वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज छात्रों का भविष्य अनिश्चित: JKBOPEE ने नई काउंसलिंग से किया इंकार

वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज छात्रों का भविष्य अनिश्चित: JKBOPEE ने नई काउंसलिंग से किया इंकार

श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) की मान्यता रद्द होने के बाद एमबीबीएस के 50 छात्रों का भविष्य अनिश्चित हो गया है। जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ प्रोफेशनल एंट्रेंस एग्जामिनेशन (JKBOPEE) ने नई काउंसलिंग से इनकार कर दिया है। अब छात्रों को अन्य मेडिकल कॉलेजों में समायोजित करने का निर्णय केवल सरकार, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और संबंधित कॉलेजों के अधिकार क्षेत्र में है।

नई काउंसलिंग से जुड़ा विवाद: श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) में एमबीबीएस पढ़ रहे 50 छात्रों का भविष्य इस समय अनिश्चित है। जम्मू-कश्मीर में यह फैसला JKBOPEE ने लिया है, जिसने साफ कहा कि कोई नई काउंसलिंग आयोजित नहीं की जाएगी। छात्र और उनके परिवार अब सरकार, NMC और संबंधित मेडिकल कॉलेजों के समन्वय पर ही निर्भर हैं ताकि उन्हें अन्य कॉलेजों में समायोजित किया जा सके और उनकी पढ़ाई बाधित न हो।

नई काउंसलिंग पर JKBOPEE का साफ इनकार

श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) की मान्यता रद्द होने के बाद कॉलेज में एमबीबीएस पढ़ रहे 50 छात्रों का भविष्य अनिश्चित हो गया है। जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ प्रोफेशनल एंट्रेंस एग्जामिनेशन (JKBOPEE) ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी तरह की नई काउंसलिंग आयोजित नहीं करेगा। बोर्ड ने कहा कि वर्ष 2025-26 के लिए एमबीबीएस एडमिशन में कोई अतिरिक्त काउंसलिंग उसके दायरे में नहीं आती।

बीओपीईई ने बताया कि मेडिकल परामर्श समिति (MCC), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, नई दिल्ली के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है और इससे आगे कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई जा सकती। एसएमवीडीआईएमई के 50 छात्रों सहित कुल 1,410 अभ्यर्थियों का डेटा 31 दिसंबर 2025 तक अपडेट कर दिया गया था। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि अतिरिक्त सीटों का निर्माण और आवंटन केवल सरकार, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) और संबंधित मेडिकल कॉलेजों के अधिकार में है।

NMC की कार्रवाई और संकट की जड़

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के मेडिकल असेसमेंट एवं रेटिंग बोर्ड ने न्यूनतम मानकों के पालन में विफलता के कारण एसएमवीडीआईएमई की मान्यता रद्द कर दी। इसके बाद यह तय किया गया कि एडमिशन प्राप्त छात्रों को जम्मू-कश्मीर के अन्य मेडिकल कॉलेजों में अतिरिक्त सीटों के माध्यम से समायोजित किया जाएगा।

इस कदम से छात्रों और उनके परिवारों में चिंता बढ़ गई है। विशेषकर पहले बैच में शामिल 42 मुस्लिम छात्रों का भविष्य राजनीतिक विवादों और समुदाय आधारित मांगों के कारण और जटिल हो गया है। भाजपा समर्थित दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा गठित संघर्ष समिति नवंबर से जम्मू में आंदोलन कर रही है और विशेष समुदाय के छात्रों के लिए सीट आरक्षण की मांग कर रही है।

सरकार का आश्वासन और आगे की प्रक्रिया

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आश्वासन दिया है कि इन 50 छात्रों की पढ़ाई किसी भी तरह प्रभावित नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सरकार की कानूनी जिम्मेदारी है कि छात्रों को अन्य मेडिकल कॉलेजों में अतिरिक्त सीटों के माध्यम से समायोजित किया जाए, ताकि उनकी पढ़ाई उनके घरों के नजदीक हो और किसी भी बाधा से बचा जा सके।

छात्रों की चिंता को ध्यान में रखते हुए, अगला कदम सरकार, NMC और संबंधित कॉलेजों के समन्वय के माध्यम से अतिरिक्त सीटों का निर्माण और छात्रों का पुनः आवंटन होगा। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि एमबीबीएस की पढ़ाई में किसी भी छात्र का नुकसान न हो और उनकी भविष्य की योजना प्रभावित न हो।

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