चंपावत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में भूमि विनियमितीकरण, कृषि, राजस्व, वित्त, गृह, कार्मिक, सिंचाई, पशुपालन और उच्च शिक्षा से जुड़े कई फैसलों को मंजूरी मिली। निजी विश्वविद्यालय, कर्मचारियों की संपत्ति और नहर सुरक्षा के नियमों में भी बदलाव होंगे।
चंपावत: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई उत्तराखंड कैबिनेट बैठक में भूमि, कृषि, राजस्व, वित्त, गृह, कार्मिक, सिंचाई, पशुपालन और उच्च शिक्षा से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार ने भूमिधरी अधिकार, कर्मचारियों की संपत्ति की जानकारी, नहरों की सुरक्षा, कुक्कुट पालन और छात्रों के कौशल विकास से जुड़े नियमों में बदलाव का फैसला किया है।
भूमि विनियमितीकरण की समय सीमा बढ़ी
कैबिनेट ने वर्ग तीन और वर्ग चार की लालकुआं-बिंदुखत्ता भूमि के विनियमितीकरण और भूमिधरी अधिकार से जुड़ी समय सीमा को एक वर्ष बढ़ाने का निर्णय लिया है। पहले यह समय सीमा नवंबर 2022 में समाप्त हो रही थी। अब एक वर्ष के भीतर वर्ग तीन और वर्ग चार से जुड़े ऐसे मामलों को 2004 के सप्लीमेंट के आधार पर विनियमित कर भूमिधरी अधिकार प्राप्त किया जा सकेगा।
राजस्व विभाग से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव में भूमिधरी से संबंधित एक्ट 2025 के प्रावधानों को लागू करने के लिए नियमावली बनाने को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है। इससे कानून के प्रावधानों को लागू करने की प्रक्रिया को सरल बनाने में मदद मिलेगी। भूमि की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री के लिए पैन की अनिवार्यता पर भी कैबिनेट ने सहमति दी है।
कृषि और वित्त से जुड़े फैसले
कृषि क्षेत्र में टीडीसी को लाभकारी संस्था के रूप में काम करने और उसका कारोबार बढ़ाने के लिए ₹66 करोड़ का पैकेज देने का निर्णय लिया गया है। इसका उद्देश्य राज्य के भीतर और राज्य के बाहर भी टीडीसी की गतिविधियों को बढ़ाना है।
वित्त विभाग के प्रस्तावों में कुमाऊं और गढ़वाल के सीसीएफ को कार्यालय आदेश की शक्ति देने पर सहमति बनी है। छठे राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत पंचायती राज और स्थानीय निकायों को वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराने से जुड़े प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है। पहले राज्य के पांचवें वित्त आयोग में प्रत्येक निकाय के लिए राजस्व का साढ़े 11 प्रतिशत तय था, जिसे अब बढ़ाकर साढ़े 12 प्रतिशत किया गया है।
कर्मचारियों की संपत्ति से जुड़े नियम बदले
गृह विभाग के तहत कर्मचारी आचरण नियमावली में संशोधन को मंजूरी दी गई है। समूह क, ख और ग के कर्मचारियों को प्रत्येक पांच वर्ष में अपनी संपत्ति का विवरण देना होगा। समूह घ के कर्मचारी भी हर पांच वर्ष में संपत्ति का विवरण देंगे।
अचल संपत्ति खरीदने की जानकारी संबंधित विभाग को देना अनिवार्य होगा। यदि कोई कर्मचारी ऐसे व्यक्ति से संपत्ति खरीदता है जिसका सरकार से संबंध या सरकारी लेनदेन हो, तो ऐसी स्थिति में सरकार से अनुमति लेना आवश्यक होगा। चल संपत्ति खरीदने पर भी राज्य सरकार को इसकी सूचना देनी होगी।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के तहत विशेष मामलों में लोक अभियोजन उपलब्ध नहीं होने पर राज्य सरकार को सूचना देकर उसकी सहमति से किसी मामले या मामलों के समूह के लिए अभियोजक नियुक्त करने का प्रावधान भी किया गया है।
सतर्कता और सिंचाई व्यवस्था में बदलाव
कार्मिक विभाग के तहत सतर्कता अधिष्ठान से जुड़े नियमों में भारतीय न्याय संहिता के अनुसार धाराओं में संशोधन को मंजूरी मिली है। सतर्कता विभाग के ढांचे में उप निरीक्षक, निरीक्षक और आरक्षी के अलावा अपर उप निरीक्षक का पद भी शामिल किया गया है।
पीआरडी अधिकारी के पद को समूह ग से बदलकर समूह ख करने का फैसला हुआ है। राज्याधीन साक्षात्कार नियमावली में भी इसका संशोधन किया जाएगा और लोक सेवा आयोग में भी आवश्यक बदलाव किया जाएगा।
सिंचाई विभाग में ब्रिटिश काल के उत्तरी भारत एवं जल निकास अधिनियम 1873 की जगह नया कानून बनाने पर सहमति दी गई है। इसमें सिंचाई नहरों के निर्माण और जल प्रबंधन की व्यवस्था होगी। नहर के पानी के अनधिकृत उपयोग पर जुर्माना लगाया जाएगा। नहर या उससे जुड़ी संरचना को नुकसान पहुंचाने पर छह माह तक कारावास का प्रावधान होगा। नहरों की 200 मीटर की परिधि में प्लास्टिक और खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
कुक्कुट पालन और उच्च शिक्षा को लेकर बड़े फैसले
पशुपालन विभाग के तहत कुक्कुट पालन में इस्तेमाल होने वाले आहार पर सब्सिडी देने का फैसला किया गया है। यह सब्सिडी डीबीटी के माध्यम से दी जाएगी। इससे 2,000 कुक्कुट पालकों को लाभ मिलेगा और इसके लिए ₹2 करोड़ की सब्सिडी दी जाएगी। पशुपालन, डेयरी और मत्स्य विभाग के लिए डायरेक्टर जनरल का एक पद भी सृजित किया गया है।
उच्च शिक्षा विभाग में नई योजना लागू करने को मंजूरी दी गई है। विभाग में इस समय करीब 1 लाख 20 हजार छात्र अध्ययनरत हैं। रोजगार में आ रही दिक्कतों को देखते हुए प्रत्येक सेमेस्टर में छह क्रेडिट का कौशल आधारित कोर्स कराया जाएगा। इसमें एआई समेत अन्य कौशल से जुड़े पाठ्यक्रम शामिल होंगे। इसके लिए ₹200 करोड़ की योजना को मंजूरी दी गई है, जो पांच वर्ष तक चलेगी।
निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के नियमों में भी बदलाव किया गया है। पहले निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए 10 एकड़ भूमि की आवश्यकता थी, जिसे घटाकर अब 20,000 वर्ग मीटर किया जा सकता है। वहीं, वित्तीय मानक के तहत पहले ₹5 करोड़ की गारंटी देने की आवश्यकता थी, जिसे समाप्त कर दिया गया है।










