V. D. Satheesan का सियासी सफर कोच्चि के तेवरा की संकरी गलियों से शुरू होकर अब केरल की राजनीति के शीर्ष तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। कॉलेज के दिनों में चुनावी रणनीतियां बनाने से लेकर राज्य की सत्ता के केंद्र तक पहुंचने की उनकी यात्रा को उनके करीबी लोग लंबे समय से तय मानते रहे हैं।
तिरुवनंतपुरम: दक्षिण भारतीय राज्य केरल की राजनीति में आज एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता V. D. Satheesan मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले सतीशन आज राज्य के सर्वोच्च राजनीतिक पद तक पहुंच चुके हैं। उनकी कहानी संघर्ष, नेतृत्व क्षमता और जमीनी राजनीति की एक ऐसी मिसाल है, जिसने उन्हें केरल की राजनीति का अहम चेहरा बना दिया।
कॉलेज राजनीति से शुरू हुआ सफर
वी डी सतीशन का राजनीतिक जीवन कोच्चि के तेवरा स्थित Sacred Heart College Thevara से शुरू हुआ। 1980 के दशक में यह कॉलेज छात्र राजनीति का बड़ा केंद्र माना जाता था। यहीं से सतीशन ने चुनावी रणनीति, संगठन कौशल और नेतृत्व के गुण सीखे। उनके करीबी दोस्तों के अनुसार, कॉलेज के दिनों से ही यह साफ दिखाई देने लगा था कि सतीशन में नेतृत्व की असाधारण क्षमता है। छात्र संघ चुनावों में उनकी रणनीतिक सोच और लोगों को साथ लेकर चलने की कला उन्हें अन्य छात्रों से अलग बनाती थी।
सतीशन के करीबी मित्र रंजीत तंबी, जो पिछले चार दशकों से उनके साथ जुड़े हुए हैं, बताते हैं कि कॉलेज के दिनों में ही उनकी राजनीतिक समझ और संवाद क्षमता बेहद प्रभावशाली थी। यही गुण आगे चलकर उन्हें राज्य की राजनीति में मजबूत पहचान दिलाने में मददगार बने।
छात्र नेता से विधायक बनने तक
स्कूल स्तर पर कक्षा प्रतिनिधि बनने से लेकर महात्मा गांधी विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष पद तक, सतीशन ने लगातार छात्र राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाई। इसके बाद उन्होंने 1990 के दशक में सक्रिय चुनावी राजनीति में कदम रखा। हालांकि उनका शुरुआती राजनीतिक सफर आसान नहीं था। वर्ष 1996 में उन्होंने अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार का सामना करना पड़ा।
इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। 2001 में उन्होंने जोरदार वापसी की और पारवूर विधानसभा सीट से जीत हासिल की। तब से यह सीट उनका मजबूत राजनीतिक गढ़ मानी जाती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सतीशन की सबसे बड़ी ताकत उनकी जमीनी पकड़ और जनता के बीच लगातार सक्रिय रहना रहा है।

मध्यमवर्गीय परिवार से मुख्यमंत्री पद तक
वी डी सतीशन किसी राजनीतिक परिवार से नहीं आते। उनका जन्म एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। बावजूद इसके, उनके परिवार ने हमेशा उन्हें राजनीति में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। राजनीति में सक्रिय होने के साथ-साथ सतीशन ने Kerala High Court में वकालत भी की। उनके परिवार को उम्मीद थी कि वे कांग्रेस संगठन में बड़ी जिम्मेदारी निभाएंगे, लेकिन शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि एक दिन वे मुख्यमंत्री पद तक पहुंचेंगे।
उनके भाई-बहन आज भी कोच्चि के नेटूर इलाके में सामान्य जीवन जीते हैं और राजनीतिक चमक-दमक से दूर रहते हैं। परिवार और दोस्तों के मुताबिक, सतीशन आज भी अपने मूल्यों और पारिवारिक जुड़ाव को सबसे ऊपर रखते हैं।
प्रभावशाली वक्ता और कुशल रणनीतिकार
सतीशन को एक कुशल वक्ता, तेज-तर्रार वाद-विवादकर्ता और गंभीर पाठक के रूप में जाना जाता है। कॉलेज के शिक्षकों के अनुसार, छात्र राजनीति में व्यस्त रहने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। तेवरा कॉलेज के पूर्व शिक्षकों का कहना है कि सतीशन उन चुनिंदा छात्र नेताओं में से थे, जो उथल-पुथल भरे राजनीतिक माहौल में भी संतुलन बनाए रखते थे। यही संतुलन आज उनकी राजनीतिक शैली में भी दिखाई देता है।
राजनीतिक जीवन की व्यस्तताओं के बावजूद सतीशन अपने व्यक्तिगत रिश्तों को बेहद अहमियत देते हैं। उनके करीबी मित्रों के अनुसार, वे अपने माता-पिता से गहराई से जुड़े रहे हैं और परिवार का जिक्र करते समय अक्सर भावुक हो जाते हैं। उनका पैतृक घर आज भले ही अलग-अलग हिस्सों में बंट चुका हो, लेकिन सतीशन का जुड़ाव अब भी अपने गांव, कॉलेज और पुराने दोस्तों से बना हुआ है। उनके करीबी मानते हैं कि मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उनके व्यक्तित्व का एक बड़ा हिस्सा उसी साधारण दुनिया में रहेगा, जहां उन्होंने राजनीति के शुरुआती सबक सीखे थे।











