Vidhatri Bandi: ‘जलसा’ के बाद नहीं मिला मनचाहा काम, बोलीं- रिजेक्शन से उबरना सीखा

Vidhatri Bandi: ‘जलसा’ के बाद भी मनचाहा काम नहीं मिलने पर विदात्री बंदी ने अपने संघर्ष और रिजेक्शन पर बात की। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को रोल मिलने पर भी

अभिनेत्री विधात्री बंदी के लिए पहचान बनाना और लगातार काम मिलना हमेशा एक जैसा सफर नहीं रहा। उन्होंने हाल ही में ‘मैक्स, मिन एंड म्याओजाकी’ में लीड रोल निभाकर अपनी अभिनय क्षमता का दम दिखाया।

एंटरटेनमेंट न्यूज़: अभिनेत्री विधात्री बंदी ने अपने अभिनय करियर, काम के लिए संघर्ष और रिजेक्शन से जुड़ी चुनौतियों पर खुलकर बात की है। अभिनेत्री ने बताया कि किसी प्रोजेक्ट के लिए मेहनत करने के बाद जब उन्हें रिजेक्ट कर किसी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को कास्ट किया जाता है, तो उन्हें निराशा होती है। हालांकि, समय के साथ उन्होंने इन असफलताओं को स्वीकार करना और उनसे आगे बढ़ना सीख लिया है।

विधात्री बंदी को दर्शकों ने ‘शिद्दत’, ‘जलसा’, ‘द डिप्लोमैट’ और हालिया प्रोजेक्ट ‘मैक्स, मिन एंड म्याओजाकी’ जैसे कामों में देखा है। उन्होंने इंडस्ट्री के कई चर्चित कलाकारों के साथ काम किया है और अपने अभिनय के जरिए अलग पहचान बनाने की कोशिश जारी रखी है।

‘जलसा’ के बाद बढ़ गई थीं उम्मीदें

विधात्री बंदी के लिए ‘जलसा’ उनके करियर का एक अहम पड़ाव रहा। फिल्म में उन्हें विद्या बालन और शेफाली शाह जैसे अनुभवी कलाकारों के साथ काम करने का अवसर मिला। इस प्रोजेक्ट के बाद उन्हें उम्मीद थी कि इंडस्ट्री में उनके लिए काम के नए रास्ते खुलेंगे। हालांकि, उनके मुताबिक ‘जलसा’ के बाद उन्हें उतने अवसर नहीं मिले, जितनी उन्होंने उम्मीद की थी। 

उन्होंने बताया कि एक समय फिल्म और मनोरंजन उद्योग की रफ्तार भी धीमी हो गई थी और कई प्रोजेक्ट्स रुक गए या आगे खिसक गए। इस दौर ने उन्हें यह समझने में मदद की कि अभिनय के क्षेत्र में सिर्फ प्रतिभा ही नहीं, बल्कि धैर्य और लगातार काम करते रहने की क्षमता भी जरूरी है।

‘मुझे काम करते रहना था’

अभिनेत्री ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि एक समय ऐसा आया जब उनके पास प्रोजेक्ट चुनने के बहुत ज्यादा विकल्प नहीं थे। उस समय उनका प्राथमिक लक्ष्य काम से जुड़े रहना था। उनके मुताबिक, वह खुद को लंबे समय तक पर्दे से दूर नहीं रखना चाहती थीं। इसलिए जो अवसर मिलते गए, उन्होंने उन पर काम किया। धीरे-धीरे उनका नजरिया भी बदलता गया।

विधात्री ने बताया कि पहले उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण था कि उन्हें लगातार स्क्रीन पर देखा जाए। लेकिन अब वह केवल काम करने के बजाय ऐसे किरदार और प्रोजेक्ट चुनना चाहती हैं, जिनसे उन्हें व्यक्तिगत संतुष्टि मिले।

अब सिर्फ दिखना नहीं, अच्छा काम करना चाहती हैं

अभिनेत्री के करियर को लेकर सोच में बड़ा बदलाव आया है। शुरुआती दौर में वह अधिक से अधिक काम करने और इंडस्ट्री में अपनी मौजूदगी बनाए रखने पर ध्यान देती थीं। अब वह अपनी पसंद और रचनात्मक संतुष्टि को ज्यादा महत्व देती हैं। उनका मानना है कि हर प्रोजेक्ट स्वीकार करने के बजाय ऐसे काम का इंतजार करना बेहतर है, जो उन्हें बतौर कलाकार आगे बढ़ने का मौका दे। यह बदलाव उनके लिए करियर के साथ-साथ व्यक्तिगत विकास का भी हिस्सा है।

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की कास्टिंग पर क्या बोलीं?

आज के दौर में सोशल मीडिया की लोकप्रियता का असर मनोरंजन उद्योग पर भी दिखाई देता है। विधात्री ने कास्टिंग में सोशल मीडिया फॉलोइंग की बढ़ती भूमिका पर अपनी राय साझा की। उन्होंने बताया कि कई बार किसी कलाकार को सीधे यह नहीं बताया जाता कि उसे क्यों रिजेक्ट किया गया। लेकिन बाद में जब प्रोजेक्ट सामने आता है और उस भूमिका में किसी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को देखा जाता है, तो उन्हें स्थिति का अंदाजा हो जाता है।

अभिनेत्री ने माना कि ऐसी परिस्थितियां आज भी उन्हें प्रभावित करती हैं। रिजेक्शन चाहे किसी भी कलाकार के लिए हो, वह उस समय दुख पहुंचाता है। लेकिन उनके अनुसार, लगातार ऐसे अनुभवों से कलाकारों के भीतर एक तरह की मानसिक मजबूती विकसित होती है।

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