Women Equality Day: सोमी अली ने कहा- 'सिर्फ बराबरी की बातें करने से नहीं बदलेगी महिलाओं की जिंदगी'

Women Equality Day पर सोमी अली ने महिला समानता को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सिर्फ बराबरी की बातें करने से महिलाओं की जिंदगी नहीं बदलेगी, इसके लिए ठोस

पिछले 20 वर्षों से महिलाओं के साथ काम कर रहीं अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता सोमी अली ने महिला समानता को लेकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा और असुरक्षा को उन्होंने बेहद करीब से देखा है।

एंटरटेनमेंट न्यूज़: हर साल 26 अगस्त को महिला समानता दिवस (Women Equality Day) मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं के अधिकार, समान अवसर और लैंगिक समानता के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर देता है। इसी मुद्दे पर अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता सोमी अली ने महिलाओं की सुरक्षा, घरेलू हिंसा, कानूनी सहायता और आत्मसम्मान को लेकर अपनी राय साझा की है।

करीब दो दशकों से महिलाओं के साथ काम कर रहीं सोमी अली का कहना है कि समाज में महिला समानता पर बातचीत जरूर बढ़ी है, लेकिन केवल चर्चा से वास्तविक बदलाव नहीं आएगा। उनके मुताबिक, असली समानता तब दिखाई देगी जब कानून, पुलिस व्यवस्था, न्याय प्रणाली और परिवारों की सोच महिलाओं की सुरक्षा और स्वतंत्रता को वास्तविक रूप से समर्थन देगी।

सिर्फ बातों से नहीं आएगा बदलाव

सोमी अली के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ हिंसा और भेदभाव पर बात करना जरूरी है, क्योंकि लंबे समय तक ऐसी घटनाओं को लेकर चुप्पी साधना आम बात रही है। लेकिन जागरूकता और वास्तविक बदलाव के बीच बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा कि किसी महिला के लिए बराबरी का अर्थ केवल उसके अधिकारों की चर्चा तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह भी देखना जरूरी है कि जब कोई महिला हिंसक या असुरक्षित रिश्ते से बाहर निकलना चाहती है तो क्या उसे पर्याप्त कानूनी, आर्थिक और सामाजिक सहायता मिलती है।

उनके मुताबिक, अदालतों का कामकाज, पुलिस की प्रतिक्रिया और परिवार का रवैया यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं कि कोई महिला वास्तव में कितनी सुरक्षित और स्वतंत्र है।

खतरे में महिला को तुरंत मिले सुरक्षा

सोमी अली ने महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था में तेजी की जरूरत पर विशेष जोर दिया। उनका कहना है कि जब कोई महिला तत्काल खतरे में हो, तो उसे सुरक्षा मिलने में देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने शेल्टर होम में सीमित जगह, कानूनी प्रक्रिया में लगने वाला समय और सुरक्षा आदेश मिलने में देरी जैसी समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया। 

उनके अनुसार, किसी महिला के लिए सबसे पहली जरूरत यह सुनिश्चित करना है कि वह उस समय सुरक्षित हो जब उसके सामने तत्काल खतरा मौजूद हो।
उनका मानना है कि बाकी कानूनी और सामाजिक प्रक्रियाएं बाद में भी चल सकती हैं, लेकिन किसी की जान और सुरक्षा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ आत्मविश्वास भी जरूरी

महिला सशक्तिकरण की चर्चा करते हुए सोमी अली ने शिक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता और कानूनी सहायता को महत्वपूर्ण बताया। हालांकि, उनके मुताबिक इन संसाधनों के साथ आत्मविश्वास भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसी महिलाओं को देखा है जिनके पास आर्थिक साधन, शिक्षा और कानूनी सहायता होने के बावजूद डर या सामाजिक दबाव के कारण वे अपनी स्थिति से बाहर नहीं निकल पाईं। 

दूसरी ओर, कुछ महिलाओं ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने लिए सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन चुना। सोमी के अनुसार, महिलाओं को सबसे पहले अपनी आवाज और अपने निर्णय पर भरोसा करना सीखना होगा।

'हर महिला पीड़ित और हर पुरुष दोषी नहीं'

सोमी अली ने महिला समानता को लेकर एक महत्वपूर्ण सामाजिक बहस की ओर भी ध्यान दिलाया। उनका कहना है कि लैंगिक समानता का अर्थ यह नहीं है कि हर मामले में महिला को सही और पुरुष को गलत मान लिया जाए। उन्होंने कहा कि समाज में महिलाएं भी अलग-अलग परिस्थितियों और व्यक्तित्वों के साथ मौजूद हैं और पुरुष भी एक जैसे नहीं होते। किसी भी घटना को केवल लिंग के आधार पर देखने के बजाय उसके वास्तविक तथ्यों को समझना जरूरी है।

उनके मुताबिक, महिलाओं के खिलाफ वास्तविक हिंसा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन झूठे आरोपों के मामलों को भी गंभीरता से देखना चाहिए। ऐसे मामले न केवल निर्दोष लोगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, बल्कि वास्तविक पीड़ित महिलाओं की शिकायतों पर भरोसा करने में भी मुश्किल पैदा कर सकते हैं।

सच्ची समानता का आधार है सच

सोमी अली के लिए महिला समानता का अर्थ किसी एक पक्ष का समर्थन करना नहीं, बल्कि तथ्यों और न्याय के पक्ष में खड़ा होना है। उनका मानना है कि कमजोर और जरूरतमंद व्यक्ति की सुरक्षा होनी चाहिए, लेकिन किसी गलत दावे को केवल इसलिए समर्थन नहीं मिलना चाहिए क्योंकि वह किसी खास वर्ग से जुड़ा है। उन्होंने जोर दिया कि सच्ची लैंगिक समानता निष्पक्षता, सम्मान और जवाबदेही पर आधारित होनी चाहिए।

अपने व्यक्तिगत अनुभवों का जिक्र करते हुए सोमी अली ने कहा कि उन्हें भी अपनी आत्म-मूल्य को समझने में समय लगा। उनके मुताबिक, कम उम्र में कई बार व्यक्ति दूसरों का ध्यान और स्वीकृति प्यार या सुरक्षा समझ लेता है। उन्होंने महिलाओं के लिए संदेश देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति द्वारा चुने जाने, पसंद किए जाने या स्वीकृति मिलने से किसी महिला की वास्तविक कीमत तय नहीं होती। गलत रिश्ते या परिस्थितियों से बाहर निकलना असफलता नहीं, बल्कि आत्मसम्मान की शुरुआत हो सकती है।

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