पश्चिम बंगाल में TMC विधायक बिभास सरदार ने आरोप लगाया कि शनिवार को उन पर दो बार हमला हुआ और उनकी कार का शीशा तोड़ा गया। उन्होंने BJP को जिम्मेदार ठहराया, जबकि भाजपा ने आरोपों से इनकार किया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हमलों को लेकर राजनीतिक विवाद फिर तेज हो गया है। बारुईपुर ईस्ट से TMC विधायक बिभास सरदार ने आरोप लगाया है कि शनिवार को उन पर दो बार हमला किया गया। इस दौरान उनकी कार का शीशा तोड़ दिया गया और उनके साथ मारपीट भी हुई। विधायक ने इस घटना के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, BJP ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि इस घटना में पार्टी से जुड़ा कोई व्यक्ति शामिल नहीं था।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पहली घटना मनसाताला और दूसरी गोलबेरिया हाट इलाके में हुई। दोनों स्थान जयनगर पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। हमले में विधायक की आंख में चोट लगने की बात भी सामने आई है। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और विधायक को वहां से सुरक्षित निकालने में मदद की। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
विधायक ने क्या लगाए आरोप?
बिभास सरदार के अनुसार, हमलावरों ने सबसे पहले उनकी कार के सामने का शीशा ईंट मारकर तोड़ दिया। इसके बाद गोलबेरिया हाट में उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। इस घटना में उनकी आंख में चोट आई। उनके सुरक्षा गार्ड और ड्राइवर को भी परेशान किए जाने का आरोप लगाया गया है।
घटना के बाद स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने विधायक को अस्पताल पहुंचाने में मदद की। सामने आई तस्वीरों और वीडियो में क्षतिग्रस्त कार तथा विधायक को चोट लगने के बाद सहायता दिए जाने के दृश्य दिखाई देते हैं। हालांकि, हमले में शामिल लोगों की पहचान और घटना के पीछे की वजह का निर्धारण जांच के बाद ही किया जा सकेगा।
TMC ने इस घटना को लेकर BJP पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा के जादवपुर संगठनात्मक जिला अध्यक्ष मनोरंजन ने आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना में BJP का कोई कार्यकर्ता शामिल नहीं था। फिलहाल, दोनों पक्षों के दावों के बीच पुलिस जांच महत्वपूर्ण है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हमला किसने किया और इसके पीछे क्या कारण थे।
विधानसभा चुनाव के बाद बढ़ा राजनीतिक तनाव
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक माहौल में बदलाव आया है। खबर में दिए गए विवरण के अनुसार, 4 मई 2026 को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद TMC सत्ता से बाहर हो गई और BJP ने पहली बार राज्य में सरकार बनाई।
इसके बाद के महीनों में TMC नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हमले, विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक नारों से जुड़ी कई घटनाएं सामने आने का दावा किया गया है। उपलब्ध विवरण में पिछले पांच महीनों के दौरान 26 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाए जाने की बात कही गई है।
इन घटनाओं में कहीं नेताओं की गाड़ियों पर अंडे फेंके जाने, कहीं जूते और पत्थर फेंके जाने और कहीं विरोध प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी की शिकायतें शामिल हैं। हालांकि, इन सभी घटनाओं को एक ही राजनीतिक समूह से जोड़ना उचित नहीं होगा, जब तक प्रत्येक मामले में जिम्मेदारी की स्वतंत्र पुष्टि न हो जाए।
बिभास सरदार पर कथित हमले ने एक बार फिर राज्य में राजनीतिक विरोध, नेताओं की सुरक्षा और चुनाव के बाद के तनाव पर बहस को तेज कर दिया है।
TMC के कई नेताओं को निशाना बनाए जाने का दावा
रिपोर्ट में पिछले कुछ महीनों के दौरान TMC के कई वरिष्ठ नेताओं और सांसदों से जुड़ी घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है।
28 मई को उत्तर 24 परगना जिले में TMC सांसद सौगत रॉय की कार पर अंडे फेंके जाने और उनके खिलाफ नारेबाजी किए जाने की जानकारी दी गई। इसके बाद 30 मई को सोनारपुर में TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के काफिले के आसपास भी विरोध प्रदर्शन और वस्तुएं फेंके जाने की घटना सामने आने का दावा किया गया।

