Vijay Diwas 2025 पर राष्ट्र ने किया शौर्य को नमन, राष्ट्रपति मुर्मू और पीएम मोदी ने की भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित

Vijay Diwas 2025 पर राष्ट्र ने किया शौर्य को नमन, राष्ट्रपति मुर्मू और पीएम मोदी ने की भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित

Vijay Diwas पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1971 युद्ध के वीर सैनिकों को नमन किया। 16 दिसंबर 1971 की जीत ने भारत को ऐतिहासिक गौरव दिलाया।

Vijay Diwas 2025: देश आज विजय दिवस 2025 मना रहा है। यह दिन भारतीय इतिहास में साहस, रणनीति और बलिदान का प्रतीक है। 16 दिसंबर 1971 को भारतीय सेना ने पाकिस्तान पर ऐतिहासिक विजय हासिल की थी। इसी युद्ध के परिणामस्वरूप बांग्लादेश का जन्म हुआ था। इस गौरवशाली अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय सैनिकों के शौर्य और बलिदान को नमन किया।

विजय दिवस केवल एक सैन्य जीत की याद नहीं है, बल्कि यह उस आत्मबल और संकल्प की मिसाल है, जिसने भारत को एक मजबूत राष्ट्र के रूप में स्थापित किया।

1971 का युद्ध और ऐतिहासिक जीत

1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध केवल 13 दिनों तक चला, लेकिन इसके प्रभाव दशकों तक महसूस किए गए। 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण किया था। करीब 93 हजार पाक सैनिकों का सरेंडर (surrender) दुनिया के सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में गिना जाता है।

भारतीय सैनिकों की वीरता, सटीक रणनीति और नेतृत्व के सामने पाकिस्तान को घुटने टेकने पड़े। इस युद्ध के साथ ही बांग्लादेश को आजादी मिली और दक्षिण एशिया की राजनीति में बड़ा बदलाव आया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संदेश

विजय दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने भारत माता के वीर सपूतों को सादर नमन करते हुए कहा कि उनके साहस, पराक्रम और मातृभूमि के प्रति अनन्य निष्ठा ने राष्ट्र को हमेशा गौरवान्वित किया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय सैनिकों की वीरता और राष्ट्रप्रेम आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने भारतीय सेना की स्वदेशीकरण से सशक्तिकरण (self-reliance and indigenisation) की पहल की भी सराहना की।

ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संदेश में ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान में भारतीय सेना ने आत्मनिर्भरता, सामरिक दृढ़ता और आधुनिक युद्ध शैली (modern warfare) के प्रभावी उपयोग का परिचय दिया है।

उन्होंने इसे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने की सेना की प्रतिबद्धता बताया और कहा कि यह पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत है। राष्ट्रपति ने सभी सैनिकों और उनके परिवारों को विजय दिवस की शुभकामनाएं दीं और जय हिन्द के उद्घोष के साथ अपना संदेश समाप्त किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया बलिदान को याद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विजय दिवस पर भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने एक्स पर लिखा कि इस अवसर पर हम उन बहादुर सैनिकों को याद करते हैं, जिनके साहस और बलिदान ने 1971 में भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सैनिकों के पक्के इरादे और निस्वार्थ सेवा ने देश की रक्षा की और इतिहास में गौरव का एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ा। उन्होंने सैनिकों की बहादुरी को सलाम करते हुए कहा कि यह दिन उनकी बेमिसाल भावना की याद दिलाता है।

पीढ़ियों को प्रेरित करता शौर्य

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि भारतीय सैनिकों की वीरता देश की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। विजय दिवस केवल अतीत को याद करने का दिन नहीं है, बल्कि यह भविष्य के लिए प्रेरणा लेने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र हमेशा अपने सैनिकों के योगदान को याद रखेगा और उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

अमित शाह का सख्त और भावुक संदेश

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी विजय दिवस पर वीर सैनिकों और शहीदों को नमन किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1971 में आज ही के दिन भारतीय सुरक्षा बलों ने अदम्य साहस और सटीक रणनीति के बल पर पाकिस्तानी सेना को परास्त किया था।

अमित शाह ने कहा कि इस विजय ने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ ढाल बनकर मानवता की रक्षा का उदाहरण पेश किया। यह जीत भारतीय सेनाओं की अद्वितीय सैन्य क्षमता और पराक्रम का प्रमाण है।

शहीदों के सर्वोच्च बलिदान को नमन

गृह मंत्री ने कहा कि विजय दिवस पर वह उन वीर शहीदों को नमन करते हैं, जिन्होंने युद्ध में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका बलिदान देश की सुरक्षा और सम्मान की नींव है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सेना ने हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा है और संकट की हर घड़ी में देश की रक्षा की है।

विजय दिवस का राष्ट्रीय महत्व

विजय दिवस भारत के सैन्य इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है। यह दिन याद दिलाता है कि जब राष्ट्र एकजुट होता है, तो कोई भी चुनौती असंभव नहीं होती। 1971 की जीत ने भारत को न केवल सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित किया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी उसकी साख को मजबूत किया। यह दिन उन सैनिकों के सम्मान का प्रतीक है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

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