अनिल अग्रवाल की वेदांता लिमिटेड ने डीमर्जर के बाद खुदरा निवेशकों के बीच अपनी पकड़ और मजबूत की है। जून 2026 को समाप्त तिमाही के दौरान कंपनी रिटेल निवेशकों की पसंदीदा कंपनियों में शीर्ष पर रही।
बिजनेस न्यूज़: अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाली वेदांता लिमिटेड ने डीमर्जर के बाद निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। जून 2026 में समाप्त पहली तिमाही में कंपनी के खुदरा शेयरधारकों की संख्या में करीब 4.9 लाख का इजाफा हुआ। इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की हिस्सेदारी भी बढ़ी है।
निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी ऐसे समय में सामने आई है जब कंपनी अपने कारोबार को अलग-अलग इकाइयों में बांटने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। बाजार में वेदांता के आकर्षण के पीछे अपेक्षाकृत कम वैल्यूएशन, मजबूत डिविडेंड यील्ड, बेहतर परिचालन प्रदर्शन और कर्ज में कमी जैसे कई कारण बताए जा रहे हैं।
वेदांता में जुड़े 4.9 लाख नए रिटेल निवेशक
कैपिटल मार्केट डेटा के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी Q1 FY27 में वेदांता के शेयरधारकों की संख्या में लगभग 4.9 लाख की वृद्धि हुई। ट्रैक की गई कंपनियों में यह सबसे बड़ी तिमाही वृद्धि बताई गई है।
इस मामले में वेदांता ने विप्रो, बजाज ऑटो, HDFC Bank और Reliance Industries जैसी बड़ी कंपनियों को पीछे छोड़ा। हालांकि इन कंपनियों में भी खुदरा निवेशकों की संख्या बढ़ी, लेकिन वेदांता में दर्ज वृद्धि तुलनात्मक रूप से अधिक रही। इसके विपरीत कुछ प्रमुख कंपनियों में रिटेल शेयरधारकों की संख्या घटी। इनमें टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, यस बैंक, सुजलॉन एनर्जी, अडानी ग्रीन एनर्जी और BHEL जैसी कंपनियां शामिल हैं।
FII की हिस्सेदारी भी बढ़ी
वेदांता के प्रति केवल घरेलू खुदरा निवेशकों का रुझान ही मजबूत नहीं हुआ है। कंपनी में विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी भी बढ़ी है। 31 मार्च 2026 को वेदांता में FII हिस्सेदारी 13.93% थी, जो 30 जून 2026 तक बढ़कर 15.77% हो गई। यह करीब 1.84 प्रतिशत अंक की वृद्धि है। इस बदलाव को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसी अवधि में भारतीय इक्विटी बाजार में विदेशी निवेशकों का रुझान अपेक्षाकृत कमजोर रहा।
ऐसे माहौल में वेदांता में FII हिस्सेदारी बढ़ना कंपनी के कारोबार, भविष्य की कमाई और डीमर्जर के बाद की रणनीति पर संस्थागत निवेशकों के भरोसे का संकेत माना जा सकता है।
कम वैल्यूएशन और ऊंची डिविडेंड यील्ड

वेदांता का आकर्षण केवल बढ़ते शेयरधारक आधार तक सीमित नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कंपनी का P/E अनुपात करीब 5.9 रहा, जबकि डिविडेंड यील्ड लगभग 13% बताई गई है। कम वैल्यूएशन और अपेक्षाकृत ऊंची डिविडेंड यील्ड का संयोजन उन निवेशकों को आकर्षित कर सकता है जो वैल्यू और नियमित आय दोनों पर ध्यान देते हैं। हालांकि, केवल वैल्यूएशन या डिविडेंड के आधार पर किसी शेयर में निवेश का निर्णय लेना पर्याप्त नहीं होता।
वेदांता ने जून तिमाही में परिचालन स्तर पर भी मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया। कंपनी का निरंतर परिचालन से लाभ सालाना आधार पर 152% बढ़कर 5,294 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं EBITDA करीब 98% बढ़कर 8,469 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी ने तिमाही के दौरान अपने शुद्ध कर्ज में भी 2,200 करोड़ रुपये से अधिक की कमी की। कर्ज घटने से कंपनी की वित्तीय स्थिति और बैलेंस शीट को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
रेटिंग एजेंसियों की ओर से भी कंपनी को सकारात्मक संकेत मिले हैं। CRISIL और ICRA ने वेदांता को AA+/Stable रेटिंग दी है, जिसे कंपनी के लिए लंबे समय में बेहतर क्रेडिट प्रोफाइल का संकेत माना जा रहा है।
डीमर्जर के बाद कारोबार पर फोकस
वेदांता समूह ने अपने अलग-अलग कारोबार को स्वतंत्र इकाइयों के रूप में विकसित करने की रणनीति अपनाई है। डीमर्जर के बाद सूचीबद्ध हुई कंपनियों के संयुक्त बाजार पूंजीकरण में भी पहली तिमाही के दौरान 71,000 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि बताई गई है। समूह का मानना है कि अलग-अलग कारोबार को स्वतंत्र कंपनियों के रूप में संचालित करने से प्रत्येक व्यवसाय पर अधिक स्पष्ट रणनीतिक फोकस बनाया जा सकता है। इससे निवेशकों को भी अलग-अलग कारोबार की वैल्यू को समझने में आसानी हो सकती है।
वेदांता समूह की प्रमुख कंपनी Hindustan Zinc ने भी जून तिमाही में अच्छा प्रदर्शन किया। मजबूत चांदी की कीमतों, बेहतर परिचालन दक्षता और लागत नियंत्रण से कंपनी को फायदा मिला। Hindustan Zinc ने तिमाही के दौरान 11 रुपये प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड की घोषणा भी की। इससे वेदांता समूह की कैश रिटर्न और डिविडेंड-केंद्रित रणनीति को और बल मिला।











