वंदे मातरम् पर कर्नाटक में सियासी घमासान, कांग्रेस ने दो अंतरों के फैसले का किया समर्थन

कर्नाटक: वंदे मातरम् के दो अंतरे गाने के CWC फैसले पर कर्नाटक में कांग्रेस और BJP आमने-सामने हैं। कांग्रेस ने फैसले का समर्थन किया, जबकि BJP ने आलोचना की।

कर्नाटक में वंदे मातरम् के गायन को लेकर कांग्रेस और BJP आमने-सामने हैं। कांग्रेस ने CWC के केवल दो अंतरे गाने के फैसले का समर्थन किया है, जबकि BJP ने इसे राष्ट्रीय और सांस्कृतिक विरासत के प्रति अनादर बताते हुए कांग्रेस की आलोचना की।

बेंगलुरु: कर्नाटक में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के वंदे मातरम् की केवल पहली दो पंक्तियों या अंतरों को गाने के फैसले का कर्नाटक कांग्रेस ने समर्थन किया है। वहीं BJP ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे देश की सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास के प्रति अनादर बताया है।

विवाद उस समय सामने आया जब CWC के फैसले के बाद कर्नाटक कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि पार्टी वंदे मातरम् के पहले दो अंतरे ही गाएगी। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस फैसले को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए, जबकि BJP का आरोप है कि कांग्रेस राष्ट्रवादी प्रतीकों को लेकर दोहरा रवैया अपना रही है।

कर्नाटक कांग्रेस ने CWC के फैसले का किया समर्थन

कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में CWC के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आगे भी वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे ही गाएगी।

हरिप्रसाद ने BJP पर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस का रुख स्पष्ट है और पार्टी अपने फैसले से पीछे नहीं हटेगी।

कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष ने BJP नेताओं पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि वे देशभक्ति को लेकर इतने गंभीर हैं तो उन्हें राष्ट्रीय गान को RSS की शाखाओं में भी गाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में बयानबाजी और तेज हो गई।

हरिप्रसाद बोले- हम फैसले से पीछे नहीं हटेंगे

हरिप्रसाद ने अपने बयान में कांग्रेस के रुख को आक्रामक तरीके से सामने रखा। उन्होंने कहा कि पार्टी केवल दो अंतरे गाएगी और इसके लिए किसी भी तरह के दबाव से पीछे नहीं हटेगी।

कांग्रेस नेता ने BJP पर राष्ट्रवाद के मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के इस रुख को किसी तरह के तुष्टीकरण से जोड़ना उचित नहीं है।

उनके अनुसार, वंदे मातरम् के मूल स्वरूप और उसके ऐतिहासिक संदर्भ को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा वंदे मातरम् की रचना 1875 में की गई थी और उस समय इसमें दो अंतरे थे।

BJP ने कांग्रेस पर साधा निशाना

कांग्रेस के बयान के बाद BJP नेताओं ने पार्टी पर निशाना साधा। BJP का कहना है कि वंदे मातरम् भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ा हुआ गीत है और इसका ऐतिहासिक महत्व केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

BJP नेताओं ने कांग्रेस के फैसले पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पार्टी देश की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय विरासत से जुड़े प्रतीकों को राजनीतिक सुविधा के अनुसार देख रही है।

BJP का तर्क है कि वंदे मातरम् ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसलिए गीत के स्वरूप और उसके सम्मान को लेकर किसी भी तरह की राजनीतिक बयानबाजी संवेदनशील विषय बन जाती है।

वंदे मातरम् का ऐतिहासिक महत्व

वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह गीत बाद में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख प्रतीकों में शामिल हुआ। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इसका इस्तेमाल लोगों में राष्ट्रीय भावना और एकजुटता पैदा करने के लिए किया गया।

गीत का उल्लेख बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास आनंदमठ में भी मिलता है। समय के साथ वंदे मातरम् भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रतीक बन गया।

स्वतंत्र भारत में वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्राप्त है, जबकि जन गण मन को राष्ट्रगान का दर्जा दिया गया है। दोनों की अपनी अलग संवैधानिक और ऐतिहासिक भूमिका है।

दो अंतरे गाने का मुद्दा क्यों बना विवाद?

कांग्रेस का कहना है कि पहले दो अंतरों को गाने का निर्णय ऐतिहासिक संदर्भ से जुड़ा है। पार्टी नेताओं के अनुसार, मूल रचना और उसके शुरुआती हिस्से को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।

दूसरी ओर, BJP इस फैसले को व्यापक राष्ट्रवादी दृष्टिकोण से देख रही है। BJP नेताओं का मानना है कि वंदे मातरम् के साथ देश की स्वतंत्रता की लड़ाई और राष्ट्रीय चेतना का इतिहास जुड़ा है। इसलिए इसके गायन को लेकर किसी तरह का सीमित दृष्टिकोण उचित नहीं है।

यही मतभेद अब कर्नाटक की राजनीति में एक नए विवाद का रूप ले चुका है।

राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक विरासत पर फिर बहस

वंदे मातरम् को लेकर यह विवाद केवल गीत के कितने अंतरे गाए जाएं, तक सीमित नहीं है। इसके साथ राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता आंदोलन की स्मृतियों को लेकर भी राजनीतिक बहस जुड़ गई है।

कर्नाटक में कांग्रेस और BJP के बीच पहले से कई मुद्दों पर राजनीतिक टकराव जारी है। ऐसे में वंदे मातरम् का मुद्दा भी दोनों दलों के बीच वैचारिक मतभेद को सामने लाने वाला विषय बन गया है।

कांग्रेस जहां इसे ऐतिहासिक संदर्भ और अपने राजनीतिक निर्णय से जोड़ रही है, वहीं BJP इसे राष्ट्रीय सम्मान और सांस्कृतिक विरासत के सवाल के रूप में पेश कर रही है।

विवाद आगे और बढ़ने के आसार

फिलहाल दोनों प्रमुख दल अपने-अपने रुख पर कायम दिखाई दे रहे हैं। कर्नाटक कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह CWC के फैसले के मुताबिक वंदे मातरम् के दो अंतरे ही गाएगी। BJP इस फैसले को लेकर लगातार कांग्रेस पर सवाल उठा रही है।

इस विवाद का असर राज्य की राजनीति से बाहर भी देखने को मिल सकता है, क्योंकि वंदे मातरम् राष्ट्रीय आंदोलन और भारतीय पहचान से जुड़ा संवेदनशील विषय है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के नेता इस मुद्दे पर और बयान दे सकते हैं।

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