वैश्विक न्यायपालिका के लिए ऐतिहासिक क्षण: छह देशों के शीर्ष न्यायाधीशों ने देखा भारतीय सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही

वैश्विक न्यायपालिका के लिए ऐतिहासिक क्षण: छह देशों के शीर्ष न्यायाधीशों ने देखा भारतीय सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को ऐतिहासिक पल देखने को मिला, जब पहली बार छह देशों के मुख्य न्यायाधीश और वरिष्ठ न्यायाधीश भारत की सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही को देखने के लिए एक साथ बैठे।

नई दिल्ली: भारत की सर्वोच्च अदालत में बुधवार को एक ऐतिहासिक पल देखने को मिला जब छह देशों के मुख्य न्यायाधीश और वरिष्ठ न्यायाधीश पहली बार सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में शामिल हुए। इस विशेष अवसर ने भारतीय न्यायपालिका को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया और इसे 'ग्लोबल बेंच' का रूप दे दिया।इस मौके पर भारत के चीफ जस्टिस यूयू सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची कोर्ट की बेंच में मौजूद थे। 

विदेश से आए न्यायाधीशों ने कार्यवाही में भाग नहीं लिया, लेकिन उनकी उपस्थिति ने भारतीय अदालत की वैश्विक पहचान को मजबूती प्रदान की। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में केन्या, भूटान, मॉरीशस, श्रीलंका, मलेशिया और नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय के शीर्ष न्यायाधीश उपस्थित थे।

विदेशी न्यायाधीशों की सहभागिता और उनके विचार

भूटान के मुख्य न्यायाधीश ल्योंपो नोरबू त्शेरिंग ने बताया कि भारतीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा विकसित 'बेसिक स्ट्रक्चर डॉक्ट्रिन' उनके लिए मार्गदर्शक सिद्धांत बन चुका है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी भी इतने बड़े पैमाने पर वकीलों को एक साथ कोर्टरूम में नहीं देखा। केन्या की मुख्य न्यायाधीश मार्था के. कूमे ने भारत के संवैधानिक व्याख्याओं और न्यायिक दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि उनके देश का सुप्रीम कोर्ट भारतीय न्यायशास्त्र से प्रेरणा लेता है।

श्रीलंका के मुख्य न्यायाधीश ने ऐतिहासिक संदर्भ साझा करते हुए बताया कि मद्रास में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना 1800 में हुई थी, जबकि श्रीलंका का सर्वोच्च न्यायालय 1801 में बना। तब से दोनों देशों की कानूनी प्रणालियाँ समान आधार पर काम कर रही हैं। नेपाल की वरिष्ठ न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ला ने इस 'ग्लोबल बेंच' का हिस्सा बनने पर गर्व व्यक्त किया। मलेशिया की जस्टिस तनु श्री दत्ता नलिनी पथमनाथन ने भी बताया कि उनके देश का सर्वोच्च न्यायालय भारतीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा विकसित सिद्धांतों और फैसलों का अनुसरण करता है।

सुनवाई और मुख्य मुद्दे

इस ऐतिहासिक कार्यवाही के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक प्रोफेसर पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोप से जुड़े जमानत मामले और आंध्र प्रदेश शराब घोटाले जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सुनवाई की। इस मौके पर भारत सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सभी विदेशी न्यायाधीशों का स्वागत किया। वहीं वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और राकेश द्विवेदी ने वकीलों की ओर से उनका अभिनंदन किया।

कार्यवाही के बाद सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इतने सारे कानूनी दिग्गजों का एक साथ सुप्रीम कोर्ट में बैठना एक ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि भारत की न्यायपालिका ने हमेशा न्याय के वैश्विक मानकों को अपनाया है और यह अनुभव विदेशी न्यायाधीशों के लिए भी प्रेरणादायक है।

 

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