दिग्गज फिल्म निर्देशक सिंगीतम श्रीनिवास राव का 3 अक्टूबर को चेन्नई में 94 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उम्र संबंधी स्वास्थ्य जटिलताओं के बीच उनका इलाज चल रहा था। कमल हासन, एस.एस. राजामौली, जूनियर एनटीआर और महेश बाबू ने शोक जताया।
बॉलीवुड: भारतीय सिनेमा के दिग्गज फिल्म निर्देशक सिंगीतम श्रीनिवास राव का 3 अक्टूबर को चेन्नई में निधन हो गया। वह 94 वर्ष के थे। उम्र संबंधी स्वास्थ्य जटिलताओं के चलते उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन की खबर के बाद तमिल और तेलुगु फिल्म उद्योग में शोक की लहर है। सिंगीतम श्रीनिवास राव को भारतीय सिनेमा में प्रयोगधर्मी और सीमाओं को आगे बढ़ाने वाले फिल्मकार के रूप में याद किया जा रहा है। अपने लंबे करियर में उन्होंने ऐसी फिल्मों का निर्माण किया, जिन्होंने कहानी कहने और फिल्म निर्माण के अलग-अलग तरीकों को नई पहचान दी।
उनकी चर्चित फिल्मों में पुष्पक विमान, माइकल मदना काम राजन, आदित्य 369, मयूरी और अपूर्व सहोदरंगल जैसी फिल्में शामिल हैं। उनके काम ने अलग-अलग विषयों और शैलियों के साथ प्रयोग करने की उनकी क्षमता को सामने रखा।
भारतीय सिनेमा में प्रयोगों के लिए याद किए जाएंगे
सिंगीतम श्रीनिवास राव का फिल्मी सफर लंबे समय तक सक्रिय रहा। उनकी फिल्मों को भारतीय सिनेमा में नए विचारों और अलग तरह की कहानी कहने की कोशिशों के लिए जाना जाता है।
उन्होंने पारंपरिक फिल्म निर्माण की सीमाओं से आगे जाकर अलग-अलग विषयों और शैलियों पर काम किया। यही वजह है कि उनके निधन के बाद उन्हें केवल एक निर्देशक के रूप में नहीं, बल्कि सिनेमा में नए प्रयोगों को बढ़ावा देने वाले फिल्मकार के रूप में याद किया जा रहा है।
उनकी फिल्मों की सूची में अलग-अलग तरह के विषय दिखाई देते हैं। पुष्पक विमान को उनकी चर्चित फिल्मों में गिना जाता है, जबकि माइकल मदना काम राजन ने हास्य और मनोरंजन की अलग शैली को सामने रखा।
‘पुष्पक विमान’ और ‘माइकल मदना काम राजन’ की विरासत
सिंगीतम श्रीनिवास राव की प्रमुख फिल्मों में पुष्पक विमान का विशेष स्थान रहा है। यह फिल्म उनके प्रयोगधर्मी दृष्टिकोण की पहचान मानी जाती है।
इसी तरह माइकल मदना काम राजन भी उनके उल्लेखनीय कामों में शामिल रही। इन फिल्मों के जरिए उन्होंने दर्शकों के सामने कहानी और मनोरंजन का अलग अनुभव पेश किया।
उनकी फिल्मों की विविधता उनके लंबे करियर की एक बड़ी विशेषता रही। उन्होंने अलग-अलग तरह की कहानियों और फिल्मी शैलियों के साथ काम किया और लगातार नए प्रयोग करने की कोशिश की।
‘आदित्य 369’ से विज्ञान-कथा तक प्रयोग
सिंगीतम श्रीनिवास राव की आदित्य 369 भी उनकी प्रमुख फिल्मों में शामिल है। इस फिल्म ने उन्हें प्रयोग करने वाले फिल्मकार के रूप में पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके करियर की खासियत यह रही कि उन्होंने एक ही तरह की फिल्मों तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने अलग-अलग शैलियों में काम किया और दर्शकों को नए विषयों और प्रस्तुति के तरीके से परिचित कराया।
उनके काम में प्रयोग की यह प्रवृत्ति उनके करियर के लंबे दौर तक दिखाई देती रही। यही कारण है कि भारतीय फिल्म उद्योग में उनकी पहचान एक ऐसे निर्देशक की बनी, जो नए विचारों को पर्दे पर उतारने से पीछे नहीं हटे।
‘मयूरी’ और ‘अपूर्व सहोदरंगल’ भी रहीं चर्चित
सिंगीतम श्रीनिवास राव की चर्चित फिल्मों में मयूरी और अपूर्व सहोदरंगल भी शामिल हैं। इन फिल्मों ने उनके व्यापक फिल्मी योगदान को और मजबूत किया।
उनकी फिल्मोग्राफी में अलग-अलग तरह की कहानियों का होना इस बात को दर्शाता है कि वह किसी एक शैली या फॉर्मूले तक सीमित रहने वाले फिल्मकार नहीं थे।
यही प्रयोगधर्मिता उनके काम की पहचान बनी। उनके निधन के बाद फिल्म जगत के कई बड़े नाम उन्हें भारतीय सिनेमा में उनके असाधारण योगदान के लिए याद कर रहे हैं।
