अयोध्या: राम मंदिर निर्माण से जुड़े अहम फैसलों को लेकर ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय ने बड़ा खुलासा किया है। उनके मुताबिक अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए L&T को चुनने में नृपेंद्र मिश्रा की महत्वपूर्ण भूमिका थी। मिश्रा राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष रहे हैं। मंदिर निर्माण के शुरुआती दौर में L&T के इंजीनियरों के साथ उनकी बैठकें और साइट विजिट भी हुई थीं।
चंपत राय ने मंदिर निर्माण से जुड़े लोगों और संस्थाओं के चयन की प्रक्रिया पर भी बात की। उनके बयान के मुताबिक निर्माण कार्य को केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि अलग-अलग तकनीकी और निर्माण संबंधी जिम्मेदारियों के लिए विशेषज्ञ संस्थाओं और कंपनियों को जोड़ा गया। इनमें L&T के साथ टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स और दूसरी विशेषज्ञ एजेंसियां भी शामिल रहीं। 2021 की एक CSIR प्रस्तुति में भी राम मंदिर निर्माण से जुड़ी समीक्षा बैठक में नृपेंद्र मिश्रा, चंपत राय और L&T तथा Tata Consulting Engineers के अधिकारियों की मौजूदगी दर्ज है।
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष के तौर पर नृपेंद्र मिश्रा की जिम्मेदारी काफी महत्वपूर्ण थी। फरवरी 2020 में उन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मंदिर निर्माण समिति का प्रमुख बनाया गया था। उसी समय चंपत राय को ट्रस्ट का महासचिव चुना गया था।
निर्माण शुरू होने के समय ही L&T का नाम प्रमुखता से सामने आया था। मार्च 2020 की रिपोर्ट में चंपत राय ने कहा था कि L&T के पास इतने बड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए जरूरी अनुभव और क्षमता है। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने मंदिर निर्माण को बिना लाभ के आधार पर करने की इच्छा भी जताई थी। इसी दौरान L&T के एक वरिष्ठ इंजीनियर ने नृपेंद्र मिश्रा के साथ अयोध्या का दौरा किया था।
मंदिर निर्माण की तकनीकी चुनौती भी सामान्य परियोजनाओं से काफी अलग थी। अयोध्या में मंदिर की नींव और जमीन की मजबूती को लेकर विशेषज्ञ संस्थाओं से राय ली गई। जमीन के नीचे मिले मलबे और मिट्टी की स्थिति को देखते हुए CSIR-NGRI, CBRI, IIT और दूसरी विशेषज्ञ संस्थाओं को तकनीकी अध्ययन में शामिल किया गया।
चंपत राय के ताजा बयान में नोएडा की एक फर्म को निर्माण से जोड़ने की बात भी सामने आई है। उनके अनुसार निर्माण प्रक्रिया में अपनी पसंद के लोगों और विशेषज्ञों को जिम्मेदारी देने की व्यवस्था भी रही। हालांकि किसी व्यक्ति या कंपनी को लेकर लगाए गए किसी भी आरोप या पक्षपात के दावे को तथ्य मानने से पहले संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष देखना जरूरी है।
राम मंदिर निर्माण में कई एजेंसियों और विशेषज्ञों की भूमिका रही। L&T ने मुख्य निर्माण कार्य में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली, जबकि डिजाइन, इंजीनियरिंग, मिट्टी की जांच, संरचनात्मक स्थिरता और अन्य तकनीकी विषयों पर अलग-अलग विशेषज्ञ संस्थाओं से सलाह ली गई।
नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका केवल कंपनी चुनने तक सीमित नहीं थी। उन्होंने निर्माण की प्रगति, नींव की तकनीक और मंदिर को लंबे समय तक सुरक्षित रखने से जुड़े विषयों पर लगातार समीक्षा की। 2020 में निर्माण स्थल के दौरे के दौरान उन्होंने चंपत राय से मंदिर की नींव, प्लिंथ, छत और निर्माण की प्रगति को लेकर जानकारी ली थी।
मंदिर की नींव को लेकर भी काफी सावधानी बरती गई। विशेषज्ञों की कोशिश थी कि मंदिर की संरचना लंबे समय तक स्थिर और सुरक्षित रहे। निर्माण समिति से जुड़े अधिकारियों ने उस समय यह भी बताया था कि मंदिर की संरचनात्मक मजबूती को लेकर विशेषज्ञ लगातार काम कर रहे हैं।
इस पूरे प्रोजेक्ट में धार्मिक भावनाओं के साथ इंजीनियरिंग की जटिलता भी जुड़ी हुई थी। मंदिर का निर्माण पारंपरिक वास्तु और धार्मिक अपेक्षाओं के अनुरूप करने के साथ आधुनिक इंजीनियरिंग मानकों के आधार पर किया गया। नृपेंद्र मिश्रा ने बाद के इंटरव्यू में भी मंदिर निर्माण के दौरान सामने आई तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताया है।
चंपत राय लंबे समय तक मंदिर निर्माण की प्रगति से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करते रहे। वह निर्माण स्थल का निरीक्षण करते थे और इंजीनियरों तथा परियोजना से जुड़े अधिकारियों के साथ समन्वय में रहते थे। उनके बयान और हालिया चर्चा से एक बार फिर यह सवाल सामने आया है कि मंदिर निर्माण के शुरुआती चरण में कौन-कौन से फैसले किस स्तर पर लिए गए थे।
गौरतलब है कि राम मंदिर निर्माण का मुख्य काम अब लगभग पूरा हो चुका है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर परिसर के मुख्य निर्माण कार्य के साथ अब संग्रहालय और परिसर से जुड़े अन्य कामों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
ऐसे समय में चंपत राय का निर्माण प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर खुलकर बोलना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर L&T जैसी बड़ी निर्माण कंपनी के चयन और अलग-अलग विशेषज्ञों को परियोजना में शामिल किए जाने की प्रक्रिया को लेकर उनके बयान से मंदिर निर्माण के पीछे की प्रशासनिक व्यवस्था की जानकारी सामने आती है।
हालांकि, “अपने पसंदीदा लोगों को निर्माण से जोड़ा” जैसी बात को चंपत राय के बयान के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए। किसी कंपनी या व्यक्ति को अनुचित लाभ देने का निष्कर्ष तभी निकाला जा सकता है जब उसके समर्थन में दस्तावेजी या आधिकारिक प्रमाण उपलब्ध हों। उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड में L&T और विभिन्न तकनीकी संस्थाओं की परियोजना में भागीदारी की पुष्टि जरूर होती है।
राम मंदिर निर्माण की पूरी प्रक्रिया में ट्रस्ट, निर्माण समिति, इंजीनियरिंग कंपनियों और वैज्ञानिक संस्थाओं के बीच समन्वय रहा। नृपेंद्र मिश्रा निर्माण समिति के अध्यक्ष और चंपत राय ट्रस्ट के महासचिव के तौर पर इस पूरी प्रक्रिया के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे।