6 जून को मदन मित्रा के काफिले पर अंडे फेंके जाने की खबर आई। इसके अलावा जून में युवा नेता सौमित्र बनर्जी और पूर्व मंत्री उदयन गुहा से संबंधित घटनाओं का भी जिक्र किया गया।
1 जुलाई को कृष्णनगर में TMC सांसद महुआ मोइत्रा पर अंडे, सब्जियां और पत्थर फेंके जाने का आरोप लगाया गया था। इन घटनाओं के बाद पार्टी नेताओं ने सार्वजनिक कार्यक्रमों और यात्राओं के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए।
हालांकि, इन मामलों की परिस्थितियां अलग-अलग हो सकती हैं। प्रत्येक घटना में शिकायत, पुलिस कार्रवाई और जांच की स्थिति को अलग-अलग देखना जरूरी है।
ममता बनर्जी के कार्यक्रमों में भी हुई नारेबाजी
रिपोर्ट के मुताबिक, TMC प्रमुख ममता बनर्जी के कार्यक्रमों के दौरान भी विरोध प्रदर्शन की घटनाएं हुईं। 8 जुलाई को कोलकाता में एक रैली के दौरान अंडे फेंके जाने और ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए जाने का दावा किया गया। यह कार्यक्रम बारुईपुर से जुड़े एक कथित दुष्कर्म और हत्या के मामले के विरोध में आयोजित रैली से संबंधित बताया गया।
इसके बाद 9 अगस्त को उत्तर 24 परगना जिले के हालीशहर में ममता बनर्जी की कार को प्रदर्शनकारियों द्वारा घेरने की घटना सामने आई। रिपोर्ट में कार पर कीचड़, चप्पल और पत्थर फेंके जाने के आरोपों का उल्लेख है। ममता बनर्जी ने भी उस घटना के दौरान अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी।
11 अगस्त को कोलकाता के श्यामबाजार में नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़े TMC कार्यक्रम के दौरान भी उनके खिलाफ नारेबाजी किए जाने की जानकारी दी गई। इन घटनाओं ने राज्य में राजनीतिक विरोध के तौर-तरीकों और सार्वजनिक कार्यक्रमों की सुरक्षा पर बहस को बढ़ावा दिया है।
नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
बिभास सरदार पर कथित हमले के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा के बावजूद ऐसी घटनाएं कैसे हो रही हैं। भारत में सुरक्षा का स्तर आमतौर पर संबंधित व्यक्ति के खतरे के आकलन और प्रशासनिक निर्णयों के आधार पर तय किया जाता है। X, Y, Y+, Z और Z+ जैसी श्रेणियों में सुरक्षा व्यवस्था की जाती है।
राज्य पुलिस और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी होती है कि वे खतरे का आकलन करें और आवश्यक सुरक्षा उपाय लागू करें। TMC नेताओं ने हाल के घटनाक्रमों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 में अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा श्रेणी Z+ से घटाकर Z किए जाने का दावा किया गया था। पार्टी नेता कुणाल घोष ने भी सुरक्षा प्रबंधों में बदलाव को लेकर चिंता जताई थी।
महुआ मोइत्रा की सुरक्षा से संबंधित मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा उनके निर्वाचन क्षेत्र के दौरे के दौरान दो अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात करने का आदेश दिए जाने का उल्लेख भी रिपोर्ट में है। इन व्यवस्थाओं की वर्तमान स्थिति और संबंधित आदेशों की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों से की जानी चाहिए।
पुलिस जांच के बाद स्पष्ट होगी तस्वीर
बिभास सरदार पर कथित हमले के मामले में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण पहलू पुलिस जांच है। जांच एजेंसियों को घटना के स्थान, समय, संभावित आरोपियों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और उपलब्ध वीडियो या अन्य साक्ष्यों की पड़ताल करनी होगी।
वहीं, BJP ने अपने कार्यकर्ताओं की संलिप्तता से इनकार किया है। ऐसे में किसी भी पक्ष को जिम्मेदार ठहराने से पहले जांच के निष्कर्षों की प्रतीक्षा करना जरूरी है।
पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद सामने आई राजनीतिक घटनाओं ने नेताओं की सुरक्षा, विरोध प्रदर्शन की सीमाओं और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। बिभास सरदार पर हुआ कथित हमला इसी व्यापक राजनीतिक विवाद की एक नई कड़ी बन गया है। आगे की स्थिति पुलिस जांच और आधिकारिक बयानों से स्पष्ट होगी।












