उत्तराखंड में 62% महिला श्रमिक, 13 जिलों में पुरुषों से ज्यादा रजिस्ट्रेशन, निर्माण कार्यों में बड़ी भागीदारी

उत्तराखंड में 3.33 लाख पंजीकृत श्रमिकों में 2.07 लाख महिलाएं हैं। जानें 13 जिलों में महिला श्रमिकों की भागीदारी और सरकारी सुविधाओं की जानकारी।

उत्तराखंड के 13 जिलों में श्रम विभाग के तहत 3.33 लाख से अधिक श्रमिक रजिस्टर्ड हैं। इनमें करीब 2.07 लाख महिलाएं हैं। निर्माण, सिंचाई, ग्रामीण रास्तों और जल स्रोतों से जुड़े कामों में महिलाएं अहम भूमिका निभा रही हैं।

उत्तराखंड: उत्तराखंड में श्रम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में पंजीकृत श्रमिकों में महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक है। राज्य में कुल 3,33,424 पंजीकृत श्रमिकों में 2,07,128 महिलाएं और 1,26,059 पुरुष शामिल हैं। महिला श्रमिक भवन निर्माण से लेकर नहरों की सफाई और ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों में योगदान दे रही हैं।

उत्तराखंड में महिला श्रमिकों की भागीदारी

उत्तराखंड के श्रम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में निर्माण और अन्य श्रम आधारित कार्यों में महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी है। भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (BOCW) में पंजीकृत कुल 3,33,424 श्रमिकों में 2,07,128 महिलाएं हैं। वहीं, पुरुष श्रमिकों की संख्या 1,26,059 दर्ज की गई है।

इस तरह पंजीकृत श्रमिकों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 62 प्रतिशत है। ये आंकड़े बोर्ड में रजिस्टर्ड श्रमिकों से संबंधित हैं, इसलिए इन्हें राज्य के पूरे श्रमबल का प्रतिनिधित्व नहीं माना जाना चाहिए।

महिलाएं भवन निर्माण में मजदूरी करने के साथ-साथ सिंचाई की गूल बनाने, नहरों की सफाई, ग्रामीण रास्तों और खड़ंजों के निर्माण जैसे कार्यों में भी शामिल हैं। इसके अलावा खेतों में मेड़ बनाना, जल स्रोतों की सफाई, छोटे तालाब तैयार करना और भूमि कटाव रोकने के लिए सुरक्षा दीवारों का निर्माण भी उनके काम का हिस्सा है।

देहरादून और ऊधम सिंह नगर में सबसे ज्यादा महिला श्रमिक

जिला स्तर के आंकड़ों में ऊधम सिंह नगर और देहरादून में महिला श्रमिकों की संख्या सबसे अधिक दिखाई देती है। ऊधम सिंह नगर में 44,039 महिला श्रमिक पंजीकृत हैं, जबकि पुरुष श्रमिकों की संख्या 22,671 है। देहरादून में 42,243 महिलाएं और 33,988 पुरुष श्रमिक दर्ज हैं।

नैनीताल में 20,187 महिला श्रमिकों के मुकाबले 14,469 पुरुष श्रमिक पंजीकृत हैं। पिथौरागढ़ में महिलाओं की संख्या 17,680 और पुरुषों की 14,124 है। टिहरी गढ़वाल में भी यह अंतर काफी अधिक है, जहां 15,009 महिला श्रमिकों के मुकाबले 1,984 पुरुष श्रमिक पंजीकृत हैं।

अन्य जिलों में भी महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक दर्ज की गई है। हालांकि, इन आंकड़ों पर स्थानीय रोजगार के अवसरों और श्रमिक पंजीकरण की स्थिति का असर हो सकता है।

महिला श्रमिकों को आर्थिक सहायता और स्वास्थ्य सुविधाएं

श्रम विभाग की ओर से पंजीकृत महिला श्रमिकों को कई तरह की कल्याणकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इनमें बेटी के विवाह के लिए 51 हजार रुपये की आर्थिक सहायता और प्रसूति सुविधा के तहत 6,000 रुपये की सहायता शामिल है।

इसके अलावा, विभागीय शिविरों में सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य जांच कराने जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य महिला श्रमिकों और उनके परिवारों को आर्थिक तथा स्वास्थ्य संबंधी मदद देना है।

राज्य के ये आंकड़े निर्माण और ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों में महिलाओं की भागीदारी को सामने लाते हैं। साथ ही, महिला श्रमिकों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल, उचित मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाओं की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है, ताकि वे अपने काम के साथ बेहतर जीवन स्तर हासिल कर सकें।

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