कमल हासन और अन्य सितारों ने जताया शोक
सिंगीतम श्रीनिवास राव के निधन के बाद भारतीय सिनेमा की कई प्रमुख हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। कमल हासन, एस.एस. राजामौली, जूनियर एनटीआर और महेश बाबू समेत कई बड़े नामों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।
उनकी श्रद्धांजलियों में सिंगीतम श्रीनिवास राव के लंबे फिल्मी योगदान और सिनेमा में उनके प्रयोगों को याद किया गया। तमिल और तेलुगु फिल्म उद्योग से भी उनके निधन पर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
उनके निधन पर व्यक्त की गई संवेदनाएं इस बात को रेखांकित करती हैं कि उनका प्रभाव एक क्षेत्र या एक भाषा के सिनेमा तक सीमित नहीं था। उनके काम ने भारतीय फिल्म उद्योग के अलग-अलग हिस्सों में अपनी पहचान बनाई।

90 की उम्र के बाद भी सिनेमा से जुड़ा रहा प्रयोग
सिंगीतम श्रीनिवास राव को ऐसे फिल्मकार के रूप में भी याद किया जा रहा है, जिन्होंने उम्र के इस पड़ाव पर भी सिनेमा के साथ प्रयोग करने की अपनी सोच को बनाए रखा।
स्रोत के अनुसार, वह 90 वर्ष की उम्र पार करने के बाद भी सिनेमा में प्रयोग करते रहे। उनका यह रचनात्मक दृष्टिकोण उनके लंबे करियर की सबसे उल्लेखनीय विशेषताओं में से एक माना जाता है।
उनकी सक्रियता ने यह दिखाया कि रचनात्मकता और नए विचारों की तलाश किसी उम्र की सीमा में बंधी नहीं होती। इसी कारण उनके निधन को भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति के रूप में देखा जा रहा है।
तमिल और तेलुगु सिनेमा में छोड़ी गहरी छाप
सिंगीतम श्रीनिवास राव का काम तमिल और तेलुगु फिल्म उद्योग से गहराई से जुड़ा रहा। उनके निधन के बाद दोनों फिल्म उद्योगों में उनके योगदान को याद किया जा रहा है।
उनकी फिल्मों में प्रयोग, अलग विषयों की तलाश और कहानी को नए तरीके से पेश करने की कोशिश उनकी पहचान रही। यही वजह है कि कई पीढ़ियों के कलाकारों और फिल्मकारों के बीच उनका प्रभाव देखने को मिला।
उनके करियर की लंबाई और विविधता ने उन्हें भारतीय सिनेमा के महत्वपूर्ण फिल्मकारों की कतार में स्थापित किया। उनके काम की चर्चा उनके निधन के बाद एक बार फिर व्यापक स्तर पर हो रही है।
94 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा
सिंगीतम श्रीनिवास राव का 3 अक्टूबर को चेन्नई में निधन हुआ। वह 94 वर्ष के थे और उम्र संबंधी स्वास्थ्य जटिलताओं के लिए उनका इलाज चल रहा था।
उनके निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे फिल्मकार को खो दिया, जिसने लंबे समय तक नए विचारों और प्रयोगों के साथ काम किया। उनकी फिल्मों की विरासत आने वाले समय में भी सिनेमा प्रेमियों और फिल्मकारों के बीच चर्चा में बनी रहेगी।
पुष्पक विमान, माइकल मदना काम राजन, आदित्य 369, मयूरी और अपूर्व सहोदरंगल जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने भारतीय सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई।
प्रयोगधर्मी सिनेमा की एक बड़ी आवाज का अंत
सिंगीतम श्रीनिवास राव के निधन पर फिल्म जगत से सामने आई प्रतिक्रियाएं उनके योगदान के व्यापक प्रभाव को दर्शाती हैं। कमल हासन, एस.एस. राजामौली, जूनियर एनटीआर और महेश बाबू जैसे प्रमुख नामों का उन्हें याद करना उनके प्रभाव की व्यापकता को सामने लाता है।
उन्होंने अपने लंबे करियर में सिनेमा की सीमाओं को आगे बढ़ाने और नए तरीके आजमाने की कोशिश जारी रखी। यही वजह है कि उन्हें भारतीय सिनेमा के एक ऐसे फिल्मकार के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने प्रयोग को अपनी रचनात्मक पहचान का हिस्सा बनाया।
94 वर्ष की उम्र में उनके निधन के साथ भारतीय फिल्म जगत ने एक अनुभवी और प्रयोगधर्मी निर्देशक को खो दिया है। उनकी फिल्मों और सिनेमा के प्रति उनके दृष्टिकोण की विरासत लंबे समय तक याद की जाएगी।










