वंदे मातरम् बहस: असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी को घेरा, कहा- 'वफादारी का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए'

वंदे मातरम् बहस: असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी को घेरा, कहा- 'वफादारी का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए'

लोकसभा में सोमवार को वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा के दौरान ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा। 

नई दिल्ली: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को कहा कि भारत को आज़ादी इसलिए मिली क्योंकि हमने मुल्क और मजहब को एक नहीं बनाया। लोकसभा में वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार को इस पर किसी तरह का जोर-जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए और यदि ऐसा किया जाता है तो वह संविधान के खिलाफ होगा।

ओवैसी का तर्क: देशभक्ति केवल नारे नहीं

ओवैसी ने चर्चा के दौरान कहा कि भारत में आजादी इसलिए मिली क्योंकि हमने मुल्क और मजहब को एक नहीं बनाया। उन्होंने कहा,

'जिन लोगों ने जंग-ए-आजादी में हिस्सा नहीं लिया, वे आज वतन से मोहब्बत का ढोंग कर रहे हैं। अगर असली देशभक्ति दिखानी है तो गरीबी और सामाजिक असमानता को खत्म किया जाए।'

एआईएमआईएम सांसद ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि क्या पार्टी वंदे मातरम् को वफादारी का ‘टेस्ट’ बनाना चाहती है। उन्होंने साफ किया कि वतन-परस्ती किसी मजहब में तब्दील नहीं हो सकती और “वतन मेरा है और हम इसे छोड़कर नहीं जाएंगे। ओवैसी ने अपने भाषण में धार्मिक दृष्टिकोण पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इस्लाम में अल्लाह के सिवा कोई खुदा नहीं और मुसलमान किसी गीत या उद्घोष के माध्यम से अपनी वफादारी को प्रमाणित नहीं करते।

तेजस्वी सूर्या का पक्ष

बीजेपी के तेजस्वी सूर्या ने कहा कि वंदे मातरम् पर चर्चा इसलिए जरूरी है ताकि देश के युवा अतीत की गलतियों से सीखें। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी की तुष्टीकरण मानसिकता और तत्कालीन सरकार के फैसले, जैसे शाहबानो मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पलटना, ने देश में असमान सोच को जन्म दिया।

सूर्या ने कहा कि यही मानसिकता आज समान नागरिक संहिता और SIR (मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण) के विरोध में देखने को मिल रही है।समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद इकरा चौधरी ने वंदे मातरम् के असली भाव को समझने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल नारा लगाने या गीत गाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने यमुना नदी के प्रदूषण का उदाहरण देते हुए कहा, यह सिर्फ एक नदी का संकट नहीं, बल्कि किसान और आम जनता का संकट है। नमामि गंगे पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किये गए, लेकिन जब पानी जहर बन जाएगा तो जल सुजलाम कैसे होगा, किसान सुफलाम कैसे होगा? और दिल्ली की हवा में सांस लेना रोज 20 सिगरेट पीने जैसा हो गया है।

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