डॉक्टर सिर्फ डिग्री नहीं, सेवा और संवेदना को बनाएं अपना धर्म, देवघर एम्स के दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का संदेश

एम्स देवघर के दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने डॉक्टरों से सेवा, संवेदना और ईमानदारी को प्राथमिकता देने की अपील की। 11 मेधावी छात्र सम्मानित हुए।
डॉक्टर सिर्फ डिग्री नहीं, सेवा और संवेदना को बनाएं अपना धर्म, देवघर एम्स के दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का संदेश
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झारखंड के देवघर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के दूसरे दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने चिकित्सा पेशे से जुड़े युवाओं को सेवा, संवेदना और ईमानदारी का महत्व समझाया। उन्होंने डॉक्टरों से कहा कि चिकित्सा की डिग्री हासिल करना ही उनकी यात्रा का अंतिम लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि मरीजों की सेवा और मानवता के प्रति जिम्मेदारी को अपने पेशे का मूल आधार बनाना चाहिए। डॉक्टर का काम केवल बीमारी की पहचान करना और दवाएं लिखना नहीं है, बल्कि मरीज की पीड़ा को समझना, उसे भरोसा देना और कठिन समय में उसके साथ खड़े रहना भी है। दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति का यह संदेश उन विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण रहा, जो चिकित्सा शिक्षा पूरी करने के बाद अब अस्पतालों, स्वास्थ्य संस्थानों और समाज में अपनी जिम्मेदारियां संभालने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

एम्स देवघर में आयोजित इस समारोह में चिकित्सा और नर्सिंग से जुड़े विभिन्न पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। एमबीबीएस, बीएससी नर्सिंग, एमएससी नर्सिंग, एमडी और एमएस पाठ्यक्रमों के सफल विद्यार्थियों के लिए यह दिन उनकी शैक्षणिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। वर्षों की पढ़ाई, प्रशिक्षण, परीक्षाओं और व्यावहारिक अनुभव के बाद विद्यार्थियों को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। समारोह में 11 मेधावी विद्यार्थियों को भी शैक्षणिक उत्कृष्टता और बेहतर प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों के परिवारों, शिक्षकों और संस्थान के अधिकारियों के लिए भी यह गर्व का क्षण रहा, क्योंकि चिकित्सा क्षेत्र में किसी विद्यार्थी की सफलता के पीछे लंबे समय तक की गई मेहनत और मार्गदर्शन की अहम भूमिका होती है।

उपराष्ट्रपति के संदेश का मुख्य केंद्र डॉक्टरों की पेशेवर दक्षता के साथ उनका मानवीय व्यवहार रहा। चिकित्सा विज्ञान लगातार विकसित हो रहा है। आधुनिक उपकरण, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं, नई जांच तकनीकें और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियां इलाज को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर रही हैं। इसके बावजूद मरीज और डॉक्टर के बीच विश्वास का रिश्ता बेहद महत्वपूर्ण बना हुआ है। मरीज जब अस्पताल पहुंचता है, तो वह केवल बीमारी से राहत की उम्मीद लेकर नहीं आता, बल्कि अपने स्वास्थ्य और कई बार जीवन से जुड़ी चिंताओं के साथ डॉक्टर के सामने खड़ा होता है। ऐसे में डॉक्टर की संवेदनशीलता, बातचीत का तरीका और मरीज की परेशानी को ध्यान से सुनने की क्षमता उसके अनुभव को प्रभावित करती है। चिकित्सा शिक्षा का उद्देश्य केवल तकनीकी ज्ञान देना नहीं, बल्कि जिम्मेदार और संवेदनशील स्वास्थ्यकर्मी तैयार करना भी है।

दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति की उपस्थिति ने एम्स देवघर की शैक्षणिक उपलब्धियों और चिकित्सा सेवाओं में उसकी भूमिका को भी रेखांकित किया। देवघर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता महत्वपूर्ण विषय है। बेहतर चिकित्सा संस्थान होने से मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श, जांच और उपचार के लिए बड़े शहरों की ओर जाने की जरूरत कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता केवल अस्पताल की इमारतों और आधुनिक मशीनों से तय नहीं होती। प्रशिक्षित चिकित्सक, अनुभवी नर्सिंग कर्मचारी, व्यवस्थित अस्पताल प्रबंधन और मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार भी उतने ही आवश्यक हैं। इस दृष्टि से दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को दिया गया सेवा और संवेदना का संदेश चिकित्सा व्यवस्था की व्यापक जरूरतों से जुड़ा हुआ है।

कार्यक्रम में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव के भी शामिल होने की जानकारी दी गई थी। गोड्डा के सांसद डॉ. निशिकांत दुबे और राज्यसभा सांसद प्रदीप वर्मा की उपस्थिति भी कार्यक्रम की रूपरेखा में शामिल थी। एम्स देवघर के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रोफेसर डॉ. नितिन एम. गंगने के नेतृत्व में समारोह की तैयारियां की गई थीं। संस्थान के सभागार को पारंपरिक सोहराय और मिथिला चित्रकला से सजाया गया, जिससे कार्यक्रम में स्थानीय कला और सांस्कृतिक पहचान की झलक भी दिखाई दी। चिकित्सा शिक्षा जैसे आधुनिक विषय से जुड़े आयोजन में स्थानीय संस्कृति को स्थान देना झारखंड की विविध सांस्कृतिक विरासत को सामने लाने का माध्यम बना।

