विधायिकाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 गुरुवार (16 अप्रैल, 2026) से लागू हो गया है। केंद्रीय कानून मंत्रालय ने इस संबंध में देर शाम अधिसूचना जारी की।
नई दिल्ली: भारत में हाल ही में लागू हुए Nari Shakti Vandan Adhiniyam 2023 के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर कई देश ऐसे हैं जहां संसद में महिलाओं की भागीदारी पहले से ही काफी अधिक है। अंतर-संसदीय संघ (Inter-Parliamentary Union) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, कई देशों में महिला प्रतिनिधित्व भारत से कई गुना ज्यादा है, जो लैंगिक समानता की दिशा में उनकी प्रगति को दर्शाता है।
दुनिया में सबसे आगे कौन?

रिपोर्ट के मुताबिक, संसद में महिलाओं की भागीदारी के मामले में Rwanda दुनिया में पहले स्थान पर है। टॉप देश (महिला प्रतिनिधित्व प्रतिशत)
- Rwanda – 63.8%
- Cuba – 57.2%
- New Zealand – 49.2%
- Denmark – 48% (फरवरी 2026 चुनाव के बाद)
- Iceland – 47.6%
- Sweden – 45%+
- Norway – 45%+
- South Africa – 45%+
इन देशों में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी मजबूत कानूनों, सामाजिक जागरूकता और आरक्षण नीतियों के कारण लगातार बढ़ी है। लैटिन अमेरिका और कैरेबियन क्षेत्र भी महिला प्रतिनिधित्व के मामले में आगे हैं, जहां औसतन 35.6% महिलाएं संसद में हैं। इस क्षेत्र में कई देशों ने राजनीतिक दलों के भीतर कोटा सिस्टम लागू किया है, जिससे महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
भारत की वर्तमान स्थिति
भारत में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी अपेक्षाकृत कम है। वर्तमान 18वीं लोकसभा में केवल 74 महिला सांसद हैं, जो कुल सदस्यों का लगभग 14% है।हालांकि Nari Shakti Vandan Adhiniyam 2023 के लागू होने के बाद उम्मीद की जा रही है कि आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ेगा। इस नए कानून के तहत लोकसभा की सीटों में विस्तार और पुनर्सीमांकन के बाद महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू किया जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार, भविष्य में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 815 तक हो सकती है, जिसमें एक बड़ा हिस्सा महिलाओं के लिए आरक्षित होगा।










