TATA से 132 साल पहले शुरू हुआ था वाडिया ग्रुप, जहाज बनाने से खड़ा किया 300 साल पुराना कारोबार

वाडिया ग्रुप की शुरुआत 1736 में सूरत से जहाज निर्माण के साथ हुई थी। टाटा से 132 साल पुराना यह कारोबारी समूह आज ब्रिटानिया और बॉम्बे डाइंग में सक्रिय है।

वाडिया ग्रुप की कारोबारी शुरुआत 1736 में सूरत से जहाज निर्माण के साथ हुई थी। लोवजी नुसरवानजी वाडिया ने इसकी नींव रखी। आज समूह ब्रिटानिया, बॉम्बे डाइंग समेत कई कारोबारों में सक्रिय है और इसका रिश्ता जिन्ना परिवार से भी जुड़ा है।

Business: भारत के पुराने कारोबारी घरानों में शामिल वाडिया ग्रुप की कहानी 1736 से शुरू होती है, जब लोवजी नुसरवानजी वाडिया ने सूरत में जहाज निर्माण का कारोबार शुरू किया था। टाटा ग्रुप की 1868 में हुई शुरुआत से 132 साल पहले अस्तित्व में आया यह कारोबारी परिवार आज भी सक्रिय है। वाडिया परिवार का रिश्ता पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के परिवार से भी जुड़ा है।

1736 में जहाज निर्माण से शुरू हुआ कारोबार

भारत के कारोबारी इतिहास में वाडिया परिवार की विरासत करीब तीन सदियों पुरानी है। लोवजी नुसरवानजी वाडिया ने 1736 में सूरत से जहाज निर्माण का काम शुरू किया। बाद में उनका कारोबार ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए जहाज बनाने तक पहुंचा।

वाडिया परिवार ने समुद्री जहाज निर्माण के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। उस दौर में मुंबई एक प्रमुख बंदरगाह और व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित हो रहा था। जहाज निर्माण से शुरू हुआ यह कारोबार समय के साथ कई अलग-अलग क्षेत्रों में फैलता गया।

टाटा से 132 साल पहले बनी कारोबारी विरासत

वाडिया ग्रुप की शुरुआत 1736 में हुई, जबकि टाटा ग्रुप की स्थापना 1868 में हुई थी। इस लिहाज से वाडिया परिवार की कारोबारी विरासत टाटा से 132 साल पहले शुरू हो चुकी थी।

आज वाडिया ग्रुप की गतिविधियां एफएमसीजी, रियल एस्टेट, टेक्सटाइल, केमिकल, प्लांटेशन और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों तक फैली हैं। ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज, बॉम्बे डाइंग और बॉम्बे बर्मा ट्रेडिंग कॉरपोरेशन समूह की प्रमुख कंपनियों में शामिल हैं।

बॉम्बे बर्मा ट्रेडिंग कॉरपोरेशन की शुरुआत 1863 में हुई थी। वहीं बॉम्बे डाइंग और ब्रिटानिया भी लंबे समय से कारोबार कर रही कंपनियां हैं। इस तरह 1736 से शुरू हुई कारोबारी विरासत अलग-अलग कंपनियों के जरिए आज भी आगे बढ़ रही है।

कौन संभाल रहा है वाडिया ग्रुप?

वाडिया ग्रुप किसी एक व्यक्ति की 100 फीसदी निजी कंपनी नहीं है, बल्कि वाडिया परिवार से जुड़ा कारोबारी समूह है। वर्तमान में नुस्ली एन. वाडिया इसके चेयरमैन हैं।

समूह की अलग-अलग कंपनियों की अपनी शेयरहोल्डिंग और कॉरपोरेट संरचना है। हालांकि वाडिया परिवार समूह का प्रमुख नियंत्रक परिवार माना जाता है और नुस्ली वाडिया इसके कारोबार का नेतृत्व कर रहे हैं।

जिन्ना परिवार से कैसे जुड़ा रिश्ता?

वाडिया परिवार की कारोबारी कहानी के साथ उसका मोहम्मद अली जिन्ना के परिवार से संबंध भी चर्चा में रहता है। जिन्ना की इकलौती संतान दीना जिन्ना ने पारसी कारोबारी परिवार के नेविल वाडिया से शादी की थी।

शादी के बाद दीना जिन्ना वाडिया परिवार का हिस्सा बनीं। नेविल और दीना वाडिया ने विभाजन के बाद भारत में रहना चुना और परिवार का कारोबार भी यहीं जारी रहा।

नुस्ली वाडिया हैं जिन्ना के नाती

दीना जिन्ना और नेविल वाडिया के बेटे नुस्ली एन. वाडिया हैं। इस रिश्ते के कारण नुस्ली वाडिया, मोहम्मद अली जिन्ना के नाती हैं।

इस तरह वाडिया परिवार की कहानी कारोबार और इतिहास दोनों स्तरों पर खास बनती है। एक ओर इसकी कारोबारी जड़ें 1736 के जहाज निर्माण तक जाती हैं, तो दूसरी ओर परिवार का संबंध जिन्ना के परिवार से जुड़ता है। करीब तीन शताब्दियों की इस यात्रा में वाडिया परिवार ने बदलते दौर के बीच भारत में अपने कारोबारी अस्तित्व को बनाए रखा है।

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