समारोह के आयोजन के लिए प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने भी तैयारियां कीं। उपराष्ट्रपति और अन्य विशिष्ट अतिथियों के आगमन को देखते हुए एम्स परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया तथा अतिथियों, सुरक्षाकर्मियों और मरीजों की आवाजाही को व्यवस्थित रखने के लिए अलग-अलग प्रवेश द्वार निर्धारित किए गए। मरीजों के लिए प्रवेश व्यवस्था को अलग रखा गया, ताकि दीक्षांत समारोह के कारण अस्पताल की नियमित सेवाओं पर अनावश्यक असर न पड़े। बड़े संस्थानों में ऐसे आयोजनों के दौरान सुरक्षा और अस्पताल की सामान्य गतिविधियों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है, क्योंकि चिकित्सा सेवाएं लगातार जारी रहती हैं और मरीजों की जरूरतें किसी कार्यक्रम के कारण रुक नहीं सकतीं।

चिकित्सा क्षेत्र में प्रवेश करने वाले युवाओं के लिए डिग्री प्राप्त करना एक नई जिम्मेदारी की शुरुआत भी है। पढ़ाई के दौरान विद्यार्थी शरीर की संरचना, बीमारियों, उपचार पद्धतियों, दवाओं और मरीजों की देखभाल से जुड़े अनेक विषयों का अध्ययन करते हैं। अस्पतालों में प्रशिक्षण के दौरान उन्हें वास्तविक परिस्थितियों का सामना करने का अवसर मिलता है। लेकिन मरीज के साथ व्यवहार, उसकी आशंकाओं को समझना, इलाज के विकल्पों को स्पष्ट तरीके से बताना और उसकी गरिमा का सम्मान करना ऐसे पहलू हैं, जिन्हें रोजमर्रा के पेशेवर आचरण में अपनाना पड़ता है। किसी मरीज के लिए डॉक्टर की बात और व्यवहार मानसिक संबल का काम कर सकता है। इसीलिए चिकित्सा पेशे में ज्ञान और संवेदना को एक-दूसरे का पूरक माना जाता है।

आज स्वास्थ्य सेवाओं के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं। एक ओर चिकित्सा तकनीक तेजी से बदल रही है, तो दूसरी ओर बड़ी आबादी तक समय पर और गुणवत्तापूर्ण उपचार पहुंचाने की जरूरत बनी हुई है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता, स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच, मरीजों की आर्थिक स्थिति और अस्पतालों में संसाधनों का बेहतर उपयोग जैसे विषय लगातार महत्वपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे में नए डॉक्टरों से अपेक्षा रहती है कि वे अपने ज्ञान का उपयोग केवल व्यक्तिगत करियर बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि समाज की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने में भी करें। सरकारी और निजी अस्पतालों के साथ-साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं और शोध संस्थानों में भी प्रशिक्षित चिकित्सा पेशेवरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

एम्स जैसे संस्थानों से पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों पर विशेष जिम्मेदारी इसलिए भी रहती है, क्योंकि उन्हें आधुनिक चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण का अवसर मिलता है। उनसे उम्मीद की जाती है कि वे अपने ज्ञान को लगातार अद्यतन रखें, नई शोध पद्धतियों से परिचित रहें और मरीजों के हित को प्राथमिकता दें। चिकित्सा विज्ञान में कोई भी डिग्री सीखने की प्रक्रिया का अंत नहीं होती। नई बीमारियों, बदलते उपचार विकल्पों और तकनीकी प्रगति के बीच डॉक्टरों को लगातार सीखना पड़ता है। इसके साथ ही उन्हें मरीजों की निजता, सूचित सहमति, पेशेवर ईमानदारी और चिकित्सा नैतिकता जैसे सिद्धांतों का पालन करना होता है। मरीज का विश्वास अर्जित करना और उसे बनाए रखना डॉक्टर के पेशे की बुनियादी जरूरत है।

एम्स देवघर का दूसरा दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों को सम्मान देने के साथ संस्थान की आगे की भूमिका को भी सामने लाता है। डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह अवसर अपने शिक्षकों, परिवार और उन सभी लोगों के योगदान को याद करने का भी है, जिन्होंने उनकी पढ़ाई और प्रशिक्षण में सहायता की। चिकित्सा शिक्षा का रास्ता लंबा और चुनौतीपूर्ण होता है। नियमित अध्ययन, व्यावहारिक प्रशिक्षण, परीक्षाओं और मरीजों की देखभाल से जुड़े अनुभवों के बीच विद्यार्थियों को अनुशासन और धैर्य विकसित करना पड़ता है। दीक्षांत समारोह इन प्रयासों की सार्वजनिक पहचान है, लेकिन इसके बाद शुरू होने वाला पेशेवर जीवन उनसे और अधिक जिम्मेदारी की अपेक्षा करता है।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का संदेश इसी जिम्मेदारी की ओर ध्यान दिलाता है कि डॉक्टरों की पहचान केवल उनकी डिग्री, पद या विशेषज्ञता से नहीं होनी चाहिए। मरीजों के प्रति संवेदनशीलता, उपचार में ईमानदारी और जरूरतमंदों की सेवा करने की भावना भी उनके काम का अभिन्न हिस्सा होनी चाहिए। चिकित्सा पेशे में तकनीकी दक्षता मरीज को सही उपचार देने के लिए जरूरी है, जबकि मानवीय संवेदना उसे सम्मान और भरोसे का अनुभव कराती है। दोनों के मेल से ही स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और भरोसेमंद बनाया जा सकता है। देवघर एम्स के दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को मिला यह संदेश उनके आगे के पेशेवर जीवन के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शन के रूप में देखा जा सकता है।

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