कौन थीं बेलवाडी मल्लम्मा? भूमि पेडनेकर निभाएंगी वीरांगना रानी का किरदार

बेलवाडी मल्लम्मा दक्षिण भारत की वीरांगना रानी थीं, जिन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के दौर में अपने साहस और नेतृत्व से इतिहास में खास पहचान बनाई। अब फिल्म

अभिनेता ऋषभ शेट्टी इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘द प्राइड ऑफ भारत: छत्रपति शिवाजी महाराज’ की तैयारियों में व्यस्त हैं। फिल्म की स्टार कास्ट में अब अभिनेत्री भूमि पेडनेकर का नाम भी जुड़ गया है। भूमि इस फिल्म में वीरांगना बेलवाडी मल्लम्मा का किरदार निभाती नजर आएंगी।

एंटरटेनमेंट न्यूज़: अभिनेता ऋषभ शेट्टी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘द प्राइड ऑफ भारत: छत्रपति शिवाजी महाराज’ को लेकर दर्शकों के बीच उत्साह लगातार बढ़ रहा है। फिल्म की स्टार कास्ट में अभिनेत्री भूमि पेडनेकर के शामिल होने के बाद इसकी चर्चा और तेज हो गई है। भूमि इस ऐतिहासिक फिल्म में बेलवाडी मल्लम्मा, जिन्हें रानी मल्लम्मा के नाम से भी जाना जाता है, का किरदार निभाती नजर आएंगी।

भूमि पेडनेकर के इस रोल की घोषणा के बाद लोगों की दिलचस्पी इस बात में बढ़ गई है कि आखिर बेलवाडी मल्लम्मा कौन थीं और उनका छत्रपति शिवाजी महाराज से क्या संबंध था। कर्नाटक की वीरांगना रानी मल्लम्मा को साहस, नेतृत्व और युद्ध कौशल के लिए याद किया जाता है। उनसे जुड़ी लोककथाओं और ऐतिहासिक विवरणों में उन्हें एक ऐसी शासक के रूप में बताया गया है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में अपने राज्य की रक्षा के लिए मोर्चा संभाला।

कर्नाटक के सोधे से जुड़ा था रानी मल्लम्मा का जीवन

प्रचलित विवरणों के अनुसार, बेलवाडी मल्लम्मा का जन्म वर्ष 1624 में कर्नाटक के सोधे क्षेत्र में हुआ था। उनके पिता का नाम राजा मधुलिंगा बताया जाता है। कहा जाता है कि मल्लम्मा को अपने भाइयों की तरह शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला और उन्होंने कम उम्र से ही शासन, रणनीति तथा युद्ध कौशल में रुचि दिखाई।

उस दौर में महिलाओं के लिए युद्ध और प्रशासन से जुड़ी भूमिकाएं सीमित मानी जाती थीं। इसके बावजूद मल्लम्मा ने युद्ध नीति और नेतृत्व की कला में दक्षता हासिल की। यही गुण आगे चलकर उन्हें एक प्रभावशाली शासक और योद्धा के रूप में पहचान दिलाने वाले बने। मल्लम्मा का विवाह बेलवाडी के शासक राजा ईशप्रभु से हुआ। विवाह के बाद वह बेलवाडी की रानी बनीं और राज्य के प्रशासनिक तथा सुरक्षा मामलों में सक्रिय भूमिका निभाने लगीं।

महिलाओं की सैन्य टुकड़ी बनाने का दावा

रानी मल्लम्मा से जुड़ी सबसे चर्चित बात उनकी महिला सैन्य टुकड़ी है। लोकपरंपराओं और कुछ ऐतिहासिक विवरणों में बताया गया है कि उन्होंने बेलवाडी की महिलाओं को संगठित कर एक विशेष युद्ध दल तैयार किया था। इस महिला टुकड़ी को युद्ध रणनीति, हथियारों के इस्तेमाल और रक्षा कौशल का प्रशिक्षण दिया गया था। कुछ प्रचलित कथाओं में दावा किया जाता है कि इस सेना में 5,000 से अधिक महिलाएं शामिल थीं।

हालांकि, इस टुकड़ी को भारत की पहली महिला सैन्य इकाई बताए जाने वाले दावों को ऐतिहासिक स्रोतों और उपलब्ध दस्तावेजों के संदर्भ में अलग-अलग तरह से देखा जाता है। फिर भी, रानी मल्लम्मा की कहानी महिलाओं के नेतृत्व और युद्ध में उनकी भूमिका का महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जाती है।

छत्रपति शिवाजी महाराज से कैसे जुड़ी रानी मल्लम्मा की कहानी?

बेलवाडी मल्लम्मा का नाम छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन से जुड़े एक संघर्ष के कारण भी चर्चा में आता है। प्रचलित कथाओं के अनुसार, उस समय छत्रपति शिवाजी महाराज विभिन्न क्षेत्रों में अपने सैन्य अभियानों का विस्तार कर रहे थे और उनकी सेना बेलवाडी क्षेत्र की ओर बढ़ रही थी। बताया जाता है कि बेलवाडी के शासक राजा ईशप्रभु छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रति सम्मान रखते थे।

लेकिन रास्ते में मराठा सेना और बेलवाडी क्षेत्र के किसानों के बीच कथित विवाद या झड़प के बाद परिस्थितियां बदल गईं। इसके बाद दोनों पक्षों की सेनाएं आमने-सामने आ गईं। संघर्ष के दौरान राजा ईशप्रभु की सेना के साथ रानी मल्लम्मा की महिला टुकड़ी ने भी युद्ध में हिस्सा लिया। लोककथाओं में मल्लम्मा को बेहद साहसी योद्धा के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

बच्चे को गोद में लेकर युद्ध में उतरने की कहानी

रानी मल्लम्मा से जुड़ी एक लोकप्रिय कथा के अनुसार, वह अपने छोटे बच्चे को गोद में लेकर युद्ध के मैदान में उतरी थीं। यह प्रसंग उनके साहस और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने राज्य की रक्षा के लिए संघर्ष किया। हालांकि, लंबे संघर्ष के बाद बेलवाडी की सेना को हार का सामना करना पड़ा। इस युद्ध में उनके पति राजा ईशप्रभु के वीरगति प्राप्त करने का भी उल्लेख मिलता है।

शिवाजी महाराज ने मांगी माफी?

प्रचलित विवरणों के अनुसार, जब छत्रपति शिवाजी महाराज को अपनी सेना की ओर से हुई कथित गलती या अनुचित व्यवहार की जानकारी मिली, तो उन्होंने रानी मल्लम्मा के प्रति सम्मान जताया। कुछ कथाओं में कहा गया है कि शिवाजी महाराज ने रानी से माफी मांगी, दोषी सैनिकों के खिलाफ कार्रवाई की और बेलवाडी का राज्य वापस करने का निर्णय लिया। इस प्रसंग को छत्रपति शिवाजी महाराज की न्यायप्रियता और महिलाओं के प्रति सम्मान से जोड़कर भी देखा जाता है।

हालांकि, इस घटना के विभिन्न विवरण इतिहास, स्थानीय परंपराओं और लोककथाओं में अलग-अलग रूप में मिलते हैं। इसलिए इससे जुड़े कुछ दावों को ऐतिहासिक संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों के आधार पर समझना जरूरी है।

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