमा से लगे क्षेत्र और तीन घाटियों की सड़क कनेक्टिविटी प्रभावित हुई है।

चमोली के तमक नाले में अचानक आई तेज बाढ़ के कारण मलारी-नीती मार्ग पर बना बेली ब्रिज बह गया। यह पुल जोशीमठ क्षेत्र को नीती घाटी और सीमांत इलाकों से जोड़ने वाले मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा था। पुल बहने के बाद आसपास के करीब एक दर्जन गांवों और सीमावर्ती क्षेत्र का सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। अधिकारियों की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने का काम शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है।

बारिश के कारण उत्तराखंड के दूसरे पहाड़ी जिलों में भी सड़कें प्रभावित हुई हैं। मलबा गिरने, पहाड़ दरकने और नदियों-गधेरों के जलस्तर बढ़ने से कई मार्गों पर यातायात रोकना पड़ा है। पहले भी मानसून के दौरान राज्य में बड़ी संख्या में सड़कें भूस्खलन की वजह से बंद होती रही हैं और प्रशासन तथा सड़क निर्माण एजेंसियों को मशीनें लगाकर रास्ते खोलने पड़ते हैं।

सीमांत क्षेत्रों में सड़क बंद होने का असर सामान्य यातायात से कहीं ज्यादा होता है। यहां सड़कें केवल गांवों को जोड़ने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि सीमावर्ती चौकियों, स्थानीय आबादी और सुरक्षा से जुड़े आवागमन के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में वैली ब्रिज के बहने से प्रभावित क्षेत्र में वैकल्पिक संपर्क बहाल करना प्राथमिकता बन गया है।

तमक नाले में आया तेज पानी अपने साथ मलबा और अन्य सामग्री भी लेकर आया। तेज बहाव की चपेट में आने से पुल का ढांचा टिक नहीं पाया और वह नदी में समा गया। इस घटना के बाद क्षेत्र में आवाजाही रोक दी गई है। रिपोर्टों के अनुसार पुल के बहने के दौरान BRO का एक चालक भी तेज धारा में बहकर लापता हुआ था।

पुल बहने की घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ वर्ष पहले भी तमक नाले पर बना स्थायी पुल बाढ़ की चपेट में आया था। इसके बाद आवागमन के लिए बेली ब्रिज की व्यवस्था की गई थी। अब उसी वैकल्पिक संपर्क के प्रभावित होने से नीती घाटी की कनेक्टिविटी एक बार फिर संकट में आ गई है।

उत्तराखंड के कई अन्य हिस्सों में भी लगातार बारिश के कारण पहाड़ी सड़कों पर खतरा बना हुआ है। भारी बारिश के दौरान चट्टानों और मलबे के अचानक सड़क पर आने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। कई मार्गों पर जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से मलबा हटाकर यातायात बहाल करने का काम किया जाता है, लेकिन बारिश जारी रहने पर रास्ते दोबारा बंद होने का खतरा भी बना रहता है।

नैनीताल में भी बारिश का असर देखने को मिल रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार पानी गिरने से सड़क किनारे की मिट्टी कमजोर होती है और इससे भूस्खलन की आशंका बढ़ जाती है। पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए बारिश के दौरान पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। प्रशासन की ओर से मौसम और सड़क की स्थिति देखकर ही यात्रा करने की सलाह दी जाती है।

राज्य में सड़क बंद होने का असर ग्रामीण आबादी पर भी पड़ता है। कई गांवों के लिए सड़क ही बाजार, अस्पताल, स्कूल और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंच का मुख्य साधन है। रास्ता बंद होने पर लोगों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ सकता है। मरीजों और जरूरी सामान की आवाजाही में भी परेशानी बढ़ सकती है।

मानसून के दौरान उत्तराखंड में लैंडस्लाइड एक बड़ी चुनौती रहती है। पहाड़ों की भौगोलिक स्थिति और लगातार बारिश के कारण मिट्टी तथा चट्टानों की पकड़ कमजोर हो जाती है। कहीं सड़क पर मलबा आता है तो कहीं पहाड़ी ढलान का हिस्सा टूटकर नीचे गिर जाता है। यही वजह है कि राज्य में संवेदनशील मार्गों पर लगातार निगरानी रखनी पड़ती है।

चमोली में तमक नाले की घटना ने फ्लैश फ्लड के खतरे को भी सामने ला दिया है। तेज बारिश के बाद छोटे नालों में अचानक पानी बढ़ सकता है और कुछ ही समय में उसका बहाव बेहद खतरनाक हो सकता है। इस तरह की स्थिति में पुल, सड़क और आसपास की संरचनाओं पर भारी दबाव पड़ता है।

प्रशासन और BRO की टीम प्रभावित क्षेत्र में वैकल्पिक संपर्क व्यवस्था बहाल करने में जुटी है। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए सीमांत क्षेत्र में आवागमन बहाल करने की कोशिश की जा रही है। पुल के बहने से पैदा हुई स्थिति को देखते हुए क्षेत्र में राहत और बचाव गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है।

सड़कें बंद होने का असर तीर्थयात्रियों और पर्यटकों पर भी पड़ सकता है। उत्तराखंड में मानसून के दौरान चारधाम और अन्य धार्मिक तथा पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले मार्गों पर मौसम का असर जल्दी दिखाई देता है। ऐसे में यात्रियों के लिए सड़क की स्थिति की जानकारी लेकर ही आगे बढ़ना जरूरी हो जाता है।

भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में सबसे बड़ा खतरा यह रहता है कि सड़क खुलने के बाद भी पहाड़ से दोबारा मलबा गिर सकता है। इसलिए केवल मलबा हटाकर यातायात शुरू करना पर्याप्त नहीं होता। संबंधित विभागों को पहाड़ी ढलानों और सड़क के आसपास के हिस्सों की स्थिति का भी आकलन करना पड़ता है।

सीमावर्ती इलाकों में सड़क संपर्क बहाल करना सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। नीती और मलारी जैसे इलाके चीन सीमा के करीब स्थित हैं। यहां खराब मौसम के दौरान सड़क संपर्क प्रभावित होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ सीमा क्षेत्र में तैनात एजेंसियों के आवागमन पर भी असर पड़ सकता है।

राज्य में बारिश के कारण नदियों और गधेरों का जलस्तर भी बढ़ रहा है। लोगों को नदी और नालों के किनारे जाने से बचने की सलाह दी जाती है। पहाड़ी इलाकों में पानी का बहाव अचानक तेज होने की स्थिति में कुछ ही मिनटों में हालात बदल सकते हैं।

नैनीताल और दूसरे पर्यटन क्षेत्रों में भी बारिश के दौरान पर्यटकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। पहाड़ी सड़कों पर वाहन चलाते समय भूस्खलन वाले स्थानों पर रुकना जोखिम भरा हो सकता है। सड़क बंद होने की स्थिति में प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना जरूरी है।

उत्तराखंड में मौजूदा हालात ने मानसून के दौरान सड़क और पुलों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ाई है। राज्य के कई हिस्सों में हर साल बारिश के दौरान सड़कें और पुल प्रभावित होते हैं। ऐसे में संवेदनशील स्थानों पर पहले से वैकल्पिक मार्ग और आपातकालीन संपर्क व्यवस्था तैयार रखना महत्वपूर्ण है।

फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता बंद सड़कों को चरणबद्ध तरीके से खोलना और प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क बहाल करना है। जहां भारी मलबा आया है, वहां मशीनों की मदद से रास्ता साफ किया जा रहा है। वहीं जिन इलाकों में नदी या नाले का बहाव लगातार तेज है, वहां सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।

बारिश और भूस्खलन की स्थिति को देखते हुए लोगों से अपील की जा रही है कि वे बिना जरूरी काम के संवेदनशील पहाड़ी मार्गों पर यात्रा न करें। सड़क खुलने की सूचना मिलने के बाद भी स्थानीय प्रशासन से स्थिति की पुष्टि करके ही आगे बढ़ना सुरक्षित रहेगा।

उत्तराखंड में पहाड़ी मौसम तेजी से बदलता है। कुछ घंटों की बारिश के बाद जहां सामान्य सड़कें भी प्रभावित हो सकती हैं, वहीं नालों और नदियों में अचानक बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन के अपडेट पर नजर रखना जरूरी है।

कुल मिलाकर, उत्तराखंड में भारी बारिश और भूस्खलन ने सड़क संपर्क व्यवस्था को प्रभावित किया है। 2 नेशनल हाईवे समेत 124 सड़कों के बंद होने से कई इलाकों में आवाजाही मुश्किल हुई है। चमोली के तमक नाले में तेज बाढ़ के कारण BRO का बेली ब्रिज बह गया, जिससे नीती घाटी, सीमांत क्षेत्र और आसपास के गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है। नैनीताल समेत अन्य पहाड़ी जिलों में भी बारिश जारी है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियां सड़क संपर्क बहाल करने में जुटी हैं, जबकि लोगों से संवेदनशील इलाकों में सावधानी बरतने और यात्रा से पहले सड़क की स्थिति की जानकारी लेने की अपील की जा रही है।

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