Year Ender 2025: RBI और सरकार करेंगे CPI इंडेक्स में बड़ा बदलाव, महंगाई टारगेट होगा नया

Year Ender 2025: RBI और सरकार करेंगे CPI इंडेक्स में बड़ा बदलाव, महंगाई टारगेट होगा नया

साल 2025 में भारत की महंगाई RBI के 2-6 प्रतिशत कम्फर्ट जोन में रही। खाने-पीने की कीमतों में गिरावट और GST कटौती से महंगाई नियंत्रण में रही। 2026 में सरकार और RBI CPI और टारगेट फ्रेमवर्क को नया बनाएंगे।

Year Ender 2025: साल 2025 में भारत में महंगाई का स्तर निवेशकों और आम नागरिक दोनों के लिए काफी सुकून देने वाला रहा। CPI यानी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स पर आधारित रिटेल महंगाई RBI के तय किए गए 2 से 6 प्रतिशत के कम्फर्ट जोन में रही। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में गिरावट और GST में कटौती के चलते महंगाई पर काबू रहा। अब सरकार और RBI 2026 में महंगाई की गणना और टारगेट को नए सिरे से तैयार करने की योजना बना रहे हैं।

2025 में महंगाई का ट्रेंड

2025 में महंगाई काफी धीमी रही। CPI आधारित रिटेल महंगाई साल भर RBI के 2 से 6 प्रतिशत के दायरे में बनी रही। खासकर खाने-पीने की चीजों की कीमतों में गिरावट और GST रेट कट के कारण महंगाई पर कंट्रोल बना रहा। थोक मूल्य सूचकांक यानी WPI में भी महंगाई कम होने के संकेत मिले। साल की शुरुआत में WPI पॉजिटिव था लेकिन घटता रहा और जून तक डिफ्लेशन की स्थिति बन गई। जुलाई और अक्टूबर में भी WPI नेगेटिव रही।

CPI या हेडलाइन महंगाई नवंबर 2024 से कम होने लगी थी। जून 2025 तक यह RBI के 2 से 4 प्रतिशत के दायरे में रही, उसके बाद 2 प्रतिशत से नीचे चली गई। खाने की चीजों का CPI में करीब 48 प्रतिशत वजन है। फूड महंगाई जनवरी में 6 प्रतिशत से शुरू होकर जून में नेगेटिव हो गई। नवंबर में लेटेस्ट डेटा के मुताबिक फूड महंगाई -3.91 प्रतिशत रही। महंगाई के 2 प्रतिशत से नीचे जाने से सरकार और RBI के बीच टारगेट पर बहस शुरू हो गई। RBI ने इंफ्लेशन टारगेटिंग पर कंसल्टेशन पेपर जारी किया है और सरकार नया फ्रेमवर्क 1 अप्रैल 2026 से लागू करेगी।

CPI और WPI में अंतर

CPI और WPI के बीच अंतर उनके वेटिंग पैटर्न और कवरेज के कारण है। फूड सेगमेंट दोनों में डिफ्लेशन में रहा, लेकिन सर्विसेज और नॉन-फूड गुड्स ने CPI को नेगेटिव होने से रोका। WPI में कच्चे तेल, ईंधन और मैन्युफैक्चर्ड सेगमेंट का ज्यादा वजन होने की वजह से फूड डिफ्लेशन ने इसे नेगेटिव बना दिया। नवंबर में WPI डिफ्लेशन में रहा जबकि CPI महंगाई सिर्फ 0.7 प्रतिशत थी। यदि सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं को हटा दें तो CPI भी डिफ्लेशन में रजिस्टर हुई।

RBI की मौद्रिक नीति और रेट कट

महंगाई कम होने की वजह से RBI ने फरवरी 2025 से अब तक शॉर्ट-टर्म बेंचमार्क लेंडिंग रेट यानी रेपो रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है। यह कदम अर्थव्यवस्था को सपोर्ट करने के लिए उठाए गए। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का कहना है कि हेडलाइन महंगाई 2026-27 के पहले हाफ में 4 प्रतिशत के टारगेट के करीब रहेगी।

अगर कीमती धातुओं को निकाल दें तो महंगाई और भी कम होगी। अच्छी फसल, खाने की कीमतों में गिरावट और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी कीमतों में स्थिरता के कारण CPI महंगाई 2025-26 में करीब 2 प्रतिशत रहने की संभावना है।

नए CPI सीरीज और इंडेक्स में बदलाव

सरकार नए CPI सीरीज पर काम कर रही है, जिसका बेस ईयर 2024=100 होगा। यह दशक में सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। नई सीरीज में आइटम बास्केट, वेट्स और इंडेक्स बनाने की मेथडोलॉजी पूरी तरह बदल दी जाएगी। इसका मकसद महंगाई के आंकड़ों को अधिक भरोसेमंद और रिप्रेजेंटेटिव बनाना है। नई CPI सीरीज फरवरी 2026 में रिलीज होगी। बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस के अनुसार, 2026 में महंगाई का सबसे अहम पहलू इस नए इंडेक्स और उसकी कंपोजिशन होगी।